












































लखनऊ। मेदांता अस्पताल लखनऊ में एक नए स्ट्रोक क्लिनिक का उद्घाटन किया गया, जिसका उद्देश्य स्ट्रोक के रोगियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं में सुधार करना है।
डॉ ऋत्विज बिहार, एसोसिएट डायरेक्टर न्यूरोलॉजी ने स्ट्रोक के बारे में बताया की भारत में स्ट्रोक का बोझ प्रति वर्ष 1.5 मिलियन से अधिक अधिक है, जो पश्चिमी औद्योगिक देशों की तुलना में बहुत अधिक है। स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है और भारत में स्थायी विकलांगता का सबसे आम कारण है।
उन्होंने बताया कि थ्रोम्बोलिसिस ने एक्यूट स्ट्रोक के प्रबंधन में बड़े बदलाव के लिए उत्प्रेरक का काम किया है। इंट्रावेनस अल्टेप्लेस और टेनेक्टिप्लेस एकमात्र स्वीकृत थ्रोम्बोलाइटिक एजेंट हैं जो वर्तमान में स्ट्रोक की शुरुआत से 4.5 घंटे के भीतर तीव्र इस्केमिक स्टोक के लिए संकेतित हैं।
बहरहाल, 'समय मस्तिष्क है' और थ्रोम्बोलिसिस में समय की देरी को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक का सबसे प्रभावी उपचार होने के बावजूद, दुनिया भर में थ्रंबोलाइसिस की दर सभी स्ट्रोक का मुश्किल से 1-3% है।
डॉ ऋत्विज ने बताया कि स्ट्रोक क्लिनिक निदान, उपचार, जीवन शैली में मदद करके स्ट्रोक वाले सभी रोगियों का व्यापक, बहु-विषयक और किफायती प्रबंधन प्रदान करेगा।
स्ट्रोक क्लिनिक का उद्घाटन डॉ संजय टंडन, सचिव यूपी एपीआई और डॉ ए के पांडे, एचओडी न्यूरोलॉजी, विवेकानंद पॉलीक्लिनिक, लखनऊ ने किया। उद्घाटन समारोह में डॉ राकेश कपूर, निदेशक मेदांता, लखनऊ और अन्य वरिष्ठ चिकित्सक सहित स्वास्थ्य कर्मचारी, मरीज और उनके रिश्तेदार मौजूद थे।
कार्यक्रम में मेदांता लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ अनूप ठक्कर ,डॉ सुधाकर पांडेय -कंसलटेंट ,डॉ प्रदीप -एसोसिएट कंसलटेंट तथा न्यूरोसर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ रवि शंकर ,एसोसिएट डायरेक्टर डॉ प्रमोद चौरसिया ,कंसलटेंट डॉ सतीश ,कंसलटेंट न्यूरो इंटरवेंशन डॉ रोहित अग्रवाल और इमरजेंसी हेड कंसलटेंट डॉ लोकेन्द्र गुप्ता भी इस आयोजन में सम्मलित हुए।







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