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जेनेवा/लखनऊ। स्तनपान सप्ताह के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ़ ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए सभी देशों की सरकारों से स्तनपान को बढ़ावा देने और उसके समर्थन व संरक्षण के लिये नीतियों व कार्यक्रमों को बढ़ाने की बात कही है।
विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनीसेफ़ (UNICEF) ने एक संयुक्त वक्तव्य देते हुए पूरी दुनिया से अपील की है कि स्तनपान को बढ़ावा (promote breastfeeding) देने के लिए हर प्रयास किए जाएं। यूएन एजेंसियों ने दुनिया के सभी देशों की सरकारों से स्तनपान को बढ़ावा देने और उसके समर्थन व संरक्षण के लिये नीतियों व कार्यक्रमों को बढ़ाने की बात कही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस (Dr Tedros Adhanom Ghebreyesus) और यूनीसेफ़ (UNICEF) की कार्यकारी निदेशिका कैथरीन रसैल (Katherine Russell) ने कहा कि नवजात शिशुओं के जीवन की शुरुआत माँ के दूध से ही होनी चाहिए और लाखों नवजात शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के लिए यह बहुत जरुरी है।

इस वर्ष स्तनपान सप्ताह की थीम है - Step up for breastfeeding: Educate and Support
तमाम देशों की सरकारों से स्तनपान को बढ़ावा देने की बात कहते हुए यूएन एजेंसियों ने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को बनाते समय नाज़ुक हालात वाले परिवारों का भी ध्यान रखें। माँ के दूध से शिशुओं और बच्चों के लिये बीमारियों (Breast milk develops a strong immunity against diseases) और बाल कुपोषण (child malnutrition) के ख़िलाफ़ एक मज़बूत रोग प्रतिरोधी क्षमता विकसित होती है। माँ का दूध, शिशुओं में बचपन की आम बीमारियों से उनकी रक्षा करने वाली प्रथम वैक्सीन (first vaccine) के रूप में भी काम करता है।
दोनों यूएन एजेंसियों के प्रमुखों ने कहा कि आपदा परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्तनपान कराने वाली महिलाओं (lactating women) को भावनात्मक दबाव, शारीरिक थकावट, निजता व निजी स्थान का अभाव, और ख़राब स्वच्छता के हालात का सामना करना पड़ता है जो नहीं होना चाहिए। बहुत से शिशुओं को जीवित रहने में मदद के लिये अपनी माँ के दूध के लाभ नहीं मिल पा रहे हैं, यह स्थिति बदलनी चाहिए।
दुनिया में घटते स्तनपान (declining breastfeeding in the world) पर चिंता जताते हुए कहा कि, दुनिया भर में नवजात शिशुओं की आधी से भी कम संख्या को उनके जीवन के पहले घण्टे में माँ का दूध मिल पाता है, जिससे वो बीमारी और मौत की चपेट में आने के जोखिम में पहुँच जाते हैं। केवल 44 प्रतिशत शिशुओं को उनके जीवन के पहले छह महीनों के दौरान माँ का दूध मिल पाता है। विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली (World Health Assembly) का लक्ष्य वर्ष 2025 तक ये संख्या बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का है।







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