











































लखनऊ। स्ट्रोक एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। इसका सही से प्रबंधन कर हजारों मौतों को रोका जा सकता है। यह जानकारी देते हुए भारतीय स्ट्रोक एसो कअध्यक्ष डॉ. निर्मल सूर्या ने इंडियन स्ट्रोक असो के 18 वें वार्षिक सम्मेलन में दी।
इस सम्मेलन में प्रतिष्ठित डॉक्टर, शोधकर्ता शामिल हुए थे। स्ट्रोक मरीजों की बढती संख्या के रोकथाम के लिए क्या करना जरूरी हैं, इस बारे में सम्मेलन में चर्चा हुई। डा पी विजया ने कहा कि हमारा उददेश्य अनुसंधान की सीमाओं को आगे बढ़ाना, नए उपचार के तौर-तरीकों की खोज करना और वैश्विक स्तर पर जीवन बचाने के लिए रोकथाम रणनीतियों को बढ़ाना है।

डा ठक्कर ने कहा विश्व भर में स्ट्रोक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए इस तरह के सम्मेलन स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में अंतराल को पाटने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि अत्याधुनिक उपचार मरीजों तक तेज़ी व कुशलता से पहुँचे। यहाँ बनाई गई साझेदारियाँ न केवल नवाचार को बढ़ावा देंगी बल्कि स्ट्रोक जागरूकता प्रारंभिक पहचान और पुनर्वास में वैश्विक प्रयासों को भी मजबूत करेंगी, जिससे अंतत: लाखों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
आईएसए के सचिव डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा स्ट्रोक का बढता खतरा चिंता का कारण बन रहा हैं। इसलिए इस पर समय रहते ध्यान देने की आवश्यकता हैं। भारत में हर मिनट तीन लोग ब्रेन स्ट्रोक का शिकार होते हैं। जीवनशैली में बदलाव, अपर्याप्त नींद और नियमित स्वास्थ्य जांच के कारण स्ट्रोक के मामले बढ रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में स्ट्रोक के रोकथाम पर चर्चा की गई।
सम्मेलन में डॉ. पी. विजया निर्वाचित अध्यक्ष, डॉ. अरविंद शर्मा सचिव, डॉ. सलिल उप्पल, डॉ. आनंद अलुरकर तत्काल पूर्व अध्यक्ष, डॉ. वीजी प्रदीप कुमार पूर्व अध्यक्ष, डॉ. आर. लक्ष्मी नरसिम्हन, डॉ. अमित कुलकर्णी, डॉ. जयंत रॉय, डॉ. मोनिका सिंगला, डॉ. पवन कुमार ओझा, डॉ. श्रीपाल शाह और डॉ. त्रिलोचन श्रीवास्तव ने स्ट्रोक देखभाल और प्रबंधन के लिए वैश्विक साझेदारी के महत्व पर जोर दिया।







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