











































प्रतीकात्मक चित्र
वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार, 3 दिसम्बर को ‘अन्तरराष्ट्रीय विकलांगजन दिवस’ के अवसर पर विश्व में विकलांगजन को लाभान्वित करने वाले नवाचारी और रूपान्तरकारी बदलावों पर ज़ोर दिया है। उन्होंने आगाह किया है कि संकटों से घिरी दुनिया में विकलांगता की अवस्था में रह रहे लोगों पर ग़ैर-आनुपातिक असर पड़ता है।
इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर विकलांगजन (International Day of Persons with Disabilities) के लिये समानतापूर्ण व सुलभ दुनिया के निर्माण में नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है। महासचिव गुटेरेश (Secretary-General Guterres) ने कायापलट कर देने वाले ऐसे समाधानों पर बल दिया, जिनसे टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पाना सम्भव हो और कोई भी पीछे ना छूटने पाए।
यूएन (UN) के शीर्षतम अधिकारी ने अपने सन्देश में ज़ोर देकर कहा कि सार्वजनिक-निजी सैक्टर के बीच विशाल रचनात्मक सहयोग की आवश्यकता होगी, ताकि विकलांगजन (people with disabilities) को लाभान्वित करने वाली नीतियाँ विकसित की जा सकें। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों को तैयार करते समय विकलांगजन को भी प्रक्रिया में सम्मिल्लित किया जाना होगा।
महासचिव के अनुसार संयुक्त राष्ट्र को विकलांगजन के लिये और अधिक सुलभ बनाने के लिये संगठन के भीतर प्रयास किये जा रहे हैं। इस क्रम में, यूएन विकलांगता समावेशन रणनीति इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये रोडमैप प्रदान कर रही है। “मुख्यालय से ज़मीनी स्तर तक, हम डिजिटल सुलभता (digital accessibility) की समीक्षा करने, उसे सम्बोधित करने व बढ़ावा देने के लिये प्रयास कर रहे हैं, और विकलांगता समावेशन पर उदाहरण पेश करते हुए अगुवाई कर रहे हैं।”
यूएन प्रमुख ने बताया कि नवाचार (innovation) और टैक्नॉलॉजी (technology), समावेशन के लिये शक्तिशाली उपकरण साबित हो सकते हैं, जिनसे सूचना सुलभता (information access), शिक्षा व जीवन-पर्यन्त सीखने-सिखाने में मदद मिलेगी। साथ ही, विकलांगजन के लिये कार्यबल व वृहद स्तर पर समाज में समान भागीदारी करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
अवरोधों पर पार पाना
संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में क़रीब 15 फ़ीसदी आबादी – हर सात में से एक व्यक्ति – विकलांगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रही है। एक अरब से अधिक लोगों की आवश्यकताओं को समझना, उन्हें समाज में पूर्ण रूप से एकीकृत करने, अधिकारों का सम्मान करने और समावेशी जीवन व्यतीत करने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि टैक्नॉलॉकी के वादे को साकार करने के लिये डिजिटल खाई को पाटा जाना और डिजिटल जगत में मानवाधिकारों (human rights) की रक्षा सुनिश्चित किया जाना अहम है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1992 में प्रस्ताव 47/3 को पारित करके, हर साल 3 दिसम्बर को अन्तरराष्ट्रीय विकलांगजन दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य समाज व विकास के सभी आयामों में विकलांगजन के अधिकारों व कल्याण को बढ़ावा देना, और राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक जीवन में उनकी स्थिति के प्रति जागरूकता का प्रसार करना है।







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