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कोरोना के हल्के संक्रमण में पेरासिटामोल के अलावा अन्य दवाओं का ज्यादा उपयोग चिंताजनक

कोरोना की तीसरी लहर में रोज लाखों केस सामने आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तीसरी लहर में हल्के लक्षण वाले मामले अधिक सामने आ रहे हैं।

हे.जा.स.
January 15 2022 Updated: January 16 2022 01:32
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कोरोना के हल्के संक्रमण में पेरासिटामोल के अलावा अन्य दवाओं का ज्यादा उपयोग चिंताजनक प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। कोरोना की तीसरी लहर में रोज लाखों केस सामने आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तीसरी लहर में हल्के लक्षण वाले मामले अधिक सामने आ रहे हैं। दूसरी लहर की तुलना में अस्पतालों पर दबाव भी कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के हल्के संक्रमण के मामले में बुखार की दवा पेरासिटामोल (Paracetamol) ही काफी है। मोलनुपिरवीर और एज़िथ्रोमाइसिन का ज्यादा उपयोग चिंताजनक है। 

जिन रोगियों को कोरोना टीका (Vaccine) नहीं लगा है और वह लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो उन्हें उच्च जोखिम वाला रोगी माना जा सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि गंभीर लक्षणों की ओर बढ़ने पर ऐसे रोगियों की निगरानी की जानी चाहिए। एंटीवायरल मोलनुपिरवीर (Anti-Viral Molnupiravir) के साथ सावधानी से इनका इलाज किया जा सकता है।

राष्ट्रीय कोविड टास्क फोर्स के एक सदस्य और संक्रामक रोग विशेषज्ञ संजय पुजारी ने कहा, "मोलनुपिरवीर को वर्तमान में एक गैर-टीकाकृत आबादी में मामूली लाभ के कारण हल्की बीमारी के प्रबंधन के लिए अनुशंसित नहीं किया गया है।"

पुजारी ने कहा कि बिना किसी जोखिम वाले मामलों यानी हल्के संक्रमण वाले कोविड रोगियों (vividh patients) पर इन दवाओं का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह अभी भी व्यापक रूप से हल्की बीमारी के इलाज के लिए निर्धारित किया जा रहा है।

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