












































प्रतीकात्मक
नयी दिल्ली (भाषा)। उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में दिवाली पर कुछ समय के लिए पर्यावरण-अनुकूल पटाखे फोड़ने की भले ही अनुमति दे दी हो लेकिन डॉक्टरों ने आगाह किया है कि एलर्जी राइनाइटिस, अस्थमा और ब्रोंकाइट्स से पीड़ित बच्चे त्योहार पर पटाखे जलाने से परहेज करें, क्योंकि इनका धुआं उनकी तबीयत बिगाड़ सकता है।
लोकनायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने पीटीआई-भाषा से कहा कि दिवाली पर भले ही हरित पटाखे फोड़े जाएं, लेकिन हर पटाखे में बारूद होता है जिससे धुआं निकलता है। उनके मुताबिक, हरित पटाखों से भले ही कम धुआं निकले, पर धुआं निकलेगा ज़रूर और यह उन बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकता है, जो प्रदूषण के प्रति पहले से संवेदनशील हैं तथा एलर्जी राइनाइटिस (Allergic rhinitis), अस्थमा (asthma), ब्रोंकाइट्स (bronchitis) और इसी तरह की अन्य श्वसन समस्याओं (respiratory issues) से पीड़ित हैं।
उन्होंने एलर्जी की आनुवंशिक प्रवृत्ति होने के कारण एलर्जी राइनाटिस, अस्थमा, ब्रोंकाइट्स, साइनस जैसी स्थितियों से जूझ रहे माता-पिता को प्रदूषण और सर्दियों के दौरान अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी। डॉक्टर (doctor) ने बताया कि ऐसे माता-पिता के बच्चों की सांस की नलियां अधिक संवेदनशील हो सकती हैं जिससे प्रदूषण बढ़ने पर उनकी परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि उनके बच्चों को एलर्जी की समस्या हो ही लेकिन एहतियात बरतना बेहद जरूरी है।
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में दिवाली पर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सात और आठ नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक हरित पटाखे चलाने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि पटाखे चलाने से निश्चित रूप से प्रदूषण बढ़ेगा।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को घने स्मॉग की चादर छाई रही। वायु गुणवत्ता में तेज गिरावट दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 391 पर पहुंच गया जो "गंभीर" श्रेणी के करीब है।
दिल्ली के बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बाल रोग विभाग के निदेशक डॉ. विवेक जैन ने कहा कि प्रदूषित हवा (pollution) के संपर्क में आने से बच्चों में लगातार खांसी, घरघराहट, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों के सामान्य विकास और उनकी कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने बताया कि हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्मकण श्वसन तंत्र में गहराई तक पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं। डॉ. जैन के मुताबिक, बच्चों की सांस लेने की गति वयस्कों की तुलना में अधिक होती है और उनके फेफड़ों का विकास जारी रहता है इसलिए प्रदूषण उनके स्वास्थ्य के लिए विशेष चिंता का विषय है।
प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनने पर जोर देते हुए डॉ. जैन ने कहा कि मास्क खरीदते समय माता-पिता अक्सर रंग, कार्टून प्रिंट और आकर्षक डिज़ाइन को प्राथमिकता देते हैं, जबकि उसकी फिल्ट्रेशन क्षमता, गुणवत्ता और चेहरे पर सही फिटिंग अधिक महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि मास्क बच्चे की उम्र और चेहरे के आकार के अनुकूल होना चाहिए ताकि वह नाक और मुंह को ठीक से ढके तथा किनारों से प्रदूषित हवा के प्रवेश की गुंजाइश कम रहे।
इसके अलावा, एलएनजेपी के वरिष्ठ डॉक्टर ने दिवाली के मौके पर घर की सफाई को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सूखे कपड़े से धूल साफ करने के बजाय गीले कपड़े का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि सूखी डस्टिंग से बच्चों में एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि बच्चों को उन चीज़ों से दूर रखा जाना चाहिए जिनसे उनमें एलर्जी के लक्षण उभरते हैं।







हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 994
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 742
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 721
हुज़ैफ़ा अबरार November 05 2026 0 658
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 560
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 539
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 539
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 994
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 742
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 721
हुज़ैफ़ा अबरार November 05 2026 0 658
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 560
हुज़ैफ़ा अबरार November 01 2026 0 539
हुज़ैफ़ा अबरार November 04 2026 0 539
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 10822
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 7231
एस. के. राणा February 01 2026 0 6958
एस. के. राणा January 20 2026 0 6699
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 6307
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 6069
एस. के. राणा January 13 2026 0 5600
सौंदर्य
सौंदर्या राय March 05 2022 0 35132
सौंदर्या राय February 26 2022 0 42999
सौंदर्या राय February 25 2022 0 78945
सौंदर्या राय February 08 2022 0 34068
admin January 15 2022 0 35960
सौंदर्या राय September 02 2021 0 61501
हमें खुशी है कि इस उत्पाद को एफडीए द्वारा प्रतिस्पर्धी जेनेरिक थेरेपी (सीजीटी) के रूप में नामित किया
मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर का होना एक आम बात हो गई है। वायरल फीवर के तेजी से फैलने का मुख्य का
इसे मेडिकल भाषा में पेरेस्टेसिया के रूप में जाना जाता है। यह तब हो सकता है जब आप अपनी बांह पर लेट गए
दक्षिण कोरिया में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 148,443 नये मामले दर्ज किये गये हैं और इ
देश में लगातार कोरोना का ग्राफ बढ़ रहा है। संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय काफी ज्य
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो ए के ठक्कर निदेशक न्यूरोसाइन्स मेदांता लखनऊ ने वृद्ध लोगो मे होने वाली
ओमिक्रोन से काफी आशंकित थे, लेकिन जनवरी के बाद हमें राहत मिली। जब अधिकांश मामले अलक्षणी व हल्के लक्ष
जिले के परिषदीय विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों को पुलिस लाइन प्राथमिक विद्यालय और खरखौदा ब्लॉक संसाधन
महिलाओं को टीका लगवाने के बाद भी स्तनपान जारी रखना चाहिए और आश्वस्त रहना चाहिए कि टीकाकरण उनके दूध क
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति महिलाओं से अवैध उगाही की जा रही है। जहां इस संबंध में परिजनों

COMMENTS