











































लखनऊ। राजधानी में बलरामपुर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषण के खिलाफ जंग में बड़ी भूमिका निभा रहा है। हेल्थ जागरण ने एनआरसी का दौरा कर हकीकत जानी।
पाँच वर्ष तक के वह बच्चे जो अति कुपोषण (malnutrition) के साथ गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं उनके इलाज के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) द्वारा पूरे सूबे में जिला अस्पताल में एनआरसी स्थापित किए गए हैं। लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल (Balrampur Hospital) में 10 बेड का एनआरसी (Nutrition Rehabilitation Center) है।

न्यू ओपीडी के कमरा नबंर 20 में बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ ए.के. वर्मा एक बच्चे को देख रहे थे। डेढ़ साल का बच्चा केवल 5.8 किलो का था और चेकअप में सभी मानकों के नीचे पाया गया। डॉक्टर साहब ने उसे एनआरसी रेफर कर दिया।
बच्चे को लेकर आई रीना कश्यप, आंगनवाड़ी (Anganwadi), चिनहट ने हेल्थ जागरण (Health Jagaran) को बताया कि पहले भी वह दो बच्चों को यहाँ ला चुकी हैं जो अब बिल्कुल स्वस्थ है। उन्होंने कहा कि वह हर बच्चे का वजन और हाइट नापती रहती है और कुपोषित (malnourished) या बीमार लगने पर अस्पताल तक ले जाती है।

इस दौरान हेल्थ जागरण ने पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में फॉलोअप (follow-up) पर आए एक परिवार से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनकी जुंडवा (twins) बेटियां जन्म से ही काफी कमजोर थी जो अब तीन महीने बाद स्वस्थ हो रही हैं। हर 15 दिन पर यहाँ चेकअप के लिए लेकर आते है और अब काफी सुधार है। डॉ साहब ने खानपान के जो निर्देश दिए हैं उसी हिसाब से बच्चों को रखा जा रहा है।
हेल्थ जागरण ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ ए.के. वर्मा से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि एनआरसी की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गाइडलाइन के अनुसार यहाँ भर्ती बच्चों को इलाज मुहैया कराने के साथ आहार (treatment with food) भी दिया जाता है। इस दौरान बच्चे की माँ या उसके किसी एक देखभाल करने वाले को 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से श्रमह्रास भी दिया जाता है। बच्चे के चार फॉलोअप के लिए प्रति फॉलोअप 140 रुपये दिये जाते हैं। यह राशि सीधे उनके खाते में भेजी जाती है।
डॉ ए.के. वर्मा ने कहा कि बच्चों को बोतल से दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण (infection) का खतरा बना रहता है। डिब्बाबंद दूध (canned milk) या दूध में पानी मिलाकर नहीं देना है और उसे खुद से खाना खाने के लिए प्रेरित करना है।
बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि कुपोषित बच्चों (malnourished children) में रोगों से लड़ने की क्षमता बहुत कम होती है। ऐसे बच्चों को गंभीर डायरिया (diarrhea) और निमोनिया (pneumonia) होने की संभावना ज्यादा होती है। वर्ष 2015 से अभी तक एनआरसी में 2000 से अधिक बच्चों का सकुशल इलाज हो चुका है।







एस. के. राणा January 13 2026 0 3052
एस. के. राणा January 20 2026 0 2674
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 2611
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 2499
एस. के. राणा February 01 2026 0 2142
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 1890
एस. के. राणा February 04 2026 0 1883
सौंदर्य
सौंदर्या राय May 06 2023 0 102019
सौंदर्या राय March 09 2023 0 106393
सौंदर्या राय March 03 2023 0 106702
admin January 04 2023 0 106725
सौंदर्या राय December 27 2022 0 97026
सौंदर्या राय December 08 2022 0 85477
आयशा खातून December 05 2022 0 140154
लेख विभाग November 15 2022 0 109246
श्वेता सिंह November 10 2022 0 158519
श्वेता सिंह November 07 2022 0 109417
लेख विभाग October 23 2022 0 94170
लेख विभाग October 24 2022 0 97649
लेख विभाग October 22 2022 0 103358
श्वेता सिंह October 15 2022 0 106263
श्वेता सिंह October 16 2022 0 100616
बायोकॉन बायोलॉजिक्स ने बयान में कहा कि श्रीहास ताम्बे अरुण चंदावरकर की जगह लेंगे। वह अरुण चंदावरकर क
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मुंबई में खसरे के मामलों में बढ़ोतरी का जायजा लेने क
‘अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ की पूर्व संध्या पर साझा किया गया यह निष्कर्ष 2023 के लिए नमूना पंजीकरण
अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसी स्थिति है जो अल्सर की ओर ले जाती है और पेट में दर्द, खूनी मल और असंयम का क
रक्त वाहिकाओं में किसी रुकावट की वजह से दिमाग को खून की सप्लाई में कोई रुकावट आ जाए या सप्लाई बंद हो
डब्ल्यूएचओ जल्द ही भारत को ट्रेकोमा मुक्त घोषित कर सकता है। ट्रेकोमा जीवाणु संक्रमण से होने वाली आंख
एंडोमेट्रियोसिस में दर्द हल्के से लेकर गंभीर ऐंठन के रूप में हो सकता है। दर्द पेल्विक के दोनों किनार
मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर यानी तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग है। जिससे पीड़ित होने पर तंत्रिका कोश
संतुलित आहार के एक नहीं अनेक फायदे हैं। इससे व्यक्ति के शरीर में उन सभी पोषक तत्वों की पूर्ति होती ह
कई भारतीय संस्थानों द्वारा किए गए विभिन्न अध्ययनों ने लिवर प्रत्यारोपण के बाद के 30 से अधिक वर्षों क

COMMENTS