











































प्रतीकात्मक चित्र
हमारे वेद और शास्त्र हमारे अच्छे के लिए ही हमें कुछ नियम प्रदान करते हैं। यह नियम और निर्देश हमें एक सुखमय जीवन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं। वैदिक मान्यताओं (Vedic beliefs) में भोजन करते समय भोजन की सात्विकता का ख्याल रखना जरूरी है। इसके अलावा अच्छी भावना और अच्छे वातावरण और आसन का भी बहुत महत्व माना गया है। यदि भोजन के सभी नियमों का पालन किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता। यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर (doctor) के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
भारतीय शास्त्रों के अनुसार भोजन के नियम - The rules of food according to Indian scriptures
भोजन का हमारे तन, मन, मस्तिष्क पर प्रभाव - Effect of food on our body, mind and body
भोजन का प्रभाव हमारे तन, मन एवं मस्तिष्क पर पड़ता है। अनीति (पाप) से कमाए पैसे के भोजन से मन दूषित होता है (जैसा खाओ अन्न वैसा बने मन) वहीं तले हुए (fried), मसालेदार (spicy), बासी (stale), रूखे एवं गरिष्ठ भोजन से मस्तिष्क में काम, क्रोध, तनाव जैसी वृत्तियां जन्म लेती हैं। भूख से अधिक या कम मात्रा में भोजन करने से तन रोगग्रस्त बनता है। भोजन से ऊर्जा (energy) के साथ-साथ सप्त धातुएं (blood, flesh, marrow, bone etc.) पुष्ट होती हैं। केवल खाना खाने से ऊर्जा नहीं मिलती, खाना खाकर उसे पचाने से ही ऊर्जा प्राप्त होती है। एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है, 'सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो।' दिन का भोजन शारीरिक श्रम के अनुसार एवं रात का भोजन हल्का व सुपाच्य होना चाहिए। रात्रि का भोजन सोने से दो या तीन घंटे पूर्व करना चाहिए। तीव्र भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। नियत समय पर भोजन करने से पाचन अच्छा होता है। अतः भोजन का समय निश्चित करें।
भोजन के सामान्य नियम - General rules of food
भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए। भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार जब व्यक्ति क्रोध में हो, किसी से ईर्ष्या की भावना रखता हो, तो उसे भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे में वह भोजन उसे पचता नहीं है। भोजन करते समय हमेशा मौन रहें। यदि किन्हीं कारणों से बोलना जरूरी हो तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें। खाना खाने से पहले ईश्वर का ध्यान करना और उहें धन्यवाद कहना न भूलें। भारतीय शास्त्रों के अनुसार भोजन शुद्ध होना चाहिए, उससे भी शुद्ध जल होना चाहिए और सबसे शुद्ध वायु होना चाहिए। यदि ये तीनों शुद्ध है तो हम कम से कम सौ वर्ष तक जिंदा रह सकते हैं।
लेखक - डॉ आरबीएस कुशवाहा, आईएफएस







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