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नई दिल्ली। भारतीय दवा उद्योग कोविड -19 महामारी काल में वैश्विक गुणवत्ता वाली दवाओं का भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता साबित हुआ है। वर्ष 2030 तक भारतीय दवा बाज़ार 9.47 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। महामारी की शुरुआत के बाद, भारतीय फार्मा उद्योग ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन, व्यापार एवं आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी विश्वसनीय भूमिका दर्ज़ कराई है।
उक्त बातें केंद्रीय रासायनिक और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने सोमवार को बतायीं। वे इंडियन फार्मा एंड इंडिया मेडिकल डिवाइस 2021 के एक कार्यक्रम में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
गौड़ा ने कहा, "भारत अपने फार्मा उत्पादों के साथ 200 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहेगा। हम ध्वनि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यवसायिक समझ और नैतिकता पर आधारित योजनाएं जारी रखना चाहते हैं।" भारत में विदेशी निवेश के लिए फार्मास्यूटिकल्स शीर्ष -10 आकर्षक क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में एफडीआई 3,650 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और पिछले साल की तुलना में 98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किया। भारत उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण और आपूर्ति में अग्रणी भूमिका बनाए रखने के लिए प्रयास करना जारी रखेगा।
उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय चिकित्सा तक लोगों की पहुंच बेहतर कैसे हो, हमें यह भी देखना है। भारत की चिकित्सा सेवा को विश्व स्तरीय गंतव्य के रूप में विकसित करने वाली रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने में हम मदद करना चाहते हैं।







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