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लखनऊ। विश्व आघात दिवस (वर्ल्ड ट्रॉमा डे) पर एसजीपीजीआई स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (ATC) में सड़क सुरक्षा और प्राथमिक चिकित्सा पर जन जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। सेंटर के फैकल्टी और स्टाफ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में भारी संख्या में आम नागरिकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे डॉ. रुपाली ने करते हुए युवाओं में मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण ‘ट्रॉमा’ (गंभीर चोट) बताया। उन्होंने कहा अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं को सही सावधानी से रोका जा सकता है।
गोल्डन आवर और प्राथमिक चिकित्सा का महत्व पर एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन ने ट्रॉमा प्रबंधन में गोल्डन आवर दुर्घटना के बाद का पहला घंटे के महत्व पर कहा कि अस्पताल पहुँचाने से पहले मिलने वाली सही देखभाल और शुरुआती उपचार से कई जानें बचाई जा सकती हैं। निदेशक श्री धीमान ने बताया कि सड़क दुर्घटना कभी भी और कहीं भी हो सकती है। ऐसे समय में घायल व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक उपचार देना बहुत आवश्यक है। सबसे पहले दुर्घटनास्थल को सुरक्षित करें और एम्बुलेंस के लिए 112 नंबर पर कॉल करें। घायल व्यक्ति की साँस जाँचें और अधिक चोट लगने पर उसे अनावश्यक रूप से न हिलाएँ। रक्तस्राव होने पर साफ कपड़े से घाव पर दबाव डालें। घायल व्यक्ति को पानी या दवा न दें। समय पर प्राथमिक उपचार और सही सहायता किसी की जान बचा सकती है। सड़क सुरक्षा अपनाएँ और जीवन बचाने में सहयोग करें।
रोड साइड फर्स्ट रिस्पोंडर
डॉ. अमित ने बताया दुर्घटना स्थल पर आपातकालीन नंबर 108 पर कॉल करने के बाद फर्स्टएड शुरू कर दें जैसे खून बहने वाली जगह पर पट्टी बंधे या उंगलियों से दबाव खून बहना रोके यदि हड्डियों को नुकसान हुआ है तो उसे हिलाने से बचें और मरीज से बात करते हैं उसका मनोबल बढ़ाने में लगे रहे अस्पताल पहुंचने तक।
चेहरे और नाक कान में चोटों का रखें ध्यान
कान नाक गले और चेहरे पर लगने वाली चोटों या जबड़े के फ्रैक्चर की स्थिति में घबराएं नहीं प्राथमिक उपचार करने और सही समय पर अस्पताल पहुँचने की सलाह दी गई।
अंदर के घाव और चोट
विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाएँ केवल शारीरिक नहीं, बल्कि गहरा मानसिक आघात भी देती हैं। बुरे सपने, घबराहट और दुर्घटना का डर जैसे लक्षणों से उबरने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श और परिवार के सहयोग को जरूरी बताया गया।
अंगदान
अंगदान से बडा़ाकोई दान नहीं है के में डॉ. सुरुचि ने ‘ब्रेन डेथ’ के बारे में बताया कि एक व्यक्ति के अंगदान से 8 लोगों को नया जीवन मिलता है। उन्होंने अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए लोगों को इसका संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
सड़क सुरक्षा का महा-संकल्प
वैज्ञानिक सत्रों में सवालों का जवाब देते हुए प्रतिभागियों ने हेलमेट सीट बेल्ट स्पीड लिमिट आंखों की जांच कर चश्मा पहनने ड्रिंक एंड ड्राइव जैसे विषयों पर सवाल किए जिनका विशेषज्ञों ने जवाब दिया।
कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने यातायात नियमों के पालन दुर्घटना पीड़ितों की तुरंत मदद करने गाड़ी चलाते समय फोन का उपयोग न करने तथा समाज में सड़क सुरक्षा व अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ ली।
सड़क दुर्घटना में पहले एक घंटे का महत्व (गोल्डन आवर)
सड़क दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ (स्वर्णिम समय) कहलाता है। यह समय घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घायल को शीघ्र प्राथमिक उपचार देकर नजदीकी अस्पताल पहुँचाने से मृत्यु और गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। दुर्घटना होने पर तुरंत 112 नंबर पर कॉल करें, रक्तस्राव को रोकने का प्रयास करें और घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से न हिलाएँ। गर्दन या रीढ़ की चोट की आशंका होने पर विशेष सावधानी बरतें। याद रखें समय पर सहायता सही प्राथमिक उपचार और त्वरित चिकित्सा किसी की जान बचा सकती है।







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