











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में प्रगति के बाद भी केवल 15 फीसदी भारतीय मरीज शुरुआती निदान और उचित इलाज का लाभ उठा पाते हैं। चूंकि, कैंसर के मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे यह साफ है कि एक देशक में ये मामले दोगुने हो जाएंगे।
चूकि, कैंसर (Cancer) के बहुत ही कम मरीज सही समय पर निदान और इलाज का लाभ उठा पाते हैं, इसलिए इसके साथ इस मुद्दे को उठाना आवश्यक हो गया है।
नई दिल्ली में साकेत स्थित मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के चेयरमैन, हरित चतुर्वेदी ने बताया कि, “सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादा से ज्यादा मामलों में मरीज एडवांस चरण में इलाज करवाता है, जिसके कारण उसके बचने की उम्मीद बहुत कम होती है। वहीं बीमारी (Disease) की पहचान सही समय पर होने के साथ, उचित इलाज के साथ मरीज की जान बचाना संभव होता है। लोगों को यह जानने की आवश्यकता है कि 60 फीसदी कैंसर की रोकथाम संभव है। समय आगया है कि अब सभी रिसोर्सेस को कैंसर की रोकथाम और शुरुआती निदान के लिए उपयोग किया जाए।”
पिछले 2 दशकों में, कैंसर संबंधी केंद्रो और ट्रेनिंग के तरीकों में बड़े बदलाव देखे गए हैं। यहां तक कि, पिछले 15 सालों में जो विकास देखा गया है, वह पिछले 100 सालों में हुए विकास से भी ज्यादा है। जरूरत है तो बस बीमारी के पैटर्न और उसके लिए उपयुक्त इलाज की समझ होना, जिसके लिए एक उपयुक्त रिसर्च करना जरूरी है।
डॉक्टर हरित चतुर्वेदी ने आगे बताया कि, “शुरुआती चरण में इलाज सस्ता होने के साथ कम समय में पूरा हो जाता है, जिसके परिणाम भी अच्छे होते हैं। कैंसर के मामलों में तंबाकू (Tobacco) का सेवन एक बड़ी भूमिका निभाता है, इसके अन्य कारण डाइट(Diet), लाइफस्टाइल (lifestyle), सर्वाइकल (Cervical) कैंसर का टीका, लिवर कैंसर (Liver Cancer) आदि से संबंधित हैं। बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान के लिए लोगों को सही तरीके से शिक्षित करना आवश्यक है। प्राथमिक शिक्षा के साथ ही बच्चों को बीमारी के बारे में शिक्षित करने पर जोर देना चाहिए, इससे स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है।”
बड़े-बड़े सेंटरों को इलाज के विकल्पों को बढ़ाना चाहिए और सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए, जिससे लोग इन सुविधाओं तक आसानी से पहुंचकर उनका लाभ उठा सकें। अस्पतालों में इमेजिंग (Imaging), एंडोस्कोपीज़ (Endoscopy) और बायोप्सी (Biospy) जैसी सुविधाओं का उपलब्ध होना आवश्यक है।
एसओपी (SOP) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी मरीजों को इलाज की सुविधा 72 घंटों के अंदर मिल जाए। कैंसर की कोई भी सुविधा पैलिएटिव केयर सेटअप के बिना अधूरी होती है, इसलिए समय आगया है कि यह सुविधा हर सेंटर में उपलब्ध होनी चाहिए।







हुज़ैफ़ा अबरार May 07 2026 0 329
हुज़ैफ़ा अबरार May 03 2026 0 252
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3808
एस. के. राणा January 13 2026 0 3773
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3661
एस. के. राणा January 20 2026 0 3619
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3332
एस. के. राणा February 01 2026 0 3024
एस. के. राणा February 04 2026 0 2863
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86287
सौंदर्या राय April 08 2022 0 33888
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37131
सौंदर्या राय April 05 2022 0 34909
लेख विभाग March 19 2022 0 34314
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71573
दिल्ली में मच्छरों के खात्मे के लिए छेड़ी गई जंग अब तेज हो गई है। ऐसे में इस बीमारी को फैलाने वाले म
रेखा एस चौहान आईएएस रजिस्ट्रार, केजीएमयू ने कहा "हमारे बुनियादी ढांचे के साथ हरित ऊर्जा का एकीकरण हम
केजीएमयू में अब बीमारी के नाम पर तीन दिन से अधिक की छुट्टी नहीं मिल सकेगी। इलाज के लिए तीन दिन से अध
सीतापुर जनपद के खैराबाद में 19 दिसम्बर 2016 से 70 बेड का ट्रामा सेंटर संचालित हो रहा है लेकिन जरूरी
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने फरीदाबाद में करीब 12.30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बाबा बन्दा स
नए मामलों में सबसे ज्यादा 36 लखनऊ से, 31 गौतमबुद्धनगर से, 13 गाजियाबाद से, 4 प्रयागराज से और एक हरदो
राजधानी में स्थित एम्स ने सांसदों के लिए उपचार सुविधाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए जारी की मानक संचा
स्लम बस्तियों के माहवारी जागरूकता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए आशा वेलफेयर फॉउंडेशन की ओर से बदला
इस पाठ्यक्रम में गंभीर मरीजों की देखभाल की बारीकियां सिखाई जाएंगी। बीएससी नर्सिंग (B.Sc Nursing) से
सी.एम.ई. में शहर के लगभग 150 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया| कार्यक्रम में IMA-AMS के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

COMMENTS