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मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने के आवश्यक एनईईटी को विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भी अनिवार्य करने को लेकर सरकार ने विस्तृत जानकारी दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उम्मीदवारों के असमंजस को दूर करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने पहले ही एडमिशन ले लिया है, उन्हें एनईईटी देने की आवश्यकता नहीं होगी.
मंत्रालय ने कहा है कि जिन विद्यार्थियों ने मौजूदा नियमों के आधार पर एडमिशन ले लिया है, उन्हें परीक्षा में भाग नहीं लेना होगा. बता दें कि वर्तमान में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के आधार पर विदेश में एडमिशन दिया जाता है. वहीं मई 2018 के बाद भारत से बाहर किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को एनईईटी परीक्षा में एडमिशन लेना आवश्यक होगा.
सरकार की ओर से एनईईटी को अनिवार्य करने के फैसले बाद उन छात्रों ने इस नियम में बदलाव करने की मांग की थी, जिसके बाद से ये संशोधन किया गया है. बता दें कि हर साल करीब 7000 विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए विदेश जाते हैं और विदेश में लोग चीन और रूस की तरफ ज्यादा रूख करते हैं. सरकार का कहना है कि जो लोग बाहर गए हैं, उनका समय और पैसा खर्च हुआ है, इसलिए यह चिंता का विषय है.
गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने विदेश में डॉक्टरी की पढ़ाई के इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए भी राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) को अनिवार्य बना दिया है. मंत्रालय ने भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) को प्रवेश परीक्षा नियमावली 2002 संशोधित करने को भी कहा है. बताया जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला छात्रों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए किया है.







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