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लखनऊ। रिहायशी आवास से निकलने वाला इस्तेमाल किया हुआ गंदा पानी कहां जाता है और दूषित जल को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए किस प्रकार से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का प्रयोग किया जाता है। इन तमाम जानकारियों के साथ प्रत्यक्ष अनुभव लेने के लिए कॉलेज ऑफ नर्सिंग, एसजीपीजीआईएमएस (SGPGIMS) के 45 नर्सिंग स्टूडेंट्स (nursing students) एशिया के सबसे बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे। इस शैक्षिक दौरे (educational tour) के दौरान छात्रों को विभिन्न ट्रीटमेंट यूनिट्स, उनकी प्रक्रियाओं और पानी और गंदे पानी की गुणवत्ता के मानकों से भी परिचित कराया गया। इस दौरान स्टूडेंट्स ने एसटीपी पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं (health services) के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
भरवारा एसटीपी की कार्यदायी संस्था सुएज इंडिया के प्लांट इंचार्ज राजेश देशराज ने छात्रों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant) के फायदे व इसकी तकनीक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारे घरों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी किस तरह से नदी, तालाब में पहुंचकर दूषित कर देता है। इसको रोकने और दूषित जल को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने छात्र-छात्राओं को शहर के सीवरेज सिस्टम के संरचना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीवेज के सुरक्षित निस्तारण से सीवेज में मौजूद रोगजनक जीवाणुओं (pathogenic bacteria) के कारण होने वाली विभिन्न बीमारियों के प्रसार में भी कमी आती है।







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