











































लखनऊ। हर साल 27 जुलाई को वर्ल्ड हेड नेक कैंसर दिवस मनाया जाता है। राजधानी के अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ शिखर साहनी ने इस अवसर पर हेल्थ जागरण से बातचीत करते हुए खास जानकारियां दी।
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (Apollomedics Super Specialty Hospital) में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ शिखर साहनी (Oncologist Dr Shikhar Sahni) ने वर्ल्ड हेड नेक कैंसर दिवस (World Head Neck Cancer Day) पर कहा कि 27 जुलाई को जागरूकता के उद्देश्य से वर्ल्ड हेड नेक कैंसर दिवस मनाया जाता है। यह दुनिया की एक बढ़ती हुई बीमारी है जो भारत में भी बहुधा पायी जाती है। हमारे देश में इसकी जागरूकता इसलिए भी जरुरी है क्योंकि यहाँ ओरल कैविटी के कैंसर (oral cavity cancers) ज्यादा पाएं जाते हैं।
इसलिए ना केवल 27 जुलाई को बल्कि पूरे सप्ताह हेड नेक कैंसर को लेकर जागरूकता (head neck cance awareness) चलाया जाता है। देश में ओरल कैंसर सबसे अधिक है। पुरुषों में यह कैंसर ज्यादा होता है लेकिन महिलाएं भी इससे ग्रसित हैं। ब्रेस्ट तथा सर्वाइकल कैंसर के बाद यह तीसरे नंबर पर होता है। पूरे विश्व के एक तिहाई ओरल कैंसर (oral cancers) केवल देश में पाएं जाते हैं।
डॉ शिखर साहनी ने हेड नेक कैंसर के लक्षण (symptoms of head neck cancer) बताते हुए कहा कि यह निर्भर करता है कि कैंसर कहाँ है। हेड नेक कैंसर में कई तरीके के कैंसर होते हैं जैसे ओरल कैंसर, थाइरायड कैंसर (thyroid cancer), गले के कैंसर (throat cancer), नाक के कैंसर (nose cancer), साइनस कैंसर (sinus cancer), कान का कैंसर (ear cancer), थूक की ग्रंथियों के कैंसर (sputum glands cancer)। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कहाँ से कैंसर जन्म ले रहा है।
मुंह के कैंसर की बात करे तो इसका प्रमुख लक्षण है कि यदि मुंह में कोई भी छाला बने (blister forms in mouth) और वो दो-तीन हफ्ते तक ठीक ना हो तो वो कैंसर हो सकता है। इसको तुरंत चेक करवाना चाहिए। मुंह से खून निकलना (Bleeding from mouth), सूजन होना, गले में सूजन या गांठ होना (lump in the throat), आवाज बदल जाना (change in voice), खाना या थूक निगलने में दिक्कत होना (difficulty swallowing food or sputum), ये सभी हेड नेक कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
हेड नेक कैंसर का उपचार (treatment of head neck cancer,) बताते हुए डॉ शिखर साहनी ने कहा कि ये भी जगह के हिसाब से होता है। मुंह के कैंसर की बात करे तो इसका ट्रीटमेंट सर्जरी ही है। सर्जरी के बाद एडवांस स्टेज होने पर रेडिएशन (radiation) और कभी-कभी इसके साथ कीमो थैरेपी (chemotherapy) की भी आवश्यकता होती है। थाइरायड कैंसर दवा और सर्जरी दोनों से ठीक हो सकता है। थूक की ग्रंथियों के कैंसर के लिए पहली च्वाइस सर्जरी ही होती है। मुंह के पिछले हिस्से में कैंसर (cancer in the back of the mouth) होने पर सर्जरी से बचा जाता है और इसको रेडिएशन या कीमो थैरेपी से ठीक करने की कोशिश की जाती है।
हेड नेक कैंसर से बचने के उपाए (avoid head neck cancer) बताते हुए डॉ शिखर साहनी ने कहा कि लाइफस्टाइल में बदलाव (lifestyle changes) करके कैंसर से बचा जा सकता है। हेड नेक कैंसर के प्रमुख कारण है तम्बाकू या शराब (tobacco or alcohol) का सेवन करना। किसी भी प्रकार का तम्बाकू कैंसर का कारण बन सकता है। नई पीढ़ी में गलत धारणा बन गई है कि ई-सिगरेट (e-cigarettes) कम नुकसान करती है, यह बिलकुल गलत धारणा है। ई-सिगरेट भी उतना ही नुकसान पहुंचाती है (E-cigarettes are as harmfu) जितना आम सिगरेट। तम्बाकू के साथ शराब का सेवन कैंसर का खतरा दोगुना बढ़ा देता है। कुछ कैंसर (थाइरायड कैंसर) परिवार की वजह से भी हो जाते है। जैसे परिवार में किसी को रेडिएशन दिया गया हो।







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