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उत्तर प्रदेश

कुपोषण के कारण उप्र में शिशु मृत्यु दर बहुत अधिक, स्तनपान और मदर्स मिल्क बैंक ही समाधान

डा. आरएन सिंह मानते हैं कि संपूर्ण स्तनपान का प्रतिशत 80% से ऊपर ले जाना होगा। जगह-जगह मदर्स मिल्क बैंक स्थापित करने होंगे। प्रदेश में जिले को बेबी फ्रेंडली जिला बनाना होगा।

आनंद सिंह
March 13 2022 Updated: March 13 2022 15:22
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कुपोषण के कारण उप्र में शिशु मृत्यु दर बहुत अधिक, स्तनपान और मदर्स मिल्क बैंक ही समाधान प्रतीकात्मक

गोरखपुर। दो साल पहले एक रिपोर्ट आई थी। उस रिपोर्ट में देश में शिशु मृत्यु दर का जिक्र था। देश भर में जिन राज्यों में शिशु मृत्यु दर सबसे ज्य़ादा था, उन्हें रेड जोन में रखा गया था। उन्हीं रेड जोन्स में एक अपना उत्तर प्रदेश भी था। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1000 बच्चों में से 36 कुपोषण (malnourishment) के कारण काल के गाल में समा जाते थे।

इसके उलट, केरल जैसे राज्य में 1000 में से मात्र 6 बच्चे कुपोषण से मरते थे। यह डाटा है और केंद्र की तरफ से जारी किया गया था। बेशक, 2015-2016 तक उत्तर प्रदेश की हालत बेहद खराब थी। तब यह आंकड़ा 45.1 फीसद था। लेकिन, 2017 में जब योगी सरकार आई तब से यह ग्राफ लगातार तेजी से गिरा है।

2020-21 की बात करें तो यह आंकड़ा 35.7 फीसद पर आ गया था। जाहिर है, योगी सरकार के कार्यकाल में शिशु मृत्यु दर (child death rate) में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके बावजूद, जिस तादाद में शिशु मृत्यु दर है, वह बेहद चिंता का विषय़ है। 

इन्सेफेलाइटिस उन्मूलन अभियान के चीफ कैंपेनर और पूर्वांचल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. आर.एन. सिंह कहते हैं, जब केरल में शिशु मृत्युदर मात्र छह है तो उत्तर प्रदेश में यह 36 कैसे हो सकता है, इस पर सोचना होगा। केरल एक शिक्षित प्रदेश है पर आर्थिक रूप से उतना मजबूत नहीं। फिर भी हमें प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों मे शिशु मृत्यु दर को हर हाल में कम‌ करना होगा। इसके लिए समाज व सरकार दोनों को‌ आगे आना होगा। 

डा. आरएन सिंह मानते हैं कि संपूर्ण स्तनपान (breastfeeding) का प्रतिशत 80% से ऊपर ले जाना होगा। जगह-जगह मदर्स मिल्क बैंक स्थापित करने होंगे। प्रदेश में जिले को बेबी फ्रेंडली (शिशु मित्र) जिला बनाना होगा। कुपोषण को जड़ से उखाड़ने के लिये स्तनपान संवर्धन, बेबी फ्रेंडली डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट व मदर्स मिल्क बैंक जैसे कार्यक्रम चलाने से ही कुपोषण व शिशु मृत्यु दर में सकारात्मक कमी आ सकती है। संपूर्ण स्तनपान का मतलब है जन्म के आधे घंटे से ही मां का दूध देना शुरू करना होगा और अगले छह माह तक बच्चे को केवल मां का दूध और घर में बने अनुपूरक आहार ही देने चाहिए।

क्या है मदर्स मिल्क बैंक

डा. सिंह के अनुसार, मदर्स मिल्क (mother's milk bank) बैंक में माताएं अपना अतिरिक्त दूध दान करती है। इसे एक निश्चित तापमान पर स्टोर किया जाता है। जरूरतमंद नवजातों (neonates) को छोटे पैक्स अथवा बोतलों में इसे वितरित किया जाता है। इससे नवजात शिशुओं की सेहत बेहतर होती है और वह एक बढ़िया जिंदगी जीने के लिए जिंदा रह सकता है।

डा. सिंह ने बताया कि राजस्थान व महाराष्ट्र में मदर्स मिल्कबैंक बहुतायत में हैं। उनका कहना था कि चूंकि गोरखपुर सीएम सिटी भी है, लिहाजा इस किस्म के मदर्स मिल्क बैंक यहां तो सबसे ज्यादा संख्या में होनी चाहिए। इसके लिए सरकार चाहे तो पीपी माडल पर भी काम कर सकती है। उन्होंने बताया कि मां के दूध से निमोनिया, सेप्टीसीमिया, डायरिया जैसी प्राणलेवा बीमारियों से बचाव होगा।

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