











































प्रतीकात्मक चित्र डीएम बहराइच
बहराइच (लखनऊ ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश में अधोमानक दवा सप्लाई होने के बाद महंगी दवाओं को लेकर सनसनीखेज नया मामला सामने आया है। इन दवाओं को गोपनीय गोदामों में छुपा कर रखा गया था और जिलाधिकारी की छापेमारी में मामला उजागर हो गया।
बहराइच मेडिकल कॉलेज (Bahraich Medical College) में महंगी दवाओं को गोपनीय गोदामों में छुपा कर (expensive medicines hidden in secret godowns) रखने का बड़ा मामला सामने आया है। जिलाधिकारी की छापेमारी में जब औषधि भंडार में ये दवाएं नहीं मिली तो डीएम के सख्त रुख पर दवाएं दूसरे गोदामों में रखी बताई गईं। यह दवाएं आक्सीजन प्लांट (oxygen plant) समेत अन्य दो जगह पाई गई हैं। इन गोदामों के बारे में उच्चाधिकारियों को भी जानकारी नहीं थी।
बहराइच के जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र (Dr Dinesh Chandra, District Magistrate Bahraich) को मेडिकल कॉलेज में दवाओं की खरीद फरोख्त व कंपनी से महंगी दवाएं महज़ कागजों में आपूर्ति होने की सूचना मिली। उन्होंने एडीएम (ADM) व सीआरओ के नेतृत्व में दो अलग-अलग टीमें गठित की। जब मेडिकल कॉलेज के औषधि भंडार कक्ष (drug store) में छापेमारी की तो इंगित की गई महंगी दवाएं स्टोर में नहीं मिली।
बहराइच जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र ने कहा कि प्रशासनिक टीम ने औषधि भंडार की जांच की थी। किसी भी दवा में नाट फार सेल अंकित नहीं पाया गया। दवाएं मेडिकल कॉलेज भंडार के अलावा दूसरे गोदामों में (Medicines were kept in other godowns) रखी गई थीं। स्टोर प्रभारी पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
मामले के जांच अधिकारी ने बताया कि दवाओं की कार्पोरेशन से डिमांड व मेडिकल कॉलेज दवा आपूर्ति होने पर क्वालिटी की जांच एक ही अधिकारी ने की है जो सन्देह के घेरे में है। जिन दूसरे गोदामों में महंगी दवाएं रखी गई थी उसकी जानकारी सीएमएस (CMS), स्टोर प्रभारी डॉ केके वर्मा, फार्मासिस्ट (pharmacists) दिलीप कुमार व अमित कुमार श्रीवास्तव के साथ प्राचार्य को भी नहीं थी जो नियमतः गलत है।
शुरुआती जांच में ये तथ्य सामने आएं है जो साफ तौर पर बड़े घोटाले (big scam) का इशारा कर रहे है। फ़िलहाल जांच रिपोर्ट के बाद डीएम ने औषधि भंडार प्रभारी पर कार्रवाई को लेकर शासन को पत्र भी भेज दिया है।







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