देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

अंतर्राष्ट्रीय

अंग प्रत्यारोपण के लिए विकसित हुई ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी

येल यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं की एक टीम ने अंग प्रत्यारोपण के लिए ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी को विकसित किया है। यह कोशिकाओं को मरने से रोकता है और कोशिका की मरम्मत कर देता है।

हे.जा.स.
September 16 2022 Updated: September 17 2022 01:29
0 36025
अंग प्रत्यारोपण के लिए विकसित हुई ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी येल यूनिवर्सिटी

नयी दिल्ली। पूरी दुनिया में लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की वेटिंग लिस्ट में शामिल हैं और हर नौ मिनट पर एक और व्यक्ति इसमें जुड़ जाता है। हज़ारों लोग अंग प्रत्यारोपण के इंतज़ार में दम तोड़ देते हैं। अब इसको लेकर येल यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक तरीका विकसित किया है।

 

येल यूनिवर्सिटी (Yale University) में शोधकर्ताओं की एक टीम ने अंग प्रत्यारोपण के लिए ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी (OrganeX technology) को विकसित किया है। यह कोशिकाओं को मरने से रोकता है और कोशिका की मरम्मत कर देता है। इस टेक्नोलजी की बदौलत अंगों को शरीर के बाहर और लंबे समय तक जिंदा रख पाना मुमकिन हो पाएगा ताकि प्रत्यारोपण के लिए वे लंबी दूरियां तय कर सकें।

मानव अंग प्रत्यारोपण (organ transplant) कई फैक्टरों पर निर्भर करता है। दानदाता और प्राप्तकर्ता एक दूसरे से बहुत ज्यादा दूर नहीं होने चाहिए क्योंकि एक अंग रक्त प्रवाह के बिना कुछ ही घंटे जिंदा रह पाता है। ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी के जरिए मानव अंग (Human organ) प्रत्यारोपण की ज्यादा लम्बी दूरी तय कर सकेंगे।

 

ज्वोनिमिर व्रसेल्जा, ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी टीम के सदस्य ने कहा कि कोशिकाएं उतनी भी जल्दी नहीं मर जाती जैसा कि हम मानते हैं। इस अध्ययन की मदद से हमने ये दिखाया है कि कोशिकाओं को मरने से (restore cell functions) रोका जा सकता है। व्रसेल्जा कहते हैं कि प्रयोगों ने दिखाया कि मृत्यु के कुछ समय बाद हम कुछ खास कोशिका कार्यों को बहाल कर सकते हैं।

 

नेचर जर्नल (Nature journal) में प्रकाशित अध्ययन के शोधकर्तों ने करीब 100 सुअरों पर एक प्रयोग (experiment on pigs) करके देखा कि मृत्यु जैसी स्थिति में रखने के एक घंटे बाद अगर ऑर्गनएक्स लगाया जाता है तो कोशिका संरचनाओं को बचाया जा सकता है। सुअरों को कथित मृत्यु के एक घंटे बाद, ऑर्गनएक्स मशीन में टांग दिया गया। इस मशीन में सेंसर लगे होते हैं जो मेटाबोलिक और रक्तसंचार (blood circulatory के मापदंडों के बारे में रीएल टाइम में सूचना भेजता है. उसके बाद ये सिस्टम, द्रव को जानवर के अंगों में छह घंटे तक पंप करता है।

 

अध्ययन (health Research) के एक और लेखक स्टीफन लाथम ने कहा, हम लोग ये नहीं दिखा पाए कि कोई सा भी अंग पूरी तरह बहाल हो पाया था और दूसरे सुअर में लगाने के लायक हो पाया था लेकिन हमे ये जरूर पता चला है कि हम आणविक स्तर पर कोशिका की मरम्मत चालू कर सकते हैं।

 

शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अध्ययनों की ऋंखला में ये सिर्फ एक पहला कदम था और मानव अंगों को बचाने (save human organs) में इसका इस्तेमाल करने से पहले इस प्रौद्योगिकी से जुड़ी अभी और काफी शोध करने पड़ेंगे। एक बात तो यही है कि द्रव को मानव देह पर इस्तेमाल के लिए उस लिहाज से ढालना होगा और इस प्रौद्योगिकी से एक पूरा समूचा अंग बचाने की बात भी अभी बाकी है।

 

हलांकि मानव पर ऑर्गनएक्स टेक्नोलजी का प्रयोग अभी नहीं किया गया है लेकिन दुनिया के सारे प्रयोग पहले जानवरों पर ही किए गए है। इस प्रयोग के बाद मानव अंग प्रत्यारोपण के लिए भी नए रास्ते खुलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

Updated by Ranjeef Thakur

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

नशे के लिए उपयोग में ली जाने वाली दवाओं के दुरुपयोग पर लगा अंकुश, खरीद और विक्रय सीमा निर्धारित

नशे के लिए उपयोग में ली जाने वाली दवाओं के दुरुपयोग पर लगा अंकुश, खरीद और विक्रय सीमा निर्धारित

रंजीव ठाकुर August 17 2022 51763

कफ़ सीरप का प्रयोग खांसी को दूर भगाने के लिए किया जाता है लेकिन इसमें नशे की मात्रा होने से बहुत से ल

सहजता देती है मनुष्य को भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक एवं और सामाजिक रोगों से मुक्ति

सहजता देती है मनुष्य को भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक एवं और सामाजिक रोगों से मुक्ति

लेख विभाग April 07 2022 40859

व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से ही रोगी नहीं होता, अपितु वह भावनात्मक, मानसिक एवं सामाजिक रोगी भी हो सकता

केजीएमयू और लोहिया संस्थान में कोविड नेगेटिव रिपोर्ट के बाद ही भर्ती 

केजीएमयू और लोहिया संस्थान में कोविड नेगेटिव रिपोर्ट के बाद ही भर्ती 

हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2022 28972

ओपीडी में इस व्यवस्था लागू कर दिया गया है। कोविड की नेगेटिव रिपोर्ट के बाद ही मरीज भर्ती किए जा रहे

दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के चार अस्पताल, रोगी बच्चों की जान बचा पाने में विफल

दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के चार अस्पताल, रोगी बच्चों की जान बचा पाने में विफल

एस. के. राणा March 07 2022 34219

दिल्ली में स्थित केंद्र सरकार के चार अस्पतालों में साढ़े छह साल में औसतन करीब 70 बच्चों की हर महीने

टीबी से डरना नहीं बल्कि बचना है: डॉ. सूर्यकांत

टीबी से डरना नहीं बल्कि बचना है: डॉ. सूर्यकांत

हुज़ैफ़ा अबरार March 29 2022 49854

डॉ. सूर्यकांत ने ऑटो चालकों को सलाह दी कि ऑटो चलाते समय मास्क (mask) का जरूर इस्तेमाल करें, यह टीबी,

फाइलेरिया मरीजों को बहुत अधिक समय तक खड़े नहीं रहना चाहिए - वेक्टर बार्न डिसीज निरीक्षक

फाइलेरिया मरीजों को बहुत अधिक समय तक खड़े नहीं रहना चाहिए - वेक्टर बार्न डिसीज निरीक्षक

रंजीव ठाकुर May 01 2022 27986

फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को बहुत अधिक समय तक खड़े नहीं रहना चाहिए। सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगा ले

गोरखपुर एम्स में अब एमडी-एमएस की भी होगी पढ़ाई

गोरखपुर एम्स में अब एमडी-एमएस की भी होगी पढ़ाई

श्वेता सिंह August 31 2022 44243

अभी एम्स, गोरखपुर में एमबीबीएस व नर्सिंग की पढ़ाई कराई जा रही है। जल्द ही एमडी व एमएस की 50 सीटें

‘वर्ल्ड अस्थमा डे

‘वर्ल्ड अस्थमा डे' पर कार्यक्रम का आयोजन

आरती तिवारी May 01 2023 27633

विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर केजीएमयू, लखनऊ के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा अस्थम

ब्रिटेन ने भारत को रेड सूची से निकला, पूर्ण टीकाकरण वालों को मिली राहत।

ब्रिटेन ने भारत को रेड सूची से निकला, पूर्ण टीकाकरण वालों को मिली राहत।

हे.जा.स. August 07 2021 23649

ब्रिटेन ने कोविड-19 की यात्रा संबंधी पाबंदियों में बदलाव करते हुए भारत को ‘रेड’ सूची से निकाल कर ‘एम

बलरामपुर अस्पताल में शुरू हुई चार बड़ी सुविधाएं: मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

रंजीव ठाकुर May 28 2022 28495

मरीज के शरीर से पस, मूत्र, ब्लड इत्यादि लेकर उसका कल्चर करते हैं जिससे वैक्टीरिया की पूरी जानकारी मि

Login Panel