











































प्रतीकात्मक चित्र
कानपुर। रीजेंसी हेल्थ कानपुर के डॉक्टरों के अनुसार सर्दियों के दौरान ऐसा देखा जाता है कि लोग शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहते हैं और ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने लगते हैं जिससे उनका वजन बढ़ जाता है। इस वजह से उनका कोलेस्ट्रॉल स्तर भी बढ़ जाता है जिससे हार्ट अटैक से पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति काफ़ी चिंताजनक है। यह बिस्तर पर पड़े मरीजों या सर्जरी या बीमारी से उभररहे लोगों के लिए और भी बुरा साबित हो सकता है। कम शारीरिक गतिविधि और अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल लेवल सर्दियों के महीनों में दिल के दौरे या दिल से संबंधित बीमारियों के होने का कारण बन सकता है, खासकर मरीजों मे ये समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं।
रीजेंसी हेल्थ, कानपुर (Regency Health Kanpur) के कंसलटेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट (Consultant Interventional Cardiologist) डॉ अभिनीत गुप्ता ने कहा कि सर्दियों (winters) मे हर 5 मरीज़ में से एक को अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि का अनुभव हो सकता है। इसका कारण यह है कि बदलते मौसम के साथ कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) के लेवल में काफी उतार-चढ़ाव होता है। इस उतार चढ़ाव की वजह से सर्दियों के महीनों में हाई कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों को हार्ट अटैक (heart attack) का ख़तरा ज्यादा बढ़ जाता है। कई अन्य अध्ययनों से भी पता चला है कि सर्दियों के महीनों में दिल के दौरे और दिल से संबंधित मौतों में वृद्धि होती है। सर्दियों का समय हाई कोलेस्ट्रॉल (high cholesterol patients) मरीजों, मोटापे से ग्रस्त (obese), डायबिटीज (, diabetics) से पीड़ित या शारीरिक गतिविधि न करने वाले लोगों के लिए बुरा हो सकता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार LDL कोलेस्ट्रॉल को 'बैड कोलेस्ट्रॉल' (Bad Cholesterol) कहा जाता है। इस तरह के कोलेस्ट्रॉल से आर्टरी ब्लॉक हो जाती हैं। क्रिसमस के तुरन्त बाद ऐसे केस गर्मियों की तुलना में 10 से 20 प्रतिशत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इससे दिल के दौरे या स्ट्रोक (stroke) का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर सामान्य रूप से स्वस्थ लोगों के साथ मरीजों को भी अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच कराने और जनवरी में क्रीम और मक्खन का सेवन कम करने का सुझाव देते हैं।
कई अध्ययनों में यह भी पता चला है कि जब अंग की आर्टरीज भी अस्थायी रूप से सिकुड़ने लगती हैं तो ठंड के मौसम में हृदय (heart) खून पंप करने के लिए दोगुना प्रयास करता है। इससे सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक होने का खतरा दोगुना हो जाता है।
रीजेंसी हेल्थ कानपुर के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट कंसलटेंट डॉ अभिनीत गुप्ता ने बताया कि सर्दियों में अक्सर ब्लड प्रेशर (blood pressure) बढ़ जाता है क्योंकि इस दौरान आर्टरी सिकुड़ने लगती है जिससे खून प्रवाहित होने के लिए ज्यादा दबाव की आवश्यकता होती है। इस ज्यादा दबाव से दिल का दौरा पड़ सकता है। सर्दियों में हमारे खाने की आदतें भी बदल जाती हैं और लोग ठंड के कारण एक्सरसाइज करना छोड़ देते हैं, जिससे वजन बढ़ने लगता है। हम यह साफ़ देख सकते हैं कि खराब खान-पान के कारण कोलेस्ट्रॉल के लेवल में वृद्धि से भी हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
ठंड के मौसम में ज्यादा खाने का मन करता है और आमतौर पर इस दौरान भूख बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके शरीर को गर्म रखने के लिए कैलोरी की जरूरत होती है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सर्दियों में कोलेस्ट्रॉल का लेवल इतनी तेजी से बढ़ता है। इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल वाले खाद्य पदार्थों को इस दौरान नहीं खाना चाहिए। तले हुए खाद्य पदार्थ (Fried foods) जैसे पकोड़े, फ्राई और आलू के चिप्स, प्रोसेस्ड मीट जैसे हॉट डॉग और सॉसेज, डेसर्ट जैसे गुलाब जामुन, हलवा, खीर , फास्ट फूड और पनीर नहीं खाने चाहिए। यहां तक कि अगर आपको ऐसे खाद्य पदार्थों की खाने की इच्छा हो रही है, तो स्वाद के लिए उन्हें बहुत कम मात्रा में खाएं।

सर्दियों में खान पान का ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि ज्यादा फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को खाना चाहिए। नियमित एक्सरसाइज या योग (Regular exercise or yoga) करना चाहिए। तनाव कम लेना चाहिए। तैलीय खाद्य चीजों से परहेज करना चाहिए। कम तैलीय चीजों को खाने से कोलेस्ट्रॉल के लेवल से बचने में मदद मिलती है और इस तरह दिल के दौरे की संभावना भी कम हो जाती है। जितना हो सके सर्दियों में धूम्रपान और शराब के सेवन से बचना चाहिए।
इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी हैं जो आपके कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रण में रखने और हृदय की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। आप फलों और सब्जियों का सेवन भी अपने खानपान में रोज शामिल कर सकते हैं और MUFA (मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड) से भरपूर तेलों जैसे कि तिल का तेल, सरसों का तेल, जैतून का तेल आदि का सेवन करें। नियमित रूप से नट्स खाएं। विटामिन, मिनिरल और अच्छे मोनोअनसैचुरेटेड फैट (monounsaturated fats) के स्रोत, खराब कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं। इसके अलावा घुलनशील फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे इसबगोल, अधिकांश पत्तेदार सब्जियां, ओट्स और साबुत दालें खाने से कुल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है।







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