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डॉ पीके गोयल ने बताया कि सीटीओ (Chronic Total Occlusion) यानि क्रोनिक टोटल आक्लूजन में मरीज की आर्टरी बंद हो जाती है। इसका पता मरीज को परेशानी बढऩे के बाद ही चलता है। जिस केस का लाइव शोकेस किया गया उसमें भी मरीज को पैदल चलने के दौरान सीने में दर्द उठता था। उसकी आर्टरी (artery) दो साल से बंद थी। अगर इंटरवेंशन नहीं किया जाता तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। इस केस में भी अब तक ओपेन हार्ट सर्जरी (open heart surgery) करनी पड़ती थी। जिसे अब सीटीओ के माध्यम से किया गया। ये विशेषज्ञता देश में केवल जैपनीज सीटीओ ग्रुप (Indo Japanese CTO Group) के चार विशेषज्ञ सर्जन द्वारा किया जाता है।
डॉ गोयल ने टावी ट्रांस कैथेटर ओटिक वाल्व इम्प्लांट तकनीक (Tawi Trans Catheter Otic Valve Implant technology) से कार्डियक मरीजों का इलाज के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मरीज के ओर्टिक वाल्व (aortic valve) खराब हो जाने पर एकमात्र विकल्प ओपेन हार्ट सर्जरी होता है। ये रिस्की होती है साथ ही इनमें मरीज व डॉक्टरों को कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है लेकिन लखनऊ मेदांता अस्पताल में इस तकनीक का प्रयोग कर नीडल होल के जरिये एक तार में बैलून (balloon) डालकर वाल्व को रिप्लेस कर दिया जाता है। इस प्रोसीजर में लगभग 4 से 5 मिमी मीटर का नीडल होल किया जाता है जिसे सर्जरी के बाद बंद कर दिया जाता है। इस तकनीक से मरीज को ज्यादा समस्या नहीं होती और न ही सर्जरी में डॉक्टर को किसी भी प्रकार की जटिलता का सामना करना पड़ता है। साथ ही मरीज का अस्पताल में रहने का खर्च भी
लखनऊ मेदांता हॉस्पिटल के डॉ पीके गोयल को भी सीटीओ तकनीक में दक्षता हासिल है। सीटीओ तकनीक में एक तार के माध्यम से आर्टरी को खोला जाता है। ये नीडल होल सर्जरी होती है।







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