देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

वयस्‍कों का टीकाकरण: मिथक बनाम सच्‍चाई

टीकों के बारे में जानकारी रखना और आम गलतफहमियों को दूर करना महत्‍वपूर्ण है, इसलिए आप अपने डॉक्‍टर से प्रतिरक्षण पर पूरी बातचीत करें।

0 34706
वयस्‍कों का टीकाकरण: मिथक बनाम सच्‍चाई

लंबी अवधि तक रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाये रखने के लिये टीकाकरण रोकथाम की सबसे प्रभावी रणनीति है, लेकिन वयस्‍कों का प्रतिरक्षण उपेक्षित रहा है।
 
भारत में टीके का कम कवरेज होने के पीछे अपर्याप्‍त जागरूकता, आधिकारिक अनुशंसाओं के एक स्‍थापित निकाय का अभाव और टीके से हिचकिचाहट जैसे कारण हैं। उदाहरण के लिये, भारत में टीकों की उपलब्‍धता और वैश्विक अनुशंसाओं के बावजूद टाइफाइड के मामले बढ़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि वयस्कों को इसका प्रभावकारी प्रयोग करने के लिए निवारक समाधान के रूप में प्रतिरक्षण के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है।
 
असोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया की वयस्‍कों के प्रतिरक्षण से जुड़ी अभी तक की पहली अनुशंसाएं भारत में वयस्‍कों के प्रतिरक्षण की आवश्‍यकता को उजागर करती हैं।
 
इन अनुशंसाओं पर टिप्‍पणी करते हुए, प्रोफेसर निर्मल कुमार गांगुली, भूतपूर्व डायरेक्‍टर जनरल, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कहा कि, “भारत में वयस्‍कों का प्रतिरक्षण कवरेज बढ़ाने की क्षमता है। प्रमाण-आधारित इन अनुशंसाओं को विकसित करने के लिये, हमने कार्डियोलॉजी से लेकर पल्‍मोनोलॉजी और गायनीकोलॉजी से लेकर नेफ्रोलॉजी तक की विभिन्‍न विशेषज्ञताओं वाले स्‍वास्‍थ्‍यरक्षा विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया था। इसके परिणाम में ज्ञान का एक व्‍यापक निकाय मिला, जिसने भारत में वयस्‍कों के प्रतिरक्षण पर सर्वश्रेष्‍ठ पद्धतियों और भरोसेमंद सूचना की रूपरेखा दी। इन अनुशंसाओं के माध्‍यम से हम वयस्‍कों के टीकाकरण को तेज गति से सूचित किया जाना और अपनाया जाना सुनिश्चित करने के लिये प्रतिमान में बदलाव लाने की उम्‍मीद करते हैं।”
 
एबॉट इंडिया की मेडिकल डायरेक्‍टर डॉ. श्रीरूपा दास ने बताया कि, “टीकाकरण संक्रामक रोगों की रोकथाम करता है, जीवन की गुणवत्‍ता को लंबे समय तक ठीक रखता है, लेकिन वयस्‍कों के प्रतिरक्षण पर कम ध्‍यान दिया जाता है। एपीआई की अनुशंसाएं जागरूकता बढ़ाने और स्‍वास्‍थ्‍यरक्षा पेशेवरों को प्रमाण-आधारित सूचना से युक्‍त करने में मदद करेंगी, ताकि उन्‍हें टीके की अनुशंसा करने और लगाने में मार्गदर्शन मिल सके। एबॉट में हमारा लक्ष्‍य टीके से रूक सकने वाले रोगों से लोगों को बचाने के लिये जागरूकता उत्‍पन्‍न करना है, ताकि वे भरा-पूरा और स्‍वस्‍थ जी‍वन जी सकें।”
 
टीकों के बारे में जानकारी रखना और आम गलतफहमियों को दूर करना महत्‍वपूर्ण है, इसलिए आप अपने डॉक्‍टर से प्रतिरक्षण पर पूरी बातचीत करें!
 
नीचे टीकों से जुड़े 5 आम मिथक और उन्‍हें दूर करने के लिये तथ्‍य दिये जा रहे हैं :
 
मिथक 1 : टीके बच्‍चों के लिये होते हैं।
 
तथ्‍य: टीकों की अनुशंसा जीवन की विभिन्‍न अवस्‍थाओं में की जाती है। बचपन में लगने वाले टीकों का सुरक्षा प्रभाव बीतते समय के साथ चला जाता है, इसलिये बूस्‍टर शॉट्स की ताजा जानकारी रखना जरूरी है। तीव्र वैश्विकरण और अंतर्राष्‍ट्रीय यात्रा की आवृत्ति बढ़ने के साथ, वयस्‍कों में ऐसे रोगों से संक्रमित होने की संभावना बढ़ी है, जिन्‍हें टीकों से रोका जा सकता है, जैसे कि इंफ्लूएंज़ा, हेपेटाइटिस ए और बी, आदि। यह रोग वयस्‍कों को ज्‍यादा प्रभावित कर सकते हैं, सहरूग्‍णताओं को उत्‍तेजित कर सकते हैं और वयस्‍कों की मृत्यु दर बढ़ा सकते हैं।
 
ऐसे टीके हैं, जो आपको बचपन में नहीं लगे हों, लेकिन वयस्‍क होने पर लगवाने चाहिये, जैसे कि डिप्‍थेरिया, टीटनस, पर्टूसिस (डीपीटी) टीका, जो एक बूस्‍टर शॉट है, जिसकी अनुशंसा हर दस साल में एक बार लगवाने के लिये की जाती है।
 
मिथक 2 : सभी वयस्‍कों को टीकों की जरूरत नहीं होती है।
 
तथ्‍य : टीकाकरण पूरी आबादी के लिये सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य की एक महत्‍वपूर्ण रणनीति है, जिसमें स्‍वस्‍थ वयस्‍क भी आते हैं और कई टीकों की विश्‍वभर में अनुशंसा की जाती है। इनमें इंफ्लूएंज़ा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए और बी के लिये टीके शामिल हैं। इन रोगों ने भारत में मौसमी महामारियों का रूप लिया था।
 
हीपैटाइटिस बी वन जैसे कतिपय ख़ास टीके की भी ज्यादा ज़रुरत है, विशेषकर जोखिम वाली आबादी के बीच जिनमें सहरूग्‍णताओं वाले लोग, स्‍वास्‍थ्‍यरक्षा प्रदाता, बुजुर्ग लोग और गर्भवती महिलाएं सम्मिलित हैं।
 
मिथक 3 : टीके अनावश्‍यक परेशानी दे सकते हैं और मुझे बीमार कर सकते हैं।
 
तथ्‍य : टीके फायदेमंद होते हैं और लंबी अवधि में रोगों और हानिकारक जटिलताओं से बचा सकते हैं। इस प्रकार वे स्‍वास्‍थ्‍य के लिये बेहतर परिणाम देते हैं, ताकि आप भरपूर और परेशानी के बिना जीवन जीएँ। इसके अलावा, टीकों से बीमारी नहीं होती है, हालाँकि थोड़े समय के लिये थोड़ा बुखार, दर्द और पीड़ा जैसे कुछ साइड इफेक्‍ट्स हो सकते हैं, जिनकी चिंता नहीं करनी चाहिये - वास्‍तव में यह टीके को शरीर द्वारा दी जाने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है।
 
मिथक 4 : स्‍वाभाविक रूप से फ्लू होना टीका लगवाने से बेहतर है, जिससे मेरा प्रतिरक्षी तंत्र कमजोर हो जाएगा।
 
तथ्‍य : स्‍वाभाविक रूप से फ्लू होने का मतलब है आप संभावित गंभीर रोग के प्रति संवेदनशील हो रहे हैं, जिसके लक्षण हल्‍के से लेकर तीव्र तक हो सकते हैं, जैसे कि बुखार, जोड़ों में दर्द, खाँसी आदि। यह चिंताजनक जटिलताओं को उत्‍तेजित कर सकता है और निमोनिया, श्‍वसन की बाधा में तब्‍दील हो सकता है और प्राण भी ले सकता है, खासकर उन्‍हें, जो उच्‍च जोखिम में हैं। टीकाकरण आपको रोकथाम के योग्‍य रोगों से बचाने के लिये बहुत सुरक्षित विकल्प है और आपके प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत बनाता है।
 
मिथक 5 : मैंने पिछले साल इंफ्लूएंज़ा का टीका लगवाया था, इसलिये मुझे उसकी दोबारा जरूरत नहीं है।
 
तथ्‍य: इंफ्लूएंज़ा के वायरस लगातार बदल रहे हैं और इसलिये, डब्‍ल्‍यूएचओ वार्षिक आधार पर सबसे नये स्‍ट्रेन की पहचान कर उसके लिये अनुशंसाएं देता है। इस प्रकार, हर साल टीका लगवाना तेजी से अनुकूल बनने वाले इंफ्लूएंज़ा वायरसों के विरूद्ध इष्‍टतम और स्‍थायी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये महत्‍वपूर्ण है। यह जरूरी है, खासकर भारत को देखते हुए, जहाँ वर्ष 2012, 2015 और 2017 में राजस्‍थान, महाराष्‍ट्र और गुजरात जैसे विभिन्‍न राज्‍यों में इंफ्लूएंज़ा ने महामारी का रूप ले लिया था। तो हर साल अपना फ्लू शॉट लगवाएं और खुद को सुरक्षित रखें।
 
आगे क्‍या करें : अपनी वैक्‍सीन चेकलिस्‍ट रखें।
 
मिथकों को तोड़ने वाली और गहन जानकारी के लिये अपने डॉक्‍टर से बात करें, ताकि आप टीकाकरण की एक समय-सारणी बना सकें और अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रख सकें!

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

फोन पर मरीजों से ली जाएगी इलाज और अस्पताल के बारे में जानकारी : ब्रजेश पाठक

फोन पर मरीजों से ली जाएगी इलाज और अस्पताल के बारे में जानकारी : ब्रजेश पाठक

हुज़ैफ़ा अबरार August 31 2026 406

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप एआई आधारित वाइस बॉट का उद्देश्य केवल मरीजों से फीडबैक लेना नहीं है, बल्क

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने 150 टीबी मरीजों को मासिक पुष्टाहार वितरित किया

रंजीव ठाकुर May 13 2022 29502

रेडक्रास सोसायटी की लखनऊ शाखा के सचिव अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि 150 मरीजों को सोसायटी ने गोद लिया है औ

देश में बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3 लाख 47 से ज्यादा और ओमिक्रॉन संक्रमण के 9,692 मामले मिले

देश में बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3 लाख 47 से ज्यादा और ओमिक्रॉन संक्रमण के 9,692 मामले मिले

एस. के. राणा January 21 2022 31975

देश में बीते 24 घंटे में 3,47,254 नए कोरोना केस मिले। इस दौरान 703 मरीजों की मौत हुई। इस तरह अब तक ठ

सहारा हॉस्पिटल में हृदय रोग से पीड़ित नवजात को मिला नया जीवन।

सहारा हॉस्पिटल में हृदय रोग से पीड़ित नवजात को मिला नया जीवन।

हुज़ैफ़ा अबरार October 10 2021 42559

मरीज को दो दिन तक हॉस्पिटल में रखा गया, वेंटिलेटर लगाने के बाद कुछ समय के बाद वेंटिलेटर हटाया गया। य

कोविड-19 मृतकों के परिजनों को समय से भुगतान नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़ 

कोविड-19 मृतकों के परिजनों को समय से भुगतान नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़ 

एस. के. राणा July 18 2022 36362

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी दावेदार को मुआवजा राशि का भुगतान न किए जाने या फिर उनका दावा ठुकराए

रीजेंसी में 66 वर्षीय हाई-रिस्क महिला के जन्मजात हृदय दोष का उपचार

रीजेंसी में 66 वर्षीय हाई-रिस्क महिला के जन्मजात हृदय दोष का उपचार

हुज़ैफ़ा अबरार August 06 2026 518

मरीज मोटापे और ओबेसिटी हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम से भी पीड़ित थी। मरीज में एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट की सं

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं पर संक्रमण प्रभाव के बारे में जानने के लिए अध्ययन शुरू किया

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं पर संक्रमण प्रभाव के बारे में जानने के लिए अध्ययन शुरू किया

एस. के. राणा March 29 2022 41814

गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं में कोरोना संक्रमण के जोखिम को लेकर अब तक कई वैज्ञानिक दस्तावेज सामने

कोरोना संक्रमण और मानसूनी बीमारियों में ऐसे करें अंतर।

कोरोना संक्रमण और मानसूनी बीमारियों में ऐसे करें अंतर।

लेख विभाग August 02 2021 27139

सामान्य सर्दी और कोविड-19 के बीच अंतर करना बहुत मुश्किल है। लेकिन यह असम्भव भी नहीं है। डॉक्टर्स के

पाकिस्तान में बढ़े शुगर, बीपी और दिल की दवाओं के दाम

पाकिस्तान में बढ़े शुगर, बीपी और दिल की दवाओं के दाम

हे.जा.स. February 15 2023 34988

अचानक दवाएं महंगी होने से पाकिस्तान में हाहाकार मचा है। क्योंकि महंगी दवाओं को जमाखोरों ने स्टॉक कर

डेंगू से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार तैयार

डेंगू से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार तैयार

आरती तिवारी September 26 2022 38065

राजधानी में बढ़ते डेंगू के मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार एक बार फिर से लोगों के साथ मिलकर रोकथाम

Login Panel