











































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली। स्वदेशी कोरोना रोधी टीका कोवैक्सीन को इमरजेंसी यूज के लिए आगामी अक्टूबर महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से मंजूरी मिलने की संभावना है। भारतीय दवा निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने जानकारी दी है कि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर कोरोना टीका कोवैक्सीन के इमरजेंसी यूज की मंजूरी लेने की कोशिश कर रही है। उधर, खबर यह भी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन अगले अक्टूबर महीने में स्वदेशी टीका कोवैक्सीन की मंजूरी दे सकता है।
मीडिया की खबरों के अनुसार, कोरोना वैक्सीन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैज्ञानिकों का विशेषज्ञ समूह स्ट्रेटेजिक एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट (सेज) आगामी 5 अक्टूबर को कोवैक्सीन की मंजूरी देने को लेकर बैठक करेगा. करीब डेढ़ घंटे तक होने वाली इस बैठक के बाद ही विशेषज्ञों का यह समूह टीके की इमरजेंसी यूज पर अपनी मुहर लगा सकता है।
मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वदेशी टीका कोवैक्सीन की मंजूरी देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ समूह सेज की बैठक 5 अक्टूबर को भारतीय समयानुसार 4 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी। बैठक में सेज के वैज्ञानिकों के अलावा दवा निर्माता कंपनी भारत बायोटेक के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
बताया जा रहा है कि बैठक में कोवैक्सीन के भारत में हुए ट्रायल के डेटा के आधार पर उसके सुरक्षित और प्रभावी होने पर चर्चा होगी। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन कोवैक्सीन को मंजूरी देने पर कोई अंतिम फैसला करेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अभी फाइजर-बायोनटेक, एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना और सिनोफार्म के टीके की मंजूरी दे चुका है।







हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3822
एस. के. राणा January 13 2026 0 3780
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3689
एस. के. राणा January 20 2026 0 3633
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3360
एस. के. राणा February 01 2026 0 3038
एस. के. राणा February 04 2026 0 2898
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86301
सौंदर्या राय April 08 2022 0 33902
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37138
सौंदर्या राय April 05 2022 0 34909
लेख विभाग March 19 2022 0 34321
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71587
स्टेशन पर तैनात अधिकारियों और ट्रेनों में चेकिंग स्टाफ को इस बात की हिदायत दी गई है कि वे यह सुनिश्च
सर्दी के मौसम में नवजात शिशुओं को विशेष देखरेख की आवश्यकता होती है। थोड़ी सी लापरवाही आपसे आपकी खुशि
रिसर्च सोसाइटी फॉर स्टडी आफ डायबिटीज़ इन इंडिया उत्तर प्रदेश शाखा ने प्रदेश के 100 स्थानों पर एक साथ
आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब दिल, मानसिक और न्यूरो के इलाज में नए पैकेज शुरू किए गए हैं। साथ ही 365
गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भी मवेशियों में लंपी वायरस की पुष्टि होने के बाद बस्तर में जिला
उक्त एटोरवास्टेटिन की 2,980 बोतलों का उत्पादन डॉ रेड्डीज बचुपल्ली (तेलंगाना) संयंत्र में किया गया था
डॉ सुधीर कुमार सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू ने आरोप के सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि ऐसा संभव नहीं है कि
सामान्य सर्दी और कोविड-19 के बीच अंतर करना बहुत मुश्किल है। लेकिन यह असम्भव भी नहीं है। डॉक्टर्स के
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, सढ़ौली कदीम क्षेत्र की रहने वाली 23 वर्षीय महिला की तबीयत अचानक खरा
गठिया के कारण होने वाले इन स्वप्रतिरक्षा क्षति को मोटे तौर पर रुमेटोलॉजिकल रोग कहा जाता है और इनकी प

COMMENTS