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नई दिल्ली। देशभर के दूसरे राज्यों से एम्स (AIIMS) में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आसपास के राज्यों के जिला अस्पतालों को टेली मेडिसिन (Telemedicine) के जरिए एम्स से जोड़ने का फैसला किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने बुधवार को एम्स में सभी विभागों के अध्यक्ष की बैठक के बाद यह फैसला लिया है। इसका मकसद एम्स में दूर के इलाकों से आने वाले ऐसे मरीजों की भीड़ कम करना है, जो सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए यहां आते हैं, जबकि उनका इलाज जिला अस्पतालों में किया जा सकता है। इस सुविधा के तहत हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे।
अगर मरीज सामान्य बीमारियों से पीड़ित है तो एम्स उन्हें जिला अस्पतालों में जाने के लिए कहेगा। अगर किसी विशेषज्ञ की राय लेनी होगी तो एम्स के विशेषज्ञ जिला अस्पतालों के डॉक्टरों को इलाज की दिशा भी बता सकेंगे और जरूरत पड़ने पर ही एम्स बुलाया जाएगा।
खून जांच सैंपल जमा करने वालों को राहत : स्वास्थ्य मंत्री ने खून जांच कराने के लिए लाइनों में लगने वाले मरीजों को राहत दी है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सितंबर के बाद से एम्स में ब्लड जांच के लिए सैंपल देने का समय साढ़े 5 घंटे तक बढ़ा दिया गया था। अब यह करीब तीन घंटे और बढ़ाने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। नया प्रस्ताव लागू होने पर मरीज सुबह 8 से शाम छह बजे तक ब्लड सैंपल दे सकेंगे।
फोन पर समस्या जानकर दी जाएगी सलाह
एम्स में टेलीमेडिसिन की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसमें विशेषज्ञ अपनी ओर से एम्स आने वालों की समस्या जानेंगे और उचित सलाह देंगे।
1. नंबर जारी होगा : एम्स हेल्पलाइन नंबर जारी करेगा। इसमें वीडियो कॉल की सुविधा भी होगी। इसे राज्यों के जिला अस्पतालों से जोड़ा जाएगा। एम्स आने से पहले व्यक्ति इस पर कॉल कर अपनी परेशानी बता सकेगा।
2. स्थिति की जांच होगी : विशेषज्ञ मरीज की स्थिति देखते हुए या तो उसे दिल्ली बुलाएंगे या जिला अस्पताल भेजेंगे। अगर जिला अस्पताल में मरीज का इलाज संभव होगा तो उसे इतनी दूर बुलाने के बजाय इलाज वहीं कर दिया जाएगा।
3. सलाह देंगे : एम्स के विशेषज्ञ जिला अस्पताल के डॉक्टरों को मरीज के मामले में सलाह देंगे। अगर मरीज ज्यादा गंभीर है और वहां नहीं ठीक हो सकता तो उसे एम्स या अन्य अस्पताल में भेज दिया जाएगा।







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