











































लखनऊ। मेदांता अस्पताल में एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया पीड़ित 12 साल की बच्ची का हाफ-एचएलए मैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ। मध्य और पूर्वी यूपी में इस प्रकार का बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने वाला मेदांता पहला प्राइवेट अस्पताल बन गया है।
इस बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) में कई टीम्स ने मिल कर कार्य किया। ट्रांसप्लांट को लीड कर रहे डॉ अन्शुल गुप्ता, हेमटोलॉजी (Hematology), हेमेटो ऑन्कोलॉजी (Hemato Oncology) और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के निदेशक से हेल्थ जागरण (Health Jagaran) ने खास बातचीत की।
डॉ अन्शुल गुप्ता (Dr Anshul Gupta) ने बताया कि इलाहाबाद की रहने वाली 12 साल की बच्ची बुखार, शरीर में दर्द, एनीमिया की शिकायत के साथ 3 महीने पहले हमारे पास आयी थी। अस्पताल में हुई जांच में पाया कि वो एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (Acute Myeloid Leukemia) से ग्रसित थी। उसे शुरू में 2 बार कीमोथेरेपी (chemotherapy) दी गई जो बीमारी के नियंत्रण में लाने के लिए दी थी। इसके बाद हेप्लो-आइडेंटिकल (haplo-identical) बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रोसीजर किया गया।
ट्रांसप्लांट के लिए उसके पिता से हाफ एचएलए(HLA) दिया गया क्योंकि डॉक्टरों को उसके लिए पूरी तरह से मैच्ड डोनर (fully matched donor) नहीं मिला।आमतौर पर एचएलए (HLA) मैच्ड सिबलिंग डोनर्स एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के लिए पहली पसंद होती है। हालांकि मैच्ड एचएलए डोनर केवल 30% रोगियों के लिए ही उपलब्ध हैं। 70 प्रतिशत रोगियों को विकल्प दाताओं का सहारा लेना पड़ता है, जिनमें डोनर पंजीकरण या हेप्लो-मैच्ड डोनर के माध्यम से अनरिलेटेड डोनर (MUD) शामिल हैं।
डॉ अन्शुल गुप्ता ने कहा कि यह एक एचएलए हाफ मैच्ड ट्रांसप्लांट (half matched transplant) था। गंभीर न्यूट्रोपेनिया की 3 सप्ताह की लंबी अवधि और बहुत कम वाइट ब्लड सेल्स काउंट थी। प्रोसीजर के दौरान बच्ची को विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया एचईपीए (HEPA) फिल्टर रूम में रखा गया था। सफलतापूर्वक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के 15 दिन के बाद ब्लड काउंट रिकवर हो गया और अब बच्ची अच्छी है।
मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) में बीएमटी (Bone Marrow Transplant) सेवाओं की दक्षता के साथ विभिन्न रक्त कैंसर जैसे थैलेसीमिया (Thalassemia), सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) आदि का भी इलाज भी सफलता पूर्वक किया जा रहा है।
हाफ-एचएलए मैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने वाली टीम में हेमटोलॉजी, हेमेटो ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के कंसल्टेंट डॉ दीपांकर भट्टाचार्य, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन (Transfusion Medicine) एंड ब्लड बैंक (Blood Bank) के सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड डॉ आशीष तिवारी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन के निदेशक डॉ दिलीप दुबे और पैथोलॉजी (Pathology) व प्रयोगशाला चिकित्सा (Laboratory Medicine) विभाग की निदेशक डॉ मधुमती गोयल शामिल रहीं।







हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 126
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1176
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 385
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 245
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4998
एस. के. राणा January 20 2026 0 4949
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4851
एस. के. राणा January 13 2026 0 4627
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4529
एस. के. राणा February 01 2026 0 4305
एस. के. राणा February 04 2026 0 3976
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87043
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34931
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38104
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35602
लेख विभाग March 19 2022 0 35217
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72777
डॉ. रश्मि पंत ने कहा कि यदि प्रपत्र सही पाए जाते हैं तो इन्हें चिकित्सालय चलाने की अनुमति दी जाएगी अ
मेडिकल कॉलेजों की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुधारने की नई रणनीति बनाई गई है। अब सभी कॉलेजों को अति
केजीएमयू में अब प्रसूताओं को पंजीकरण और प्रोसीजर जैसे शुल्क से छूट मिलेगी। इसके साथ ही उनको ब्लड मै
आध्यात्मिक उन्नति के लिए ऐसा संगीत जो हमारे मन को शांत कर दे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जैसा कि हम जानते
कोविड-19 की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए डब्ल्यूएचओ-चीन के संयुक्त अध्ययन के पहले हिस्से का मार्च मे
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत का कुल खर्च कम है। इसे ठीक किया जाना चाहिए। यह कठिन संसाधनों से आता है औ
डॉ मंडाविया ने कहा कि टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, यानी जांच, पहचान, उपचार, टीकाकरण और कोविड उपयुक्त व्यवहार
उन्नाव जिलें में विचित्र बुखार से एक और बच्चे की मौत हो गई है। पुरवा तहसील के दलीगढ़ी मोहल्ले में वि
घोड़ों में पाई जाने वाली ग्लैंडर्स नामक बीमारी ने राजस्थान में दस्तक दे दी है और इसका संक्रमण फैलने
यहां के जगदेवा, फखरपुर, देवरिया, फरीदपुर सहित कई गांवों में 100 से अधिक लोग बीमार हैं। जानकारी के अन

COMMENTS