












































प्रतीकात्मक चित्र
भारत सरकार ने वर्ष 1982 में देश में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति को सुधारने और इस संबंध में जागरूकता लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) की शुरुआत की थी। ध्यातव्य है कि इस कार्यक्रम के मुख्यतः 3 घटक हैं -
वर्ष 1987 में मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम (Mental Health Act) (MHA-87) लागू किया गया।
वर्ष 1996 में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को देश के प्राथमिक स्तर तक पहुँचाने के लिये ज़िला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) की शुरुआत की गई।
वर्ष 2017 में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 का स्थान ले लिया।
इसके अतिरिक्त WHO मानसिक स्वास्थ्य को मज़बूत करने और बढ़ावा देने के लक्ष्य के तहत सरकारों का समर्थन करता है।
वर्ष 2013 में विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) ने ‘2013-2020 के लिये व्यापक मानसिक स्वास्थ्य कार्य योजना’ को मंज़ूरी दी थी। इस योजना के तहत WHO के सभी सदस्य देशों ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने और जागरूकता बढ़ाने के लिये अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 - Mental Healthcare Act 2017
वर्ष 2017 में लागू किये गए इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य मानसिक रोगों से ग्रसित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा और सेवाएँ प्रदान करना है। साथ ही यह अधिनियम मानसिक रोगियों के गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार को भी सुनिश्चित करता है।
परिभाषा
इस अधिनियम के अनुसार, ‘मानसिक रोग’ से अभिप्राय विचार, मनोदशा, अनुभूति और याददाश्त आदि से संबंधित विकारों से होता है, जो हमारे जीवन के सामान्य कार्यों जैसे- निर्णय लेने और यथार्थ की पहचान करने आदि में कठिनाई उत्पन्न करते हैं।
मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के अधिकार
अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का अधिकार होगा।
अधिनियम में गरीबी रेखा से नीचे के सभी लोगों को मुफ्त इलाज का भी अधिकार दिया गया है।
अधिनियम के अनुसार, मानसिक रूप से बीमार प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार होगा और लिंग, धर्म, संस्कृति, जाति, सामाजिक या राजनीतिक मान्यताओं, वर्ग या विकलांगता सहित किसी भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को अपने मानसिक स्वास्थ्य, उपचार और शारीरिक स्वास्थ्य सेवा के संबंध में गोपनीयता बनाए रखने का अधिकार होगा।
मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की सहमति के बिना उससे संबंधित तस्वीर या कोई अन्य जानकारी सार्वजानिक नहीं की जा सकती है।
अग्रिम निर्देश
मानसिक रोगों से ग्रसित व्यक्ति को यह बताते हुए अग्रिम निर्देश देने का अधिकार होगा कि उसकी बीमारी का इलाज किस प्रकार किया जाए तथा किस प्रकार नहीं और इस संदर्भ में उसका नामित प्रतिनिधि कौन होगा।
आत्महत्या अपराध नहीं है
आत्महत्या (suicide) का प्रयास करने वाले व्यक्ति को मानसिक बीमारी से पीड़ित माना जाएगा एवं उसे भारतीय दंड संहिता के तहत दंडित नहीं किया जाएगा। इस अधिनियम ने भारतीय दंड संहिता की धारा 309 में संशोधन किया, जो पहले आत्महत्या को अपराध मानती थी।







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