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लंदन। मलेरिया के टीके की 3 प्रारंभिक खुराक के एक साल बाद लगाई गई बूस्टर खुराक आर 21/मैट्रिक्स-एम मलेरिया से बचाने में कारगर होगा। इस मच्छर जनित बीमारी के खिलाफ 70 से 80 फीसदी सुरक्षा प्रदान करने में ये वैक्सीन सक्षम है। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की तरफ से मलेरिया की नई वैक्सीन डेवलप की गई है। वहीं इस टीके का लाइसेंस सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास है।
चैरिटी मलेरिया (Charity Malaria) नो मोर की तरफ से बताया गया है कि इस वैक्सीन का तैयार होना यानी बच्चों को मलेरिया से होने वाली मौतों से बचाना है। साथ ही अब यह मान सकते हैं कि मलेरिया (Malaria) को पूरी तरह से खत्मा किया जा सकता है। मलेरिया की प्रभावी दवाई को तैयार करने में एक सदी से ज्यादा का समय लग गया है। मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी बहुत ही जटिल मानी जाती है। बीमारी शरीर के अंदर ही कई तरह के स्वरूप ले लेती है और इस वजह से इससे बचाना नामुमकिन माना गया था।
बता दें कि रिसर्च में बुर्किना फासो (Burkina Faso) के 450 बच्चे शामिल हुए, जिनकी उम्र पांच से 17 महीने के बीच है। इन्हें तीन समूहों में बांटा गया। पहले दो समूहों में शामिल 409 बच्चों को मलेरिया रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगाई गई। वहीं, तीसरे समूह के बच्चों के रेबीज (rabies) से बचाव में कारगर टीका दिया गया। सभी टीके जून 2020 में लगाए गए। यह अवधि मलेरिया के प्रकोप के चरम पर होने से पहले की है। अनुसंधान में मलेरिया रोधी टीके की बूस्टर खुराक (booster dose) लगवाने वाले प्रतिभागियों में 12 महीने बाद इस मच्छर जनित बीमारी के खिलाफ 70 से 80 फीसदी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई।
Updated by Aarti Tewari







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