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नयी दिल्ली। अफ्रीकी देश गाम्बिया में कथित रूप से भारतीय कफ सिरप से 66 बच्चों की मौत के मामले में कंपनी मेडन फार्मा को क्लीन चीट मिल गई है। मेडेन फार्मा की खांसी (कफ) की दवा के नमूने गुणवत्ता में खरे पाए गए हैं। कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने कहा कि अब वह अपने कारखाने को फिर से खोलने के लिए मंजूरी मांगेगी, क्योंकि सिरप से लिए गए नमूनों में कुछ भी गलत नहीं पाया गया है। डब्ल्यूएचओ को ऐसा संदेह था कि भारत में बने कफ सिरप के कारण ही गाम्बिया में बच्चों की मौत हुई थी।
मेडेन के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing director) नरेश कुमार गोयल ने रॉयटर्स से कहा, "मुझे भारतीय नियामक और न्यायपालिका (Judiciary) की प्रक्रियाओं पर पूरा भरोसा है। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। हम अब अधिकारियों से कारखाने (factories) को फिर से खोलने का अनुरोध करने का प्रयास करेंगे, लेकिन मुझे नहीं पता कि ऐसा कब होगा। हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं।"
हालांकि, 13 दिसंबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को लिखे एक पत्र में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल वीजी सोमानी ने कहा कि मेडेन के उत्पादों के नमूनों के परीक्षण में सबकुछ सही पाया गया है और उनमें एथिलीन ग्लाइकॉल (ethylene glycol) या डायथिलीन ग्लाइकॉल का पता नहीं चला है। बता दें कि कंपनी के दावे पर डब्ल्यूएचओ ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।







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