












































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत सरकार ने देश के कई राज्यों में मेडिकल डिवाइस पार्क बनाने को मंजूरी दी है। जिन राज्यों में ये पार्क बनेंगे उनमें उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क बनाने के लिए सरकार की तरफ से राज्यों को 400 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।मेडिकल डिवाइस पार्क बनाने का काम केमिकल और उर्वरक मंत्रालय के जरिये किया जाएगा। इन पार्कों के बनने से देश में वैसे मेडिकल उपकरण बनेंगे जो विदेश से मंगाने पड़ते हैं और जो बेहद महंगे होते हैं। मेडिकल पार्क में इन उपकरणों का निर्माण हो सकेगा जिससे महंगे उपकरण भी सस्ते हो जाएंगे। फिलहाल देश में 70 परसेंट से अधिक मेडिकल उपकरण आयात होते हैं जिन पर सरकार का भारी-भरकम पैसा खर्च होता है।
किन राज्यों में मेडिकल डिवाइस पार्क बनेगा, इसके लिए सरकार ने खास तरह से नामों का चयन किया। 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इसके लिए अप्लाई किया था। इन राज्यों की मांग थी कि उनके यहां मेडिकल डिवाइस पार्क बनाने की मंजूरी मिले। राज्यों के नाम फाइनल करने के लिए सरकार ने कुछ स्टैंडर्ड तय किए थे जिनके आधार पर यूपी, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु के नाम पर मुहर लगी। कौन राज्य डिवाइस पार्क के लिए कितनी सुविधा और इनसेंटिव दे सकता है, मंजूरी के लिए महत्वपूर्ण पैरामीटर रहा।
सस्ते होंगे मेडिकल उपकरण
केमिकल और उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक मेडिकल डिवाइस पार्क बनने से देश में आयात होने वाले उपकरणों पर निर्भरता घटेगी और देश में ही बड़े-बड़े उपकरण बनाए जा सकेंगे। इलाज से जुड़ी डिवाइस बनाने के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा और उन्हें सरकार की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा दी जाएगी। देश में उपकरण बनने से कीमतें घटेंगी और इलाज का खर्च भी कम हो जाएगा। कंपनियों की लागत घटने से भी उपकरणों के दाम गिरेंगे। इस क्षेत्र में फार्मा कंपनियां उतरेंगी, साथ ही अस्पतालों में डिवाइस सप्लाई करने वाली कंपनियां भी पार्क में उपकरण बना सकेंगी।
राज्यों को कितना मिलेगा पैसा
मेडिकल पार्क में निवेश के लिए राज्य सरकार मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर कंपनियों को देगी ताकि कंपनियों को सुविधा हो। एक जगह पर बनने वाले ऐसे पार्कों में हर तरह की बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। इससे चिकित्सा क्षेत्र की दिशा में उपकरणों के निर्माण का बड़ा इकोसिस्टम तैयार हो सकेगा।पार्क में स्टैंडर्ड सुविधाओं से लेकर अन्य सुविधाएं भी शामिल होंगी। देश के चारों पार्कों को 400 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यानी कि एक पार्क के लिए सरकार 100 करोड़ रुपये देने जा रही है. 100 करोड़ की 70 फीसदी राशि कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की जाएगी।
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार
अभी भारत में मेडिकल डिवाइस का मार्केट लगभग 70,000 करोड़ रुपये का है। एशिया में भारत मेडिकल डिवाइस का चौथा सबसे बड़ा बाजार है। निर्माण के लिहाज से देखें तो दुनिया में कुल 2 परसेंट की हिस्सेदारी भारत की है. यानी पूरी दुनिया जितनी डिवाइस बनाती है, उसका महज 2 परसेंट ही भारत में बनता है. इस मामले में ग्लोबल इंडस्ट्री का आकार 250 अरब डॉलर का है।







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