











































प्रतीकात्मक
गाजियाबाद। जिले में कोरोना संक्रमण का खतरा फिर से बढ़ने लगा है। क्रॉसिंग रिपब्लिक सोसाइटी में रहने वाले एक ही परिवार के चार लोग कोरोना की चपेट में आ गए हैं। शुक्रवार को यहां रहने वाली 14 साल की छात्रा में कोरोना की पहचान हुई थी। शनिवार को छात्रा के माता-पिता के साथ छोटी बहन भी कोरोना पॉजिटिव मिली है। तीन नए मामले सामने आने के बाद जिले में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 15 तक पहुंच गई है। राहत ही बात यह है कि सभी का इलाज होम आइसोलेशन में ही किया जा रहा है।
क्रॉसिंग रिपब्लिक की एक सोसाइटी में रहने वाली छात्रा में शुक्रवार को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी, छात्रा को चार दिनों से बुखार और खांसी की शिकायत थी। छात्रा ग्रेटर नोएडा के एक स्कूल में पढ़ती है और उसके पिता हाल ही में गुजरात यात्रा से लौटकर आए हैं। छात्रा में संक्रमण की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग ने परिवार के अन्य सदस्यों के भी सैंपल लेकर जांच को भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट शनिवार को पॉजिटिव आई। सभी के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं।
सोसाइटी में कोरोना जांच शिविर लगाकर 200 सैंपल लिए
एक साथ चार मरीज मिलने में स्वास्थ्य विभाग ने सोसाइटी में कोरोना जांच शिविर लगाकर आस-पास रहने वालों के भी सैंपल लिए। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि छात्रा के अलावा परिवार में किसी को भी कोरोना का कोई लक्षण नहीं है। छात्रा के पिता एक निजी कंपनी में जॉब करते हैं और फिलहाल घर पर रहकर ही काम रहे हैं। जॉब के सिलसिले में ही उनका गुजरात जाना हुआ था। माता-पिता दोनों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। विभाग की ओर से उन्हें मेडिकल किट उपलब्ध करवाई गई है और रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए सोसाइटी और पास के दुकानदारों के नंबर उपलब्ध करवाए गए हैं। विभाग ने सोसयटी व आसपास के 200 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए हैं।
जीनोम सिक्वेंसिंग की अब तक नहीं मिली रिपोर्ट
जिले में वर्ष 2021 में दूसरी लहर बीतने के बाद सामने आने वाले सभी मरीजों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली भेजे जाते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जिले से अब तक लगभग 400 सैंपल दिल्ली भेजे गए हैं, लेकिन किसी की रिपोर्ट नहीं मिली है। डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता के अनुसार जीनोम सिक्वेंसिंग में यदि किसी नए वैरिएंट की पुष्टि होती है तो उसकी रिपोर्ट दिल्ली से लखनऊ भेजी जाती है, जिला स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट नहीं भेजी जाती। अभी तक गाजियाबाद के किसी भी मरीज में किसी नए वैरिएंट की पहचान नहीं हुई है।







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