











































लखनऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन लखनऊ शाखा एवं लखनऊ एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के संयुक्त तत्वावधान में "हैंड्स-ऑन स्पाइरोमेट्री वर्कशॉप: फ्रॉम बेसिक्स टू प्रैक्टिस" का आयोजन आईएमए भवन लखनऊ के आयोजित किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों को फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच, विशेष रूप से स्पाइरोमेट्री की व्यावहारिक जानकारी एवं नवीनतम मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने श्वसन रोगों की समय पर पहचान और सटीक जांच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अस्थमा, सीओपीडी तथा अन्य श्वसन रोगों के निदान और प्रबंधन में स्पाइरोमेट्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर आईएमए की सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने प्रो. सूर्यकांत टीबी एवं चेस्ट विभाग केजीएमयू को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रो. सूर्यकांत ने स्पाइरोमेट्री की क्लीनिकल उपयोगिता और व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएएम लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह ने की। सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने कार्यशाला के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में फेफड़ों की कार्यप्रणाली की मूल अवधारणा, अनुपात तथा स्नश्वस्न 25-75 जैसे प्रमुख पैरामीटरों की व्याख्या, ATS/ERS मानकों के अनुसार परीक्षण की प्रक्रिया तथा अवरोधक और प्रतिबंधात्मक पैटर्न की पहचान पर विस्तार से चर्चा की।
प्रो. अजय वर्मा, प्रो. शेतांशु श्रीवास्तव, डॉ. हेमंत अग्रवाल एवं डॉ.मृत्युंजय सिंह सहित विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रतिभागियों ने कार्य-स्टेशनों पर स्वयं स्पाइरोमेट्री परीक्षण कर उसकी तकनीकी बारीकियों को समझा। कार्यक्रम का समापन पोस्ट-टेस्ट एवं प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ। आयोजन में शहर के अनेक चिकित्सकों और पीडियाट्रिशियनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ. मनीष टंडन, कोषाध्यक्ष डॉ. अनिल त्रिपाठी, डॉ. अमित अग्रवाल सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सकों की उपस्थिति रही।
आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम श्वसन रोगों के बेहतर निदान और उपचार में महत्वपूर्णभू मिका निभाएंगे तथा रोगियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक सिद्ध होंगे।







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