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हरी सब्जियाँ और पोषक भोजन लेने के मामले में बच्चे चिढ़ते हैं और उनसे बचने की कोशिश करते हैं। जब मैं बड़ी हो रही थी, तब मेरी माँ इसका खास ध्यान रखती थी कि मैं क्या खा रही हूँ। अब मैं अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत होने और फिटनेस का श्रेय उन्हें ही देती हूँ। मुझे स्वास्थ्यकर खाने का महत्व समझ आया और मेरे शेड्यूल के लिये मैं उनकी आभारी थी। इससे मुझे अपनी बेटियों के लिये भी छोटी उम्र से ही हेल्दी डाइट की योजना बनाने में मदद मिली। कभी-कभी स्वाद के लालच में आना ठीक है, लेकिन हमें अपने शरीर में पोषक-तत्वों का संतुलन सुनिश्चित करना चाहिये।
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मेरा निजी तौर पर मानना है कि छोटी उम्र से ही खाने से जुड़ी अच्छी आदतें डालने से लंबी अवधि में कई फायदे मिलते हैं और इसलिये, चूंकि मैंने छोटी उम्र से इसकी शुरूआत की थी, मैं आपको भी इसकी सलाह देती हूँ। शुरूआत का सर्वश्रेष्ठ तरीका है स्मार्ट फूड चॉइसेस को पर्याप्त मात्रा में अपने घर पर उपलब्ध रखकर अपने बच्चों में उनकी आदत डालना, जब बच्चा भूखा हो, तब उसे शुद्ध और स्वास्थ्यकर स्नैक्स देना और जब भी वह खाना मांगे, पोषक भोजन को सबसे पसंदीदा विकल्प के रूप में रखना। शुरूआत से ही बच्चे में निहित चेतना के लिये यह सचेत कोशिशें करने से बेहतर स्वास्थ्य का मार्ग बनाने में मदद मिलेगी, तब भी जब वह बड़ा हो जाएगा |
बादाम- बादाम बच्चों के लिये बेहतरीन स्नैक्स हैं- वे कुरकुरे, स्वादिष्ट और मीठे होते हैं, इसलिये उन्हें नकारना आसान नहीं होता है। और, उनमें कई पोषक-तत्व होते हैं, जैसे विटामिन ‘ई’, मैग्नीशियम, प्रोटीन, रिबोफ्लेविन, आदि, जो शरीर की वृद्धि और विकास के लिये महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, बादाम संतुष्टि देने वाले गुणों के लिये जाने जाते हैं और भोजन के बीच बच्चों को पूर्णता का अनुभव देते हैं। उनमें इम्युनिटी को सपोर्ट करने वाले पोषक-तत्व भी होते हैं, जैसे जिंक, कॉपर और फोलेट- इसलिये मैं आपको अपने बच्चे की डाइट में रोजाना एक मुट्ठी बादाम जोड़ने की सलाह दूंगी।
अगर आप सोच रहे हैं कि अपने बच्चे को बादाम कैसे दें और बच्चे में बादाम खाने की आदत कैसे डालें, तो इसके कई तरीके हो सकते हैं। सबसे पहले तो सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा बादाम से दिन की शुरूआत करे, भीगे या छिले हुए, या अपने मॉर्निंग मिल्कशेक के हिस्से के तौर पर, या भोजन के बाद के डेजर्ट के रूप में उन्हें उसके टिफिन बॉक्स में डाल दें। आप दिन के दौरान निश्चित समय पर उसे मुट्ठीभर बादाम भी दे सकते हैं। इसके अलावा, बादाम को ओट्स, दलिया, दाल में मिलाकर भी बच्चे को खिलाया जा सकता है। एक बार आपका बच्चा इस रूटीन में आने के बाद, मेरा आश्वासन है कि बादाम नहीं मिलने पर वह मांगेगा, और यह पूरी जिंदगी के लिये रोजाना की आदत बन जाएगी और आपको खुशी होगी कि आपने अपने बच्चे की मदद की।
हरी सब्जियाँ- बच्चों को हरी सब्जियाँ पसंद नहीं होती हैं, यह एक वैश्विक तथ्य है। जब मैं छोटी थी, तब मुझे भी वह पसंद नहीं थीं, लेकिन मेरी माँ ने सुनिश्चित किया कि मैं उन्हें खाऊं। पेरेंट्स के लिये, अपने बच्चे को हरी सब्जियाँ खिलाना, वह भी खुशी से, इसमें थोड़ी रचनात्मकता और नवाचार चाहिये, लेकिन बच्चे को इसकी आदत पड़ने के बाद, मेरा विश्वास कीजिये, आप जीत जाएंगे! हरी सब्जियों में फाइबर, फोलेट और विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ प्रचुर मात्रा में होता है और वे शरीर के विकास में मदद करती हैं। इसके अलावा, माना जाता है कि हरी सब्जियाँ मोटापे के जोखिम को कम करने में सहायक होती हैं और उनमें एंटीऑक्सीडेंट्स उच्च मात्रा में होते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। अपने आस-पास बहुत सारा जंक फूड और मीठा देखते हुए, हरी सब्जियाँ अपने बच्चे के वजन को नियंत्रित रखने के लिये किसी भी पेरेंट के लिये स्वागत योग्य हो सकती हैं।
आपका बच्चा हरी सब्जियों का मजा ले, इसका एक अच्छा तरीका है उन्हें उनकी पसंद के स्वाद में मिलाना, आप अनूठे और रोचक सलाद बना सकते हैं (सलाद पत्ता, फेटा या मौसमी फल के साथ), उन्हें घर के बने पिज्जा या पास्ता में मिला सकते हैं, या अनोखे सैंडविच कॉम्बिनेशन बना सकते हैं। हरी सब्जियों के लिये नवाचार जरूरी है, आप जितना प्रयोग करेंगे, उतना ही आपका बच्चा उनका मजा लेगा, तो मिक्सिंग शुरू कर दीजिये!
डेयरी उत्पाद- नाश्ते से पहले या डिनर, दलिया के नाश्ते के बाद गर्म दूध हो या लंच/डिनर के साथ दही या पेय के तौर पर लस्सी, हम भारतीयों को डेयरी उत्पाद बहुत पसंद हैं। हमारे पास कई विकल्प हैं और डेयरी का कॉन्सेप्ट हमारे भोजन में रचा-बसा है, इसलिये अपने बच्चे को डेयरी उत्पादों के लिये लुभाना ज्यादा कठिन नहीं है। दूध, पनीर, दही, छाछ जैसे डेयरी फूड्स में कैल्शियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस और अन्य पोषक-तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो डिहाइड्रेशन, दांत का क्षय, और छोटी आयु के रोगों की रोकथाम में मदद करते हैं। आमतौर पर बच्चों को गर्म दूध की गंध अच्छी नहीं लगती है, लेकिन अगर आप उसमें थोड़ा शहद या स्वीटनर डाल दें, तो वे उसे आसानी से पी लेंगे। इसके अलावा, ताजे फलों को दूध या दही में मिलाइये और जल्दी से स्वादिष्ट मिल्कशेक और स्मूथीज बनाइये, अगर आपका बच्चा दूध पीने से चिढ़ता हो। मिल्कशेक में बादाम मिलाइये, ताकि वह ज्यादा स्वास्थ्यकर और पोषक-तत्वों से प्रचुर बन जाए।
छोटी आयु से ही यह आदतें डालने से मौसमी बुखार/रोगों के विरूद्ध मजबूत प्रतिरोधकता बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, सुनिश्चित कीजिये कि आप अपने बच्चे के नाश्ते, लंच और डिनर का शेड्यूल सेट करें, ताकि उसे दैनिक पोषण मिलता रहे।







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