











































विल्सन्स रोग से पीड़ित का लिवर ट्रांसप्लान्ट
नई दिल्ली। इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स (Indraprastha Apollo Hospital) में बिहार से आई 8 वर्षीय बच्ची में जीवनरक्षक लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी (liver transplant) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। बच्ची में दुर्लभ आनुवंशिक रोग विल्सन्स रोग का निदान किया गया था, जिसमें शरीर में अतिरिक्त कॉपर जमा हो जाता है। इसके उपचार के लिए मरीज़ को जीवन भर दवाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि ऐसे कुछ मामलों में लिवर फेलियर के चलते बच्चे कोमा में चले जाते हैं। विलसन रोग (Wilson's disease) में कोमा में चले जाने पर बच्चों में मृत्यु दर 100 फीसदी होती है।
25 मार्च की शाम 8 साल की अंशिका को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, उस समय बच्ची कोमा में थी। इससे पहले एक और अस्पताल में बच्ची का इलाज चल रहा था, जहां उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। अपोलो में डॉ अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट (Pediatric Gastroenterologist), अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप एवं डॉ स्मिता मल्होत्रा और डॉ करूनेश कुमार (कन्सलटेन्ट, पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजी), डॉ अरूण वी, डॉ वरूण एम, डॉ प्रदीप कुमार (कन्सलटेन्ट्स, लिवर ट्रांसप्लान्ट) और डॉ रमन आर (एनेस्थेटिस्ट) की निगरानी में बच्ची को भर्ती किया गया। भर्ती करते ही तुरंत उसे वेंटीलेटर पर डाला गया और लिवर ट्रांसप्लान्ट की सलाह दी गई। साथ ही डायलिसिस और प्लाज़्मा एक्सचेंज थेरेपी (plasma exchange therapy) भी की गई, ताकि शरीर से कॉपर को निकाला जा सके और ट्रांसप्लान्ट से पहले ज़रूरी जांच के लिए समय मिल जाए।
समान या कम्पेटिबल ब्लड ग्रुप डोनर न मिलने की वजह से एबीओ-इनकम्पेटिबल एमरजेन्सी लिवर डोनर लाईव ट्रांसप्लान्ट की योजना बनाई गई। बच्ची की मां ने लिवर डोनेट करने का फैसला लिया। भर्ती के 31 घण्टे बाद, 27 मार्च को लिवर ट्रांसप्लान्ट की प्रक्रिया शुरू हुई। दो दिन बाद उसे वेंटीलेटर से हटाया गया, इसके बाद बच्ची को होश आ गया।
इस जीवन रक्षक लिवर ट्रांसप्लान्ट के बारे में बात करते हुए डॉ अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा, ‘‘इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्ची को भर्ती के तुरंत बाद वेंटीलेटर पर डालना पड़ा। सर्जरी से पहले जांच और फिर फिर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी दोनों ही मुश्किल थे क्योंकि इस मामले में डोनर एबीओ इनकम्पेटिबल था। यह बेहद दुर्लभ मामला था, जहां भर्ती के 31 के घण्टे के अंदर लाईव लिवर ट्रांसप्लानट किया गया। अपोलो के लिवर ट्रांसप्लान्ट प्रोग्राम के तहत अब तक हो चुके 432 पीडिएट्रिक लिवर ट्रांसप्लान्ट्स में से यह पहला मामला था जहां मरीज़ के रिश्तेदार डोनर के साथ एमरजेन्सी एबीओ इन्कम्पेटिबल ट्रांसप्लान्ट हुआ।’
डॉ नीरव गोयल, सीनियर कन्सलटेन्ट, लिवर ट्रांसप्लान्ट, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, ‘‘विल्सन्स रोग एक दुर्लभ रोग है, जिसके लक्षण बेहद गंभीर होते हैं, अगर समय रहते इसका इलाज न हो तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। यह बच्ची जब हमारे पास आई, उसका लिवर फेलियर हो चुका था, दिमाग में अमोनिया कंटेंट के कारण सूजन थी, बच्ची कोमा के चलते बेहोशी की हालत में थी। अपोलो में, हमने परिवार को तुरंत लिवर ट्रांसप्लान्ट की सलाह दी। जिसके बाद बच्ची ठीक है, सर्जरी के 17वें दिन 12 अप्रैल को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।’







हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 406
हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 357
हुज़ैफ़ा अबरार July 09 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4753
एस. के. राणा January 20 2026 0 4641
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4585
एस. के. राणा January 13 2026 0 4403
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4333
एस. के. राणा February 01 2026 0 3962
एस. के. राणा February 04 2026 0 3759
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86826
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34714
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37936
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35413
लेख विभाग March 19 2022 0 35007
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72455
देश में कोविड-19 के मामले अभी भी सामने आ रही है। वहीं कोरोना से लड़ने में वैक्सीन कारगर साबित हुई है
डाइटिशियन, चिकित्सा क्षेत्र में चिकित्सक और मरीज के बीच आहार विशेषज्ञ एक पुल का काम करता है जो मरीज
पीजीआई में अब दुर्घटना में घायल में लोगों को पहले 24 घंटे निशुल्क इलाज मिलेगा। इससे लोगों को काफी सह
रीजेंसी हॉस्पिटल कानपुर में बेहतर कैंसर केयर फैसलिटी की सुविधा मौजूद हैं जहाँ पर सभी कोविड दिशानिर्द
WHO योरोप के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर हैंस हेनरी क्लूगे कहते हैं कि MeND सर्वे के नतीजे याद दिलाते है
निदेशक महिला कल्याण मनोज राय ने इस मौके पर कहा कि "मंडलवार यह प्रशिक्षण हमारी तैयारी को और मजबूत करे
भारत बायोटेक ने कहा कि सभी आपूर्ति के बाद कोवैक्सिन की औसत कीमत 250 रुपये प्रति खुराक से कम है। सरका
अपर चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि गुरबख्शगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत भीतरगांव पड़ता है
पारंपरिक उपचार में मरीज को बार-बार अस्पताल आकर द्रव निकालने की आवश्यकता पड़ती है, जबकि आईपीसी के माध्
आरोग्य स्वास्थ्य मेला का सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्

COMMENTS