











































ऋषिकेश। दिल्ली में वायु प्रदूषण इस वेग से बढ़ रहा है कि उसे गंगा तट और गुजरात तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी। दिल्ली का वायु प्रदूषण दिलों तक न पहुंचे, अभी तो वायु प्रदूषण के कारण प्राइमरी स्कूल अनिश्चित काल के लिये बंद किये हैं, आगे न जाये क्या होगा इसलिये हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने साधना सप्ताह के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संदेश देते हुये उक्त बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण (air pollution) इस समय दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरणीय स्वास्थ्य (world's biggest environmental health threat) खतरा है, जो दुनिया भर में प्रतिवर्ष 70 लाख मौतों का कारण बनता है। वायु प्रदूषण अस्थमा से लेकर कैंसर, फेफड़ों की बीमारियों और हृदय रोग (asthma to cancer, lung diseases and heart disease) जैसी कई बीमारियों का कारण बनता है और उन्हें बढ़ाता है। वर्ष 2021 में पाँच वर्ष से कम आयु के 40,000 बच्चों की मौत का सीधा संबंध पीएम 2.5 प्रदूषण से था। हमारे देश में वायु प्रदूषण प्रमुख रूप से वाहन उत्सर्जन, विद्युत उत्पादन, औद्योगिक अपशिष्ट, खाना पकाने हेतु बायोमास दहन, निर्माण क्षेत्र और फसल जलने जैसी घटनाओं से अधिक हो रहा हैं।
चिदानंद स्वामी (Chidanand Swami) ने कहा कि वायु प्रदूषण केवल दिल्ली (Delhi) और उसके आस-पास के क्षेत्रों की समस्या नहीं है बल्कि यह समस्या राष्ट्रीय स्तर की है। दिल्ली के आस-पास प्रदूषण का यह एक बड़ा एयरशेड है जिसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा एवं उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से, हरियाणा और यहाँ तक कि राजस्थान का अलवर क्षेत्र भी शामिल है। अब समय आ गया है कि प्रकृति को प्रदूषित करने वाले उद्योगों पर ‘पर्यावरण कर’ (Environmental Tax) लगाया जाना चाहिये तथा पौधों के रोपण और संरक्षण हेतु बोनस देने की योजना बनानी होगी।
कीनिया से आये कांजी भाई ने भी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण (increasing pollution) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कीनिया में उन्होंने 11 लाख पौधों का रोपण किया और 11 हजार पौधों का रोपण कच्छ में किया। उन्होंने नैरोबी में भी सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किया है।
स्वामी जी ने कांजी भाई की कीनिया से कच्छ तक पौधा रोपण (planting saplings) की यात्रा का अभिनन्दन करते हुये कहा कि इसी तरह प्रत्येक व्यक्ति माँ गंगा के पावन तट से संकल्प लेकर जाये ंतो ग्लोबल वार्मिग और क्लाइमेंट चेंज के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किया जा सकता हैं। ग्लोबल वार्मिग (Global warming) एक ग्लोबल समस्या है इसलिये इसके समाधान के लिये कार्य भी वैश्विक स्तर पर करने की जरूरत है और इसका वैश्विक निदान भी यही है कि हम सभी को अपने-अपने स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है।
स्वामी माधवप्रिय दास जी (Swami Madhavpriya Das ji) ने कहा कि पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी द्वारा चलायी गयी पौधारोपण और संरक्षण की मुहिम और इस दिव्य प्रेरणा को साधना सप्ताह के प्रसाद स्वरूप लेकर जायेंगे तथा कांजी भाई की तरह सभी श्रद्धालु इस पावन संकल्प को पूरा करने में योगदान प्रदान करेंगे।
स्वामी जी ने स्वामी माधवप्रिय दास जी, स्वामी बालकृष्ण स्वामी जी (Swami Madhavpriya Dasji, Swami Balkrishna Swamiji) और अन्य पूज्य संतों को भावपूर्ण विदाई दी। सभी पूज्य संत और श्रद्धालु परमार्थ निकेतन के दिव्य गंगा तट और पावन प्रसंगों की यादों के साथ कृत-कृत्य होकर विदा हुये।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कांजी भाई को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका अभिनन्दन किया।







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