











































मरीज़ बच्चा अपने माता-पिता के साथ
लखनऊ। सहारा हॉस्पिटल लखनऊ में एक बच्चे की जन्म से उलझी हुई आँतों की सफल सर्जरी करके जीवनदान दिया। बच्चे की आँतों में इंफेक्शन था और वे रोटेट हो रही थीं। जिससे खून की सप्लाई कम हो गयी है। आँतों में नोड्स यानी गांठ भी थें। सहारा हॉस्पिटल के गैस्ट्रो सर्जन डॉक्टर अजय यादव ने समय रहतें ऑपरेशन करके परिवार को राहत पहुंचाया।
प्रयागराज के रहने वाले दो साल एक महीने के बच्चे आदविक को पेट दर्द व उल्टी की तकलीफ थी। पेट दर्द होने पर वह अक्सर पेट को पकड़ लेता था। इसके अलावा उसको 15 दिन से लगातार पांच से छह बार दिन में मोशन भी हो रहा था। तब बच्चे के माता-पिता ने बच्चे को प्रयागराज में बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया, जहां उन्होंने बताया कि बच्चे को कोल्ड डायरिया (cold diarrhoea) की शिकायत है। डॉक्टर ने कुछ दवाएं (medicines) दीं। थोड़े समय तो बच्चा ठीक रहा परंतु उसके बाद फिर से उसके पेट में दर्द (pain) और उल्टी (vomiting) की शिकायत शुरू हो गयी।

प्रयागराज (Prayagraj) के प्राइवेट हॉस्पिटल में ही बच्चे को भर्ती कराना पड़ा तो पता चला कि बच्चे के पेट में इंफेक्शन है। वहीं उसका इलाज शुरू किया गया। लगभग 5 दिन एडमिट रहने के बाद डेढ़ महीने तक बच्चा ठीक रहा, परन्तु पुनः उसे उल्टी और लैट्रिन बार-बार आने की शिकायत शुरू हो गयी।
बच्चे के माता - पिता ने मरीज़ बच्चे को सहारा हॉस्पिटल (Sahara Hospital) के गैस्ट्रो सर्जन डॉक्टर अजय यादव को दिखाया। डॉक्टर अजय यादव ने सभी रिपोर्ट देखने के बाद सी.टी. स्कैन (C.T. Scan) की जांच करवायी और उसकी रिपोर्ट देखने के बाद बच्चे की तुरन्त सर्जरी (surgery) करने का निर्णय लिया।
सी. टी. स्कैन की रिपोर्ट से पता चला था कि बच्चे की आंतें (intestines) जन्म से उलझी हुई हैं और रोटेट हो रही हैं जिससे खून की सप्लाई (blood supply) कम हो गयी है। साथ ही बच्चे के नोड्स यानी गांठ भी दिखाई दी। मरीज के माता-पिता को बताया गया कि इसका एकमात्र इलाज सर्जरी द्वारा ही सम्भव है, परन्तु पहले बच्चे के पेट में जो इंफेक्शन (infection) था, उसको नियंत्रित करके सर्जरी की गयी।
जिस समय बच्चे की सर्जरी का प्लान किया गया था उस समय ब्लड सर्कुलेशन भी बच्चे के अन्दर पूरी तरह से नहीं हो रहा था, क्योंकि इन्फेक्शन बढ़ा हुआ था। यद्यपि कि यह एक अत्यंत जटिल सर्जरी थी फिर भी डॉक्टर अजय यादव ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए बहुत कुशलता और योग्यता पूर्वक इसे सम्पन्न किया।
इस सर्जरी में डॉ.अजय यादव ने आंतों की पोजीशन को चेंज किया और घुमी और मुड़ी हुई जो भी आंतें थी उनको लेजर विधि (laser method) से ऑपरेशन करके ठीक किया। यह बहुत ही दुर्लभ केस था, आमतौर पर इसमें मरीज का बचना बहुत मुश्किल हो जाता है, लेकिन डॉ. अजय यादव ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन करके बच्चे के माता-पिता को बहुत बड़ी खुशी दी।







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