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लखनऊ। फेफड़ों को पूरी तरह स्वस्थ रखने के बारे में जागरूकता के लिए हर साल 25 सितम्बर को विश्व फेफड़ा दिवस मनाया जाता है। इस बार थीम है- लंग हेल्थ फॉर आल। इस अवसर पर डॉ सूर्यकान्त ने विशेष जानकारी देते हुए लोगों को सचेत किया है।
विश्व फेफड़ा दिवस (World Lung Day) पर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के रेस्परेटरी मेडिसिन (Respiratory Medicine) विभाग के अध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त (Dr Suryakant) ने कहा कि शरीर के हर अंग की वैसे तो हमारे जीवन में खास अहमियत है किन्तु फेफड़े (lungs) इसमें अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि प्राण वायु का संचार उन्हीं से होता है। फेफड़ों के कमजोर पड़ते ही टीबी (TB) समेत कई गंभीर बीमारियाँ जैसे- निमोनिया (pneumonia), अस्थमा (asthma), कोरोना (corona), सीओपीडी (COPD) आदि घेर लेती हैं।

इस बार इस दिवस की थीम है- लंग हेल्थ फॉर आल (Lung Health for All)। आज इसका संकल्प लेना हम सभी के लिए बहुत ही जरूरी है। लोगों में धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति और बढ़ते वायु प्रदूषण (air pollution) ने फेफड़ों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा यदि फेफड़ों पर हुआ वार तो खुल जाएगा बीमारियों का द्वार।
आईएमए (IMA)-एकेडमिक ऑफ़ मेडिकल स्पेसलिटीज के नेशनल वायस चेयरमैन डॉ सूर्यकान्त का कहना है कि आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब 17 लाख लोगों की मृत्यु हर साल बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण होती है। इसके अलावा करीब 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं जो अपने फेफड़ों को जोखिम में डालने के साथ ही दूसरों के फेफड़ों को भी जोखिम में डालते हैं।
डॉ सूर्यकान्त ने कहा कि धूम्रपान करने वाले केवल 30 फीसद धुआं अन्दर लेते हैं और 70 फीसद धुआं बाहर छोड़ते हैं जो दूसरों के अन्दर पहुंचकर नुकसान पहुंचाता है। इसलिए फेफड़ों की सलामती के लिए जरूरी है कि लोग धूम्रपान (smoking) से बचें और बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती से लगाम लगाएं। मास्क का इस्तेमाल कर बहुत कुछ इसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।
अगर फेफड़े ही कमजोर पड़ गए तो जिन्दा कैसे रह पाएंगे क्योंकि फेफड़े ही शरीर में प्राण वायु का संचार करते हैं। मास्क का उपयोग, धूम्रपान से दूरी और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण फेफड़ों के लिए जरूरी है। रेस्परेटरी मसल्स (respiratory muscles) और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए अच्छे खानपान (green vegetables) और प्राणायाम (pranayama) से फेफड़ों का स्टेमिना बढ़ाना, व्यायाम, भाप लेना आदि उपाय करने चाहिए।







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