











































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट में भारत के हेल्थ सेक्टर में हुई तरक्की को रेखांकित किया गया है। संगठन ने माना कि भारत ने हेल्थ सेक्टर में काफी तरक्की की है, हालांकि यह तरक्की सिर्फ प्राइवेट सेक्टर (private sector) में हुई है। सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र (government or public sector) में अभी काफी सुधार की गुंजाइश है।
यहां जारी अपनी रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अगर बीते दो सालों की बात करें तो यह देखा गया है कि भारत कोरोना (Corona) का मुकाबला तो कर रहा है पर उसे मौसमी बीमारियों (seasonal diseases) से भी जुझना पड़ रहा है। देश भर में हेल्थ सेक्टर (health sector) में किये गए कार्यों को गौर से देखें तो उसमें एक असामनता दिखती है। किसी राज्य ने बढ़िया काम किया तो कोई राज्य कुछ न कर सका। सरकारी क्षेत्र में सुविधाएं काफी कम हैं। निजी क्षेत्र में सुविधाएं तो हैं पर यहां इलाज (treatment) काफी महंगा (expensive) है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि भारत में भारतीयों को बहुत मुश्किल से गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलता है।

हृदय रोग और स्ट्रोक सबसे ज्यादा जानलेवा
इस रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो सालों में देश में मिश्रित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली देखने को मिल रही है, जो चुनौतियों को और गंभीर बना रही है। डब्ल्यूएचओ ने पाया कि देश में साल 2019 के दौरान सबसे ज्यादा मौतें हृदय रोग (heart disease), सीओपीडी (COPD) या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और स्ट्रोक के कारण हुईं। इन्हें लेकर जागरूकता, जांच (investigation), उपचार (treatment) पर अभी से जोर देना बहुत जरूरी है।
जीवन प्रत्याशा में भी आया सुधार...47.7 से बढ़कर 69.6 वर्ष हुई
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय लोगों की जीवन प्रत्याशा (life expectancy) में बढ़ोतरी हुई है। 1970 में जीवन प्रत्याशा 47.7 वर्ष अपेक्षित थी जो साल 2020 में बढ़कर 69.6 वर्ष हुई। इसके अलावा साल 2003 से अब तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को लेकर भी तेजी से सुधार दर्ज किया गया। प्रति एक लाख प्रसूति पर यह दर 301 से घटकर 130 रह गई। वहीं शिशु मृत्युदर (infant mortality rate) भी प्रति एक हजार शिशु पर 68 से घटकर 24 रह गई है।







हुज़ैफ़ा अबरार June 07 2026 0 1533
हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार June 04 2026 0 994
हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2026 0 833
हुज़ैफ़ा अबरार June 12 2026 0 791
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4438
एस. के. राणा January 20 2026 0 4312
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4284
एस. के. राणा January 13 2026 0 4193
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3962
एस. के. राणा February 01 2026 0 3612
एस. के. राणा February 04 2026 0 3521
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86623
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34441
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37642
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35217
लेख विभाग March 19 2022 0 34720
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72098
एक पूर्ण गर्भावस्था की अवधि 40 हफ्ते (280 दिन) होती है। इस अवधि के दौरान महिलाओं के गर्भ में कई चीज
कोरोना मरीजो के उपचार में भी एरा ने उत्कृष्ट कार्य किए हैं जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है।
डॉ. त्यागी ने कहा विश्व स्वास्थ्य दिवस के क्रम में मनाये जा रहे स्वच्छता पखवाड़ा का उद्देश्य लोगों क
निर्माण क्षेत्र में कार्यरत हों या फिर कचरा रिसाइकिल, स्ट्रीट वेंडर, किसान या फिर प्लास्टिक के क्षे
हर्षवर्धन ने कहा कि एडवांस डिप्लोमा इन हॉस्पिटल लिनन एंड लांड्री सर्विस मैनेजमेंट, एडवांस डिप्लोमा
कई महिलाओं को भीतरी थाई गैप आकर्षक और मनमोहक लगता है। थाई गैप नहीं होने से आधुनिक कपड़ों के चयन में भ
खान-पान में गड़बड़ी या दूसरी कारणों से पेट में कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं, पेट में दर्द होना भी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी आदेश दिया है कि वैक्सीन लगवाने से होने वाले साइड-इफेक्ट्स के
कंपनी ने कहा कि वह लगभग 140 देशों और क्षेत्रों में दवा का व्यावसायीकरण करना चाहती है, जिसमें टीबी से
कई बार ऐसा होता है कि प्लेटलेट्स व प्लाज्मा की जरूरत होती है और मरीज की जिंदगी बचाने के लिए लोगों को

COMMENTS