












































प्रतीकात्मक
बचपन का मोटापा भारत में अब एक महामारी है। 1.44 करोड़ मोटे बच्चों के साथ भारत, चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है । बच्चों में अधिक वजन और मोटापे का प्रसार 15% है। निजी विद्यालय में उच्च आय वाले परिवारों के खानपान को देखते हुए , यह संख्या 35-40% तक बढ़ गई है और यह बढ़ती हुई प्रवृत्ति चिंताजनक है ।
बचपन में मोटापा होने के कारण: Causes of childhood obesity
बचपन में मोटापा का मूल कारण कैलोरी खपत और खर्च की गई ऊर्जा के बीच असंतुलन है। भारतीय आनुवंशिक रूप से मोटापा के शिकार होते हैं। हालांकि बचपन में मोटापा में तेजी से वृद्धि काफी हद तक पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होती है। आर्थिक समृद्धि पारंपरिक आहार से ‘आधुनिक’ आहार की ओर ले जाती है, जो वसा और चीनी से भरपूर होते हैं। शहरीकरण से गतिहीन जीवन शैली में वृद्धि और शारीरिक गतिविधि में गिरावट आ रही है।
बचपन में मोटापा का स्वास्थ्य पर प्रभाव: Effects on health of childhood obesity
बचपन में मोटापा से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती है। मोटे बच्चों में उच्च रक्तचाप, ऑस्टियोआर्थराइटिस, कोलेस्ट्रॉल औरट्राइग्लिसराइड्स, प्रकार -2 मधुमेह, हृदय-धमनी रोग, आघात, पित्ताशय का रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं, भावनात्मक गड़बड़ी और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। तीन में से मोटापे से ग्रस्त दो बच्चें वयस्क होने के बाद भी मोटे ही रहेंगे और हमेशा वयस्क जीवन शैली की बीमारियों का खतरा बना रहेगा। भारत दुनिया में मधुमेह का प्रमुख केंद्र बनने के दिशा में आगे बढ़ता जा रहा है।
बचपन में मोटापे की रोकथाम: Prevention of childhood obesity
विश्वस्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार बचपन में मोटापा 21वीं सदी की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। बचपन में मोटापा की रोकथाम महत्वपूर्ण है, खासकर जब से हम जानते हैं कि मोटापा का इलाज बेहद मुश्किल है। मोटापा को रोकने के लिए सिद्ध और सरल रणनीतियों में शामिल हैं:
बच्चों के लिए उनके माता-पिता प्रेरणा स्रोत होते हैं: Parents are source of inspiration
माता-पिता क्या खाते हैं, उसे बच्चे देखते हैं ! स्वस्थ भोजन में अधिक फल, सब्जियां, फलियां और साबुत अनाज और बादाम आदि का सेवन करना शामिल है। वसा की संख्या को सीमित करने और संतृप्त वसा से असंतृप्त वसा की सेवन में करने की सलाह दी जाती है। दो साल की उम्र के बाद मक्खन निकाला हुआ दूध (स्किम्ड) दूध का उपयोग किया जाना चाहिये। ताजा खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये । फास्ट फूड चीनी, वसा और नमक से भरपूर होते हैं और इन्हें खास अवसरों या सप्ताहांत तक ही सीमित रखना चाहिए। नाश्ता और दिन भर खाना अतिरिक्त कैलोरी का एक प्रमुख कारण है। बढ़ते बच्चों के लिए स्वस्थ नाश्ते के विकल्प पहुंच के भीतर होने चाहिए।
स्वस्थ भोजन का आचरण बच्चों द्वारा सीखा जाता है। बलपूर्वक और विवश करके किया गया भोजन अक्सर खराब आत्म-नियंत्रण और बाद में अत्यधिक वज़न की ओर ले जाता है। माता-पिता को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि बच्चे भूख लगने पर खाएं, न कि जब वे ऊब या थक गए हों। भोजन को ‘इनाम’ के रूप में हतोत्साहित किया जाना चाहिये।
मोटापा से निपटने के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और शिक्षा महत्वपूर्ण है। नारायण हेल्थ द्वारा प्रबंधित एसआरसीसी (SRCC) – बच्चों का अस्पताल ने अब स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने और बचपन के मोटापे की रोकथाम और उपचार के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है – एनएचआईसीऐएन (NHICAN): बच्चों की गतिविधि और पोषण में सुधार लाना। इसका लक्ष्य एक्स को पीढ़ी एक्सएक्सएल बनने से रोकना है!
लेखक - डॉ महेश बालसेकर, बाल चिकित्सा औषधि, एसआरसीसी बच्चों का अस्पताल, मुंबई







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