











































मेदांता अस्पताल के चिकित्सा।
लखनऊ। मेदांता अस्पताल लखनऊ में पूरी तरह से बच्चों के इलाज के लिये समर्पित अत्याधुनिक पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (बच्चों के लिए गहन देख रेख सेवा) की शुरुआत हो गई है। अब राजधानी लखनऊ में एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार के बाल रोगों का इलाज़ सरलता से उपलब्ध होगा। यह सुविधा मेदांता के अनुभवी व कुशल डॉक्टर्स की देखरेख में 24x7 उपलब्ध होगी। इस सुविधा के शुरू हो जाने से अब उत्तर प्रदेश और इसके सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों के बाल रोगियों के इलाज के लिए मेट्रो शहरों की ओर रुख नही करना होगा।
मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ में पीआईसीयू के तहत जिन सुविधाओं की शुरुआत हुई उनमें गंभीर बीमारियाँ के ईलाज के साथ वेंटिलेटर, डायलिसिस, एकमो (इसीएमओ), सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलोजी, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कैंसर आदि से सम्बन्धित अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाएं 24x7 उपलब्ध रहेंगी।

डॉ दिलीप दुबे, एसोसिएट डायरेक्टर क्रिटिकल केयर एंड पल्मोनोलॉजी ने बताया, “वर्तमान में उत्तर प्रदेश में केवल जनरल पीडियाट्रिक केयर की सुविधा उपलब्ध है। इनमे देखभाल करने वाले जनरल पीडियाट्रिशियन होते हैं, जबकि मेदांता में यूपी का सबसे उन्नत पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट शुरू किया गया है। इसके लिए सुपर-स्पेशलाइज्ड पीडियाट्रिक इंटेनसिविस्ट्स की टीम है, जो इसका संचालन करती है। इस सेटअप में क्रॉस-इन्फेक्शन को रोकने के सभी संभव इंतजाम किए गाये है, जो इलाज के दौरान बच्चों को होने वाले इन्फेक्शन से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लिए एयर प्योरिफिकेशन हेपा-फिल्टर्स जैसे उपकरण लगाये गए है।”
इस अवसर पर डॉ अनिल गुप्ता - सीनियर कंसलटेंट, पीडियाट्रिक इंटेनसिविस्ट – मेदांता हॉस्पिटल ने कहा, “पिछले दो दशकों में विश्व भर में पीडियाट्रिक आयी सी यू की सुविधा में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है भारत में अभी भी पीडियाट्रिक आईसीयू की सुविधा मेट्रोपॉलिटन एवं बड़े शहरों में ही उपलब्ध है। इस नई आधुनिकतम सेवा के शुरू होने से यहाँ पहले से मौजूद पीडियाट्रिक केयर के परस्पर सहयोग से गंभीर बच्चों में जीवन का संचार करेगी और मील का पत्थर साबित होगी।”
"वर्तमान समय में बाल रोग गम्भीर चुनौतियों में से एक है क्योंकि बच्चों के आगे आने वाले भविष्य को प्रभावित करते हैं। दुनिया भर में बच्चों की गम्भीर बीमारियों के इलाज के लिए लगातार शोध चलते रहते हैं। बच्चों में होने वाली बीमारियों का नकारात्मक असर न केवल बच्चे व परिवार पर पड़ता है बल्कि समय से इलाज न होने पर यह देश के लिए एक बहुमूल्य ह्यूमन रिसोर्स के नुकसान का कारण भी बनता है। इसलिए बच्चों में होने वाले रोगों का समय से इलाज नितांत अवाश्यक है। इन सभी मुद्दों को ध्यान के रखते हुए ही मेदांता हॉस्पिटल ने देश की अत्याधुनिक पीआईसीयू की शुरुआत की है, यह यूपी में पहली सबसे अत्याधुनिक पीआईसीयू है।"
मेदांता में पीडियाट्रिक्स से सम्बंधित इलाज के लिए इंटीग्रेटेड मेडिकल यूनिट है, जिसका उद्देश्य बच्चों को पूरी तरह संवेदनशीलता के साथ उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इनमें इनपेशेंट बाल चिकित्सा सुविधाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, जिसके तहत विशेष व महत्वपूर्ण देखभाल भी शामिल है। यह सुपर-स्पेशियलिटी टीम है, जिसमें ऑन्कोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और क्लिनिकल नर्सेज की टीम बच्चों के लिए सबसे उन्नत तकनीक और नवीनतम शोध द्वारा अपनाई गई चिकित्सा पद्धति का उपयोग करती है।







हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 3465
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 1232
हुज़ैफ़ा अबरार September 04 2026 0 721
हुज़ैफ़ा अबरार September 08 2026 0 518
हुज़ैफ़ा अबरार September 01 2026 0 476
हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 420
हुज़ैफ़ा अबरार September 07 2026 0 406
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9142
एस. के. राणा January 20 2026 0 5649
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5418
एस. के. राणा February 01 2026 0 5411
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5306
एस. के. राणा January 13 2026 0 4942
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4886
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87316
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35393
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38440
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35931
लेख विभाग March 19 2022 0 35581
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73253
बच्चों में अस्थमा के लक्षणों में शामिल है - खांसी जो दूर नहीं होती है, खांसी जो वायरल संक्रमण के बाद
हेपेटाइटिस एक बीमारी है जो यकृत की सूजन का कारण बनती है और इसे नुकसान पहुंचाती है। अगर अनियंत्रित हो
डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है और इसे कंट्रोल करना मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं है। आयुर्वेदिक च
कोविड-19 के इलाज में बिना मंजूरी के प्रयोग होने वाली दवाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब
अब सरकार ने तय किया है कि एंबुलेंस सेवा का संचालन खुद करेगी। मरीजों को समय पर वाहन उपलब्ध कराने के
गोरखपुर में रहस्यमयी वायरल फीवर का कहर है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा 10 साल से कम उम्र के बच्चे आ र
गुड़ में कई तरह के आवश्यक मिनरल्स और विटामिन होते है। जो त्वचा के लिए प्राकृतिक क्लींजर का काम करते ह
राजधानी में डेंगू के मामलों में फिर से तेजी आई है। दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के मह
श्रीलंका मेडिकल एसोसिएशन ने राजपक्षे को लिखे पत्र में कहा कि अस्पतालों ने चिकित्सा सामग्री के उपयोग
दुनियाभर में कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली एम्स ने एडवाइजरी जारी की है।अब परिसर में मास्

COMMENTS