












































प्रतीकात्मक चित्र
मेरठ। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन अस्पतालों में दवा की सप्लाई ढंग से नहीं कर पा रहा है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा हैं। मेरठ मेडिकल कॉलेज इसका जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है।
मेरठ मेडिकल कॉलेज (Meerut Medical College) के प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता (Dr RC Gupta, Principal) कहते है कि कल भी लगभग सात लाख रुपये की 35 प्रकार की दवाएं मिली हैं जो नाकाफी है। मरीजों का लोड ज्यादा है (patient load is high)। सर्जिकल आइटम (Surgical items) भी बेहद कम रह गए हैं। कारपोरेशन से 295 के सापेक्ष सिर्फ 77 प्रकार की दवाएं मिलीं हैं। एंटीबायोटिक (antibiotics) ही नहीं, ग्लूकोज तक उपलब्ध नहीं है (glucose is not available)।
यही नहीं! उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (Uttar Pradesh Medical Supplies Corporation) मेरठ मेडिकल कॉलेज को 295 तरह की दवाओं में से केवल 196 प्रकार की दवाएं ही दे सका है। जबकि दवाएं खरीदने के लिए 1.3 करोड़ रुपया एडवांस दिया जा चुका है।
हार्ट के मरीजों (heart patients) के लिए करीब 25 प्रकार की दवाएं निर्धारित हैं, जिसमें से महज तीन या चार ही यहाँ उपलब्ध हैं। खून पतला करने (Medicines for blood thinning), कोलेस्ट्रॉल (cholesterol), पेशाब (urine) और धड़कन को नियंत्रित करने वाली दवाएं (heart rate control) नहीं मिल रही। मरीजों को सिर्फ इकोस्प्रिन (Ecosprin) और गैस की गोली (gas tablets) मिल रही है। जिन मरीजों में स्टेंट डाला गया था उन्हें भी खून पतला करने की दवाएं नहीं दी जा सकी हैं (medicinesnotavailable)।
डॉ आरसी गुप्ता ने कहा कि प्रदेश भर के मेडिकल कालजों से दवाएं उधार पर मांगी (medicines were sought on loan), लेकिन सिर्फ प्रयागराज ने नार्मन सलाइन (Norman Saline) की 29000 बोतलें दीं हैं। बहुत सी जरुरी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं (essential medicines are not in stock)। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन सिर्फ 16 प्रतिशत दवाएं दे पाया है।
मेरठ मेडिकल कॉलेज में जरुरी दवाएं न मिलने से गरीब मरीजों के लिए इलाज (treatment for poor patients) महंगा हो गया है। सभी आवश्यक दवाएं (essential medicines) बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। हार्ट, न्यूरो, कार्डियक सर्जरी, नेफ्रो, और यूरो के इलाज (treatment of heart, neuro, cardiac surgery, nephro, and uro) की दवाएं खत्म हो गई है। यहाँ ओपीडी (OPD) में रोजाना लगभग ढाई हजार मरीज पहुंचते हैं और डेढ़ सौ मरीजों का ऑपरेशन (patients are operated) होता है।







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