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स्ट्रोक से मरने वाले लोगों की संख्या 2050 तक हर साल 97 लाख होने का अनुमान: लैंसेट

पिछले 30 वर्षों में विश्व स्तर पर स्ट्रोक (stroke) से पीड़ित, मरने वाले या इस स्थिति के कारण विकलांग होने वाले लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह समस्या कम और मध्यम आय वाले देश में तेज दर से बढ़ रही है।

अखण्ड प्रताप सिंह
October 18 2023 Updated: October 18 2023 16:55
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स्ट्रोक से मरने वाले लोगों की संख्या 2050 तक हर साल 97 लाख होने का अनुमान: लैंसेट प्रतीकात्मक चित्र

नयी दिल्ली। दुनिया भर में स्ट्रोक से मरने वाले लोगों की संख्या 2050 तक 50 फीसदी बढ़कर हर साल 97 लाख होने का अनुमान है। इस पर हर साल 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक खर्च होने के आसार हैं । ऐसा अनुमान विश्व स्ट्रोक संगठन और लैंसेट न्यूरोलॉजी आयोग में अध्ययनकर्ताओं के विश्लेषण में लगाया गया है।  


पिछले 30 वर्षों में विश्व स्तर पर स्ट्रोक (stroke) से पीड़ित, मरने वाले या इस स्थिति के कारण विकलांग होने वाले लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह समस्या कम और मध्यम आय वाले देश (LMICs) में तेज दर से बढ़ रही है।


दक्षिण पूर्व एशिया में स्ट्रोक पर द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया जर्नल (Lancet Regional Health-Southeast Asia Journal) सीरीज के प्रमुख अध्ययनकर्ता और प्रोफेसर जयराज पांडियन ने कहा कि एशिया में अब तक सबसे ज्यादा स्ट्रोक के मामले सामने आए हैं। 2020 में वैश्विक स्ट्रोक से होने वाली मौतों का हिस्सा जोकि 61 फीसदी या लगभग 41 लाख मौतों के बराबर है।


एशिया के सापेक्ष कम होने के बावजूद, वार्षिक वैश्विक स्ट्रोक से होने वाली मौतों (deaths) की संख्या उप-सहारा अफ्रीकी देश (African countries) 2020 में छह फीसदी या 4,03,000 से बढ़कर 2050 में आठ फीसदी या 7,65,000 होने की आशंका है।


अध्ययनकर्ता ने कहा कि, हमें बारीकी से जांच करनी होगी कि,  इस वृद्धि का कारण क्या है, जिसमें अनियंत्रित खतरों का बढ़ता बोझ, विशेष रूप से उच्च रक्तचाप (high blood pressure) और इन क्षेत्रों में स्ट्रोक की रोकथाम और देखभाल सेवाओं की कमी शामिल है।


यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो, दक्षिण पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया और ओशिनिया (Oceania) में स्ट्रोक से होने वाली मौतों की संख्या 20 लाख तक बढ़ सकती हैं, जो 2020 में 31 लाख से बढ़कर 2050 में 49 लाख हो सकती हैं।


जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के बीच वैश्विक मृत्यु दर 36 फीसदी तक गिरने का अनुमान है, 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों के बीच यह 25 फीसदी से कम गिरने का अनुमान है। आयोग के अध्ययनकर्ताओं (researchers) का कहना है कि युवा लोगों में कमी इस आयु वर्ग में मधुमेह और मोटापे के बढ़ते स्तर के कारण हो सकती है।


एशिया और अफ़्रीका में भारी आर्थिक लागत - Huge economic cost in Asia and Africa

आर्थिक पूर्वानुमान से पता चलता है कि, स्ट्रोक की संयुक्त लागत, जिसमें प्रत्यक्ष लागत और आय की हानि शामिल है, 2017 में हर साल यह 891 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2050 में 2.31 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी। अनुमान है कि इन आर्थिक प्रभावों का बड़ा हिस्सा एशिया और अफ़्रीका में महसूस किया जाएगा।


अनुमानों से पता चलता है कि, मध्यम आय वाले देशों में स्ट्रोक से प्रत्यक्ष खर्च और आय हानि में बड़ी वृद्धि हुई है और एचआईसी में प्रत्यक्ष लागत में वृद्धि हुई है। उन्होंने कम आय वाले देशों में आर्थिक प्रभाव बढ़ने का भी अनुमान लगाया है, लेकिन वैश्विक आबादी और स्ट्रोक के मामलों में उनकी कुल कम हिस्सेदारी को देखते हुए, वैश्विक लागत में उनकी कुल हिस्सेदारी कम रहने का अनुमान है।


स्ट्रोक निगरानी, रोकथाम, देखभाल और पुनर्वास के सह-निर्माण, सह-कार्यान्वयन और निगरानी के लिए सभी संबंधित हितधारकों को शामिल करते हुए स्थानीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना करना।


स्ट्रोक की रोकथाम और देखभाल की सिफारिशों को लागू करने में सबसे आम समस्याओं में से एक धन की कमी है। अध्ययनकर्ताओं ने कहा, हमारा आयोग प्रत्येक सरकार द्वारा अस्वास्थ्यकर उत्पादों (जैसे नमक, शराब, शर्करा पेय, ट्रांस-वसा) के विधायी विनियमन और कराधान शुरू करने की सिफारिश करता है।


स्ट्रोक की देखभाल सेवाओं, क्षमता निर्माण (effective planning), प्रशिक्षण, उचित उपकरण, उपचार और सस्ती दवाओं (affordable medicines) के प्रावधान और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन आवंटन की प्रभावी योजना को प्राथमिकता देना।

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