देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

राष्ट्रीय

समलैंगिक शादियाँ मौलिक अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा अगर अदालत एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को विवाह का अधिकार देने के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 4 को पढ़ती है या इसमें कुछ शब्द जोड़ती है तो वह विधायी क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगी।

एस. के. राणा
October 20 2023 Updated: October 20 2023 14:01
0 284719
समलैंगिक शादियाँ मौलिक अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादियों (gay marriages) को मान्यता देने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे जोड़ों को शादी करने का कोई मौलिक अधिकार (fundamental right) नहीं है। कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए मंगलवार को कहा कि कोर्ट इस मुद्दे पर कानून नहीं बना सकता है, सिर्फ कानून की व्याख्या कर सकता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक लोगों को अधिकार मिलने चाहिए और उन्हें साथी चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा समलैंगिकता (homosexuality) सिर्फ शहरी विचार नहीं है और ऐसे समुदाय के जो लोग हैं वे अभिजात्यवादी (elitist) नहीं हैं। 

उन्होंने कहा कि ये विचार उन लोगों में भी हैं जो अलग-अलग शहरों या गांव में रहते हैं। सीजेआई (CJI) ने कहा कि 'क्वीयरनेस' (queerness) प्राचीन भारत से ज्ञात है। सीजेआई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में चार फैसले हैं। कुछ सहमति के हैं और कुछ असहमति के हैं। 

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा अगर अदालत एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय के लोगों को विवाह का अधिकार देने के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट (Special Marriage Act) की धारा 4 को पढ़ती है या इसमें कुछ शब्द जोड़ती है तो वह विधायी क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगी। 

बच्चा गोद लेने का अधिकार - Right to adopt a child
करीब 45 मिनट तक अपना फैसला पढ़ते हुए सीजेआई ने कहा समलैंगिक जोड़े संयुक्त रूप से बच्चा गोद ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह संसद या राज्य की विधानसभा को विवाह की नयी संस्था बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। कोर्ट का कहना है कि स्पेशल मैरिज एक्ट को सिर्फ इसलिए असंवैधानिक नहीं ठहरा सकते हैं क्योंकि वह सेम सेक्स शादी को मान्यता नहीं देता है। 

कोर्ट ने कहा कि क्या स्पेशल मैरिज एक्ट में बदलाव की जरूरत इसकी पड़ताल संसद को करनी होगी और अदालत को विधायी क्षेत्र में दखल देने में सावधानी बरतनी होगी। 

कोर्ट ने कहा जीवन साथी (life partner) चुनना किसी के जीवन की दिशा चुनने का एक अभिन्न अंग है। कुछ लोग इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय मान सकते हैं। यह अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की जड़ तक जाता है।  

एक बंटा हुआ फैसला - A divided decision
भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से वैध ठहराए जाने का अनुरोध करने वाली 21 याचिकाओं पर 3:2 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया। इस बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस एसके कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस पीएम नरसिम्हा और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं। 

जस्टिस कौल ने कहा समलैंगिक और विपरीत लिंग वाली शादियां को एक ही तरीके से देखना चाहिए। उन्होंने कहा सरकार को इन लोगों को अधिकार देने पर विचार करना चाहिए। 

केंद्र और राज्यों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश - Supreme Court's instructions to Center and States
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के कुछ निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने कहा समलैंगिक जोड़ों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा समलैंगिक लोगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार लोगों को जागरुक करें। समलैंगिक लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर (Helpline numbers) जारी किए जाएं। 

कोर्ट ने कहा समलैंगिक जोड़ों (gay couples) को पुलिस स्टेशन में बुलाकर या उनके निवास स्थान पर जाकर, केवल उनकी लिंग पहचान या यौन अभिविन्यास के बारे में पूछताछ करके उनका उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।  सेवाओं तक पहुंच में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।  ऐसे जोड़ों के लिए सेफ हाउस बनाए जाएं। ऐसे जोड़ों को उनकी मर्जी के बिना परिवार के पास लौटने को मजबूर नहीं किया जाए। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समलैंगिकों की व्यावहारिक चिंताओं, जैसे राशन कार्ड, पेंशन, ग्रेच्युटी और उत्तराधिकार के मुद्दों को संबोधित करने के लिए एक कमेटी के गठन के साथ आगे बढ़ने को कहा। 

समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं पर 10 दिनों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। 

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा, अब अयोध्या में मिलेगा हृदय, गुर्दा और मूत्ररोग का इलाज

मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा, अब अयोध्या में मिलेगा हृदय, गुर्दा और मूत्ररोग का इलाज

आरती तिवारी January 07 2023 33537

अयोध्या के मरीजों को लखनऊ के चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। दरअसल ह्दय, गुर्दा, और मूत्र रोग से पीड़ित मरी

कैंसर को लेकर पूरी दुनिया में चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी

कैंसर को लेकर पूरी दुनिया में चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी

हे.जा.स. February 03 2023 25976

डब्ल्यूएचओ के अनुसार कैंसर की घटनाओं की रिपोर्ट में यदि इसी प्रकार वृद्धि जारी रही तो 2040 तक कैंसर

कम पानी पीने से होता है किडनी स्टोन।

कम पानी पीने से होता है किडनी स्टोन।

हुज़ैफ़ा अबरार January 22 2021 22889

किडनी की पथरी से पीठ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हो सकता है, जो कुछ मिनटों या घंटो तक बना रह

हेपेटाइटिस के 95% रोगियों में लक्षण दिखाई नहीं देते हैं: डॉ. राहुल राय

हेपेटाइटिस के 95% रोगियों में लक्षण दिखाई नहीं देते हैं: डॉ. राहुल राय

लेख विभाग October 15 2023 102144

मुख्य रूप से 4 वायरस इस बीमारी के कारक माने जाते हैं – ए, बी, सी और ई- और काफी हद तक रोके जा सकते है

लोहिया अस्पताल में ओआरएस जागरूकता सप्ताह का हुआ आगाज़

लोहिया अस्पताल में ओआरएस जागरूकता सप्ताह का हुआ आगाज़

रंजीव ठाकुर July 28 2022 38909

डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग विभाग द्वारा भारतीय बाल रोग अकादमी के सहयोग से ब

केजीएमयू की न्यू ओपीडी में एसी और पंखे बीमार, भीषण गर्मी में मरीज बेहाल

रंजीव ठाकुर June 29 2022 32106

जब हेल्थ जागरण केजीएमयू पहुंचा तो भीषण गर्मी में न्यू ओपीडी में एयरकंडीशन और पंखों की हालत देख कर पस

ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है लीच थेरेपी, तिब्बिया कॉलेज में होगी इनकी पैदावार

ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है लीच थेरेपी, तिब्बिया कॉलेज में होगी इनकी पैदावार

आरती तिवारी December 20 2022 39354

एएमयू के हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में लीच थेरेपी से इलाज के साथ जोंक की पैदावार भी होगी। अधिक प

टेक महिन्द्रा अपने खर्च पर सभी कर्मचारियों का करवाएगी टीकाकरण।

टेक महिन्द्रा अपने खर्च पर सभी कर्मचारियों का करवाएगी टीकाकरण।

हुज़ैफ़ा अबरार March 21 2021 35659

टेक महिन्द्रा ने अपने सभी सहयोगियों को सरकारी ऐप के जरिये टीकाकरण के लिए खुद का पंजीकरण कराने और आवश

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजनाः असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा देने की गारंटी, केंद्र सरकार की अत्यंत कल्याणकारी योजना को समझें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजनाः असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा देने की गारंटी, केंद्र सरकार की अत्यंत कल्याणकारी योजना को समझें

आनंद सिंह March 24 2022 33608

यह तो सर्वविदित है कि देश में कुल कार्यबल की संख्‍या में लगभग 93 प्रतिशत कामगार असंगठित क्षेत्र के ह

कोविड अप्प्रोप्रिएट बेहेवियर, टीकाकरण और इम्युनिटी बढ़ाकर टाला जा सकता है महामारी का ख़तरा: डॉ सूर्यकांत

हुज़ैफ़ा अबरार June 30 2021 41952

अगर हम कोविड अप्प्रोप्रिएट बेहेवियर जैसे मिलने पर नमस्ते करना, हाथ धुलते रहना, मास्क लगाना और दो गज़

Login Panel