













































प्रतीकात्मक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पानी की जांच के लिए गांवों स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। अब लोग ग्राम स्तर पर पानी की शुद्धता की जांच करा सकेंगे। इसके लिए राज्य के सभी 826 ब्लॉक में पानी की जांच के लिए बड़ी योजना तैयार की जा रही है। इस काम में अच्छे महाविद्यालय व इंजीनियरिंग कालेजों को जोड़ा जाएगा।
इस योजना के लिए पीपीपी मॉडल पर एक एमओयू विद्यालयों व राज्य पेयजल व स्वच्छता मिशन के बीच होगा। इसके लिए इन कालेजों का एक निश्चित धनराशि अनुबंध के तहत दी जाएगी। पानी के नमूनों की जांच इन कालेजों की प्रयोगशालाओं में कैमिकल के जरिए हो सकेगी।
इस सारी कवायद का मकसद पूरे राज्य में जल जीवन मिशन के तहत सभी लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करना है ताकि प्रदूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। खासतौर पर जेई व एईस के खतरों से दूर रहा जा सके। इसलिए इन बीमारियों से प्रभावित इलाकों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
चलेगी सचल प्रयोगशाला
इसके अलावा यूपी सरकार की योजना अपनी सचल प्रयोगशाला चलाने की है। इसके जरिए पानी के सामान्य मानकों के अलावा हैवी मेटल व बैक्टीरिया की जांच होगी। सभी जिलों में एक-एक प्रयोगशाला के अलावा ब्लाकों में भी प्रयोगशाला बनाने का प्रस्ताव बन रहा है। इस तरह की प्रयोगशालाओं के निर्माण, संचालन पर पहले साल 160.30 करोड़ खर्च होने हैं। प्रयोगशालाओं की स्थापना, संचालन व प्रबंधन का काम निजी एजेंसियों को दिया जाएगा। इनका चयन ई- टेंडर के जरिए होगा। हर प्रयोगशाला साल में 3000 सैंपल या हर महीने 250 सैंपल की जांच करेगा।
वर्तमान में स्थिति
75 जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में 40 प्रयोशालाओं में यूनीफार्म ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी मानटरिंग प्रोटोकाल के तहत इनका नवीनीकरण किया जा रहा है। अभी 48 ब्लाकों में प्रयोगशालाएं हैं लेकिन दक्ष कर्मचारियों की कमी है जबकि अभी पांच मोबाइल प्रयोगशाला का संचालन निजी कंपनी कर रही है।







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