











































विश्व स्ट्रोक दिवस
लखनऊ। स्ट्रोक के मामले देशभर में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यदि इसके आंकड़ों पर गौर करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हर साल 1.5 करोड़ लोग स्ट्रोक (stroke) से पीड़ित होते हैं। इनमें से 50 लाख मरीज़ों की मृत्यु हो जाती है और अन्य 50 लाख मरीज़ विकलांग हो जाते हैं, जिससे उनके परिवार पर भी बोझ बढ़ता है। मेदांता हॉस्पिटल (Medanta Hospital) के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्ट्रोक पर जागरूकता हेतु विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर स्ट्रोक से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर सेमिनार में चर्चा की।
डॉ ए के ठक्कर, डायरेक्टर न्यूरोलॉजी (Neurology) ने बताया कि यह समस्या अधिकतर 50 वर्ष की आयु के बाद लोगों में देखने को मिलती हैं, परंतु पिछले कुछ समय से 30 से 35 वर्ष की आयु के लोगों में भी ब्रेन स्ट्रोक (brain stroke) के मामले बढ़ रहे हैं। अनुचित खानपान, व्यायाम की कमी व तनाव के कारण स्ट्रोक (stress) की संख्या हर साल बढ़ती ही जा रही है, जोअपने आप में ही एक चिंता का विषय है। इसलिए हर साल विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day) मनाया जाता है ताकि स्ट्रोक को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
डॉ ठक्कर ने बताया कि इससे बचने के लिए स्ट्रोक के लक्षणों (symptoms of stroke) पर ध्यान रखें। मरीज को बोलने और समझने में बहुत कठिनाई होती है, वह अचानक से किसी वाक्य को बोलने में सक्षम नहीं हो पाता है, उसे यदि कोई भी संवाद करने को कहा जाए तो वह उसमें असफल हो जाता है। उसे कुछ समझ में भी नहीं आता, उस दरमियान ऐसे में मरीज को शांत रहने के लिए कहें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ रित्विज बिहारी एसोसिएट डायरेक्टर न्यूरोलॉजी ने बताया कि स्ट्रोक की स्थिति में अस्पताल पहुंचने में गोल्डन ऑवर (golden hour) के महत्व पर जोर देते हुए लोगों को गोल्डन ऑवर के महत्व के बारे में शिक्षित किया, जो स्ट्रोक शुरू होने के 4, 5 घंटे बाद तक रहता है। एक स्ट्रोक के बाद, प्रति मिनट 2 लाख से अधिक मस्तिष्क कोशिकाएं मर जाती हैं। इस स्थिति में रोगी को नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। जहाँ स्ट्रोक का आकस्मिक और उचित इलाज होता हो, ताकि रोगी को बचाने के लिए जल्दी और सर्वोत्तम उपचार दिया जा सके। इसके अलावा स्ट्रोक के लक्षणों को समझना और तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना आवश्यक है।
डॉ रवि शंकर, डायरेक्टर- न्यूरोसर्जरी (Neurosurgery) ने बताया कि आज-कल की अनियमित जीवनशैली, अस्वस्थ आहार, तनाव, शराब, सिगरेट और गुटखा के अत्यधिक सेवन इत्यादि के चलते व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure), डायबिटीज (diabetes), दिल की बीमारी (heart disease) उत्पन्न हो जाती है। जिस कारण स्ट्रोक आने की संभावना बनी रहती है।
डॉ रवि ने बताया कि क्लॉट-बस्टर प्राप्त करने वाले 30 प्रतिशत व्यक्तियों में सुधार नहीं होता है क्योंकि वे प्रमुख स्ट्रोक या बड़े पोत अवरोध (LVO) से पीड़ित होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में भी इलाज में प्रगति हुई है। एक न्यूरो-रेडियोलॉजिस्ट-एक्स, न्यूरो-इंटरवेंशनिस्ट मस्तिष्क की धमनियों से क्लॉट हटाने के लिए एक डिवाइस का उपयोग कर सकता है। यदि अस्पताल तक पहुंचने के लिए त्वरित विश्लेषण और कार्रवाई की जाती है, तो उपचार रोगियों को उनकी जान बचाने के लिए अधिक प्रभावी ढंग से मदद कर सकता है।
डॉ लोकेंद्र गुप्ता एसोसिएट डायरेक्टर, इमरजेंसी ने बताया कि इसके लक्षणों में मरीज को बोलने और समझने में बहुत कठिनाई होती है, वह अचानक से किसी वाक्य को बोलने में सक्षम नहीं हो पाता है, सीटी स्कैन (CT scan) और एमआरआई (MRI) जैसे परीक्षणों के साथ मस्तिष्क की नैदानिक परीक्षा के बाद, डॉक्टर उपचार का सर्वोत्तम तरीका निर्धारित कर सकता है। यदि रोगी को गोल्डन ऑवर के दौरान लाया जाता है, तो चिकित्सक मस्तिष्क का सफलतापूर्वक उपचार कर सकता है। इस समस्या से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार करना चाहिए, पोषणयुक्त आहार को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए, सैचुरेटेड फैट, नमक, ट्रांसफैट और हाईकोलेस्ट्रॉल वाली चीजों से बचना चाहिए। फल और सब्जियां भरपूर मात्रा में खानी चाहिए। इसके अलावा व्यायाम (exercise) और योगाभ्यास (yoga) को भी अपने जीवनशैली में सम्मिलित करना बहुत आवश्यक है और साथ ही शराब का सेवन व तंबाकू इत्यादि के सेवन से दूर रहें, तनाव मुक्त जीवन जीएं और स्वस्थ रहें।
डॉ रोहित अग्रवाल एसोसिएट डायरेक्टर- इंटरनेशनल रेडियोलॉजी ने बताया कि जब शरीर की नसों में खून एकत्रित हो जाता है और इस कारण सिर में खून का प्रवाह किसी एक या कुछ नसों में रुक जाता है। इसके चलते ऑक्सीजन तत्व भी नहीं पहुंच पाते और सिर के अंदर की कोशिकाएं तुरंत मर जाती हैं। कई बार इसका दूसरा कारण सिर में ब्लीडिंग भी हो सकता है। यदि रोगी को गोल्डन ऑवर के दौरान अस्पताल लाया जाता है, तो चिकित्सक मस्तिष्क का सफलतापूर्वक उपचार कर सकते है। स्ट्रोक शुरू होने के 4, 5 घंटे बाद तक को गोल्डन ऑवर कहा जाता है। इस समस्या से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में सुधार करना चाहिए, पोषण युक्त आहार को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए, सैचुरेटेड फैट, नमक, ट्रांस फैट और हाई कोलेस्ट्रॉल वाली चीजों से बचना चाहिए, फल और सब्जियां भरपूर मात्रा में खानी चाहिए।

मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ स्ट्रोक के लिए एक तैयार अस्पताल है। यहां स्ट्रोक के मरीजों का इलाज विश्वस्तरीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। मेदांता हास्पिटल, लखनऊ में मरीजों की अत्याधुनिक देखभाल के साथ उन्हें हर प्रकार की स्वस्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जिससे मरीज को एक बेहतर जीवन प्राप्त होता है।







हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 399
हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 357
हुज़ैफ़ा अबरार July 09 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4753
एस. के. राणा January 20 2026 0 4641
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4585
एस. के. राणा January 13 2026 0 4403
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4333
एस. के. राणा February 01 2026 0 3962
एस. के. राणा February 04 2026 0 3752
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86826
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34714
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37936
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35413
लेख विभाग March 19 2022 0 35007
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72455
कोरोना के नए मामले जहां एक दिन में दोगुने हो गए वहीं, एक्टिव केस में तेजी से इजाफा हुआ है। आंकड़ों क
गोंडा के जिला अस्पताल में मिरेकल फीट इंडिया संस्था द्वारा क्लब फुट से पीड़ित दिव्यांग बच्चों का इलाज
डॉक्टर की पर्ची पर मिलेगी दवा। जिला अस्पतालों को नियमानुसार लाइसेंस लेने के साथ ही डॉक्टरों को प्रशि
केरल में सबसे ज्यारदा 20 मौतें हुई हैं।राजस्थान और हरियाणा की बात करें तो दोनों ही राज्यों में 6-6 म
कोरोना टीकाकरण की वजह से कथित मौतों को लेकर केंद्र सरकार ने कोई जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
बलरामपुर। सरकार उत्तर प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में जुटी हुई है और अ
देश के कई राज्यों में गरम हवाओं की दस्तक हो चुकी है। मौसम विभाग ने लू से बचने के लिए अलर्ट भी जारी क
डॉक्टर टैड्रॉस याद करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी उत्पन्न करने वाले वायरस SARS-CoV-2 की प्रथम सीक्
विधायक राजेश नागर हरियाणा सरकार के तारिफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अंतिम छोर पर
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक अमेठी से लौटते समय अचानक सामुदायिक

COMMENTS