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लखनऊ। देश में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र तेजी से बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में नेशनल हेल्थ मिशन (National Health Mission) के तहत होम बेस्ड न्यूबार्न केयर (Home Based Newborn Care) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अक्सर देखने में आता है कि पशुपालक (animal keeper) और किसान पशुओं के नौनिहालों यानी नवजात पशुओं की ठीक प्रकार देखभाल नहीं कर पाते, इसको लेकर सरकार ने निर्णय लिया है।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत बीमार शिशुओं (sick babies) को अस्पताल में भर्ती कराने में मदद करेंगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak) ने बताया कि यह सुविधा होम बेस्ड न्यूबार्न केयर कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया है। इसे और रफ्तार देने की आवश्यकता है। शिशु मृत्युदर के आंकड़ों में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग (health Department) ने ये फैसला लिया है।
घरेलू और संस्थागत प्रसव के बाद आशा शिशु और प्रसूता की सेहत (maternal health) का हाल लेने के लिए घर का भ्रमण करेंगी। शिशु और प्रसूता की सेहत के देखभाल के लिए होम बेस्ड न्यूबार्न केयर कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रशिक्षित आशा शिशु (Trained Asha Shishu) और मां की सेहत का हाल लेने के लिए घर आएंगी। बता दें कि प्रदेश में हर साल करीब 55 लाख प्रसव हो रहे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों को कार्यक्रम की निगरानी के निर्देश दिये हैं।







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