











































सेंट लुइस। स्वस्थ जन्म के बावजूद दुर्लभ बीमारी की वजह से जान गंवाने वाले दो साल के बच्चे की मौत का रहस्य वैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चे को एक जीन से जुड़ी मध्य फेफड़ों की बीमारी (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) हुई थी। लेकिन किस जीन से बीमारी हुई, यह अज्ञात था। बच्चा तो नहीं बचा, लेकिन इस सुलझाए गए रहस्य से बीमारी की चपेट में आने वाले दूसरे बच्चों व लोगों के इलाज में मदद मिलेगी।
प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइसेंस में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि जीन में गड़बड़ियों की वजह से बच्चों या नवजात के फेफड़ों की स्थिति लगातार खराब होती जाती है। उनके फेफड़ों में क्षति के निशान बनते हैं, जिनसे सांस लेना धीरे धीरे मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में कोई जेनेटिक गड़बड़ी न होने पर भी यह रोग मिलता है। मौजूदा मामला ऐसा ही था। अध्ययन में बेलर चिकित्सा महाविद्यालय के बायोइफॉर्मेटिक्स विशेषज्ञों की टीम ने बच्चे के डीएनए कोड में आए बदलावों की पहचान की। अधिकतर बदलाव सामान्य और गैर-हानिकारक थे। लेकिन कुछ संभावित संदिग्ध लगे। इनकी सूची बनाई गई।
बच्चे के फेफड़े के नमूने की जांच में सर्फेक्टेंट से जुड़ी समस्या मिली। सर्फेक्टेंट प्रोटोन और लिपिड (पानी या तेल में अघुलनशील तत्व) का मिश्रण होता है। यह फेफड़े में वायु के लिए छोटे पॉकेट्स की सतह पर तनाव कम कर इन्हें खुला रखता है। इन्हीं पॉकेट्स से हमारा शरीर ऑक्सीजन लेकर का कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है।
जीन आरएबी5बी में गड़बड़ी से हुई बीमारी
बच्चे के सफेंक्टेंट के जीन प्रोटीन में कोई बदलाव नहीं मिला, लेकिन एक जीन प्रोटीन आरएबी5बी का पता चला। यह जीन सर्फेक्टेंट बनाने वाली कोशिकाओं की प्रणाली का हिस्सा था। यह जीन सर्फेक्टेंट्स की गतिविधि को संचालित करता है। इसमें म्यूटेशन से प्रोटीन टूट रहे थे और सर्फेक्टेंट की कार्यप्रणाली ही जहरीली बन रही थी। फेफड़ों में सर्फेक्टेंट्स की कमी भी पड़ रही थी, जससे उनमें क्षति के निशान बन रहे थे।
फायदा: प्रत्यारोपण के लिए भी पहले से तैयार रह सकेंगे
अध्ययनकर्ता वैज्ञानिकों स्टीवन एल ब्रॉडी, डोरोथी आर व हुबर्ट सी मूग का मानना है कि इस खोज का फायदा लोगों में रोग की पहचान, इलाज और अन्य जीन संबंधी समस्याओं को जानने में मिलेगा। कई मामलों में मरीज को बीमारी क्यों हुई, पता नहीं चल पाता। रहस्य उजागर होने से बीमारी की आशंका भांपी जा सकेगी।
माता-पिता में नहीं था यह म्यूटेशन
अध्ययनकर्ता हुयान हुआंग के अनुसार, बच्चे के माता पिता के जीन में यह म्यूटेशन नहीं था बल्कि उसमें यह केवल घटनात्मक रूप से भ्रूण के विकास के दौरान डीएनए में यह आया और बीमारी की वजह बना। पड़ रही थी, जिससे उनमें । अध्ययन को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ क्षति के अज्ञात रोग जांच कार्यक्रम के तहत करवाया गया।प







हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 413
हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 364
हुज़ैफ़ा अबरार July 09 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4753
एस. के. राणा January 20 2026 0 4648
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4592
एस. के. राणा January 13 2026 0 4403
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4333
एस. के. राणा February 01 2026 0 3962
एस. के. राणा February 04 2026 0 3766
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86826
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34721
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37936
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35413
लेख विभाग March 19 2022 0 35007
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72476
सेहत का खास ख्याल रखने के साथ ही बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गया है।
जिला चिकित्सालय की ओपीडी से लेकर यहां भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ी है। जिला
अपर नगर आयुक्तो की अध्यक्षता में गठित उक्त टीम द्वारा नगर निगम लखनऊ द्वारा की जा रही फागिंग, एंटी ला
प्राण भौतिक संसार, चेतना और मन के मध्य सम्पर्क सूत्र है। यही तो भौतिक स्तर पर जीवन को संभव बनाता है।
बालाघाट के शहीद भगत सिंह जिला अस्पताल में एक महिला ने 3 बच्चों को जन्म दिया है। महिला लांजी की रहने
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि कोरोना संक्रमण कम होने का मतलब यह नहीं है कि हम सावधानी बरतना छोड़ द
आरडीआईएफ ने एक बयान में कहा, ‘‘एसआईआई के संयंत्रों में स्पुतनिक वैक्सीन के पहले बैच के सितंबर में तै
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कफ सिरप के 108 निर्माताओं में से 84 के खिलाफ जांच शुरू की थी। इनमें से
शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर प्रमुख सरकारी अस्पतालों में 12 बजे तक ओपीडी चली लेकिन इम
अल्ट्रासाउंड संचालक पर गाज गिरी है। जिसके बाद संचालक के पिता की बौखलाहट सामने आयी है। बता दे कि पूरा

COMMENTS