देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

हार्ट अटैक के शुरूआती घंटो में समय से इलाज करने पर बहुत सारी जानें बच सकती हैं।

गोल्डन ऑवर अक्सर एक ऐसा समय होता है जो यह तय करता है कि मरीज बच पाएगा या नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दिल की मांसपेशियां खून की सप्लाई बंद होने के 80 से 90 मिनट के अंदर ही मरने लगती हैं।

0 35882
हार्ट अटैक के शुरूआती घंटो में समय से इलाज करने पर बहुत सारी जानें बच सकती हैं। प्रतीकात्मक

- डॉ अभिनीत गुप्ता, 
कंसलटेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी,  
रीजेंसी  सुपरस्पेशलिटी  हॉस्पिटल, कानपुर 

हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी होती है और अक्सर हार्ट अटैक के मरीज को जिंदगी का दूसरा मौका नहीं मिलता है। इस स्थिति को मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन भी कहा जाता है, हार्ट अटैक तब होता है जब हार्ट की मांसपेशियों के एक हिस्से को पर्याप्त खून नहीं मिलता है। ब्लड फ्लो  को बनाये रखने के लिए उपचार के बिना जितना अधिक समय बीतता है, हार्ट की मांसपेशियों को उतना ही ज्यादा नुकसान होता है। हार्ट अटैक पड़ने के बाद के पहले घंटे को   गोल्डन ऑवर कहा जाता है और इन 60 मिनट में उचित कार्रवाई इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है। पहला घंटा महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अवधि के दौरान अधिकांश मौतें और कार्डियक अरेस्ट होते हैं।

गोल्डन ऑवर अक्सर एक ऐसा समय होता है जो यह तय करता है कि मरीज बच पाएगा या नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दिल की मांसपेशियां खून की सप्लाई बंद होने के 80 से  90 मिनट के अंदर ही मरने लगती हैं। छह घंटे के भीतर दिल के लगभग सभी प्रभावित हिस्से अपरिवर्तनीय रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। हमारे हॉस्पिटल ने युवा हार्ट मरीजों या हार्ट अटैक के मेडिकल एमरजेंसी केसेस में भी वृद्धि देखी है जहां व्यक्ति अपने उम्र के 20 या 30वे दशक में होते है। चिंता की बात यह है कि बिना ख़तरे वाले युवाओं को भी हार्ट का दौरा पड़ रहा है। सीपीआर और डिफाइब्रिलेटर किसी भी हार्ट अटैक से पीड़ित व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकते है,लेकिन ये सुविधाएँ हार्ट अटैक आने के बाद जल्दी से उपलब्ध होना चाहिए और सभी को उनका उपयोग करने के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। 

अगर डिफाइब्रिलेटर गोल्डन ऑवर में मिल जाए तो पीड़ित की जान लगभग 90% है कि बच सकती है।  हालांकि हार्ट अटैक से निपटने के लिए क्लॉट बस्टर थेरेपी जैसे वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हैं लेकिन प्राथमिक एंजियोप्लास्टी की तुलना में इसकी प्रभावकारिता और सुरक्षा कम है। दुनिया भर में, प्राथमिक एंजियोप्लास्टी हार्ट अटैक के उपचार का स्वर्ण मानक बना हुआ है। हार्ट अटैक से निपटने के लिए एंजियोप्लास्टी जैसे विशेष उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन हार्ट अटैक का शुरुआती एक घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है और मरीज को बिना एक सेकंड बर्बाद किए हॉस्पिटल ले जाना चाहिए। इसके अलावा अगर हार्ट अटैक से प्रभावित व्यक्ति सांस नहीं ले रहा होए तो ब्लड फ्लो ;रक्त प्रवाहद्ध को बनाए रखने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन , सीपीआर दिया जाना चाहिए। हालांकि सबसे पहला कदम होना चाहिए निकटतम अस्पताल से आपातकालीन नंबर पर कॉल करें। 

सीपीआर के अलावा स्थानीय स्तर पर या प्रत्येक स्थानीय अस्पताल में पूर्ण पुनर्जीवन उपकरण उपलब्ध होना चाहिए। ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर भी अचानक होने वाली हार्ट की समस्या से होने वाली मौतों को रोकने में काफी मदद कर सकते हैं। एईडी एक ऐसा उपकरण है जो हार्ट को उसकी सामान्य लय में वापस लाने में मदद करने के लिए बिजली के झटके का उपयोग करता है। डिफाइब्रिलेटर हर दिल की धड़कन की निगरानी करते हैं और अगर इससे यह पता चलता है कि कोई मरीज कार्डियक अरेस्ट में चला गया है तो वह तुरंत एक लाइफ सेविंग शॉक जीवन रक्षक झटका देगा।

इमरजेंसी मदद की इन्तजार करते समय हार्ट अटैक से पीड़ित व्यक्ति एस्पिरिन खा सकता है क्योंकि इससे हार्ट डैमेज कम हो सकता है। हालांकि अगर आपको इससे एलर्जी है या आपके डॉक्टर ने इसे न लेने के लिए कहा है तो फिर एस्पिरिन का सेवन न करें। हार्ट अटैक एक गंभीर मामला है और देश में यह एक उभरती हुई स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन हार्ट अटैक की समस्या अचानक नहीं होती हैं। हमारे शरीर को यह एहसास होता है कि कुछ गलत हो रहा है, इसलिए किसी को उभरती हुई हार्ट की बीमारी  के लक्षणों पर सचेत होकर ध्यान देना चाहिए। हार्ट अटैक की यह स्थिति पहले ज्यादातर बुजुर्ग लोगों में देखी जाती थी, हालांकि बढ़ते तनाव और अस्वास्थ्यकर लाइफस्टाइल के कारण अब युवा लोगों में भी हार्ट की समस्या हो रही है।

भारतीय लोग यूरोपीय देशों के लोगों के मुकाबलें औसतन कम से कम 20 साल पहले कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित होते हैं। हाल ही के एक अध्ययन ने कम उम्र में हार्ट अटैक के लिए डाइट में बहुत ज्यादा तेल के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1970 के बाद पैदा हुए युवा भारतीय इस्केमिक हार्ट बीमारी के कारण मर रहे हैं। इस भार को हाई ब्लड प्रेशर की राष्ट्रीय घटनाओं के लिए भी जिम्मेदार ठहराया गया है। अध्ययन के अनुसार यह राष्ट्रीय औसत 25.3%  है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

पटना में स्कूली छात्रा द्वारा मुफ्त सैनिटरी पैड की माँग पर गुस्साई आईएएस ने पाकिस्तान जाने की सलाह दी

पटना में स्कूली छात्रा द्वारा मुफ्त सैनिटरी पैड की माँग पर गुस्साई आईएएस ने पाकिस्तान जाने की सलाह दी

विशेष संवाददाता October 02 2022 44828

बिहार सरकार ने 2015 में लड़कियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा ड्रॉप आउट को कम कर

औरैया में वायरल फीवर के बढ़े मरीज

औरैया में वायरल फीवर के बढ़े मरीज

विशेष संवाददाता February 14 2023 34326

डॉक्टर मरीजों को एहतियात बरतने की सलाह दे रहे है। इसके बावजूद मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब हर रोज

गर्भावस्था में कब्ज से इस तरह पाएं छुटकारा

गर्भावस्था में कब्ज से इस तरह पाएं छुटकारा

श्वेता सिंह September 24 2022 31603

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में वृद्धि से शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिसमें हमारी आंतें भी शामि

भारत में कोविड संक्रमण और मौत के सर्वाधिक नये मामले: डब्ल्यूएचओ

भारत में कोविड संक्रमण और मौत के सर्वाधिक नये मामले: डब्ल्यूएचओ

एस. के. राणा May 20 2021 29535

डब्ल्यूएचओ द्वारा राष्ट्रीय अधिकारियों से नौ मई तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सर्वाधिक नये

बुलंदशहर में निशुल्क चिकित्सा शिविर का किया गया आयोजन

बुलंदशहर में निशुल्क चिकित्सा शिविर का किया गया आयोजन

विशेष संवाददाता March 27 2023 25484

वैद्य हितेश कौशिक ने बताया कि लोगों का सबसे अधिक धन इस समय स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर खर्च हो रहा है इ

सीएम योगी की सख्‍ती के बाद ड्रग माफियाओं के खिलाफ अभियान जारी, छह दिन में 4060 गिरफ्तार

सीएम योगी की सख्‍ती के बाद ड्रग माफियाओं के खिलाफ अभियान जारी, छह दिन में 4060 गिरफ्तार

श्वेता सिंह August 30 2022 23585

मादक पदार्थों के माफिया और अवैध शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ 24 अगस्त से प्रदेशव्यापी अभियान

तेजी से पैर पसार रही आंखों की समस्या, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

तेजी से पैर पसार रही आंखों की समस्या, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

विशेष संवाददाता July 30 2023 35382

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रीना सिंह ने बताया कि आंख में परेशानी को लेकर आने वाल

खोई हुई मांसपेशियों को वापस पाने के लिए प्रोटीन का सेवन बढ़ाएँ।

खोई हुई मांसपेशियों को वापस पाने के लिए प्रोटीन का सेवन बढ़ाएँ।

हुज़ैफ़ा अबरार August 19 2021 33608

आप अगर रोजाना मुट्ठी भर बादाम खाते हैं तो आप बीमारी से बचे रह सकते हैं। खोई हुई मांसपेशियों को वापस

अगस्त तक कोरोना के तीसरी लहर की संभावना: एसबीआई

अगस्त तक कोरोना के तीसरी लहर की संभावना: एसबीआई

एस. के. राणा July 06 2021 27381

एसबीआई की "कोविड -19: रेस टू फिनिशिंग लाइन" रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है, "मौजूदा आंकड़ों के अनुसार

गर्भ निरोधक दवा बेचने पर मेडिकल स्टोर संचालक गिरफ्तार

गर्भ निरोधक दवा बेचने पर मेडिकल स्टोर संचालक गिरफ्तार

हे.जा.स. May 02 2023 27743

डॉ़ मान सिंह ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि विष्णु कॉलोनी स्थित वंशिका मेडिकल स्टोर पर अवैध रूप से ग

Login Panel