











































नयी दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रूकना कोई नहीं चाहता है और सड़कों पर तेज रफ़्तार के बीच रेड सिग्नल्स भले ही वाहन की गति को रोक देते हो परन्तु वायु प्रदूषण तेजी से भागते हुए जीवन पर पूर्ण विराम लगाने की पूरी कोशिश कर रहा है। अब एक रिपोर्ट में पाया गया है कि इसका दुष्प्रभाव बच्चों की दिमागी क्षमता पड़ता है।
एंवायर्नमेंटल पॉल्यूशन जर्नल (journal Environmental Pollution) की एक रिसर्च में दावा किया गया है कि स्कूल जाते समय रास्तें में बच्चों का जहरीली हवा में रहना हानिकारक सिद्ध हो रहा है और उनकी याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। वाहनों के धुआँ से बच्चों की दिमागी क्षमता (brain capacity of children) पर असरदार असर पड़ रहा है।
स्कूली बच्चे (health research) आज कल स्कूल आते तथा जाते समय लम्बी दूरी तय करते है और अनुमान के अनुसार उन्हें रोजाना एक से दो घंटे सड़कों पर वाहनों के बीच रहना पड़ता है। अमूमन ट्रैफिक सिग्नल्स (vehicular smoke) पर भी काफी समय व्यतीत होता है जहाँ अधिकतर वाहन अपना इंजन स्टार्ट रखते हैं।
ये जानना जरुरी है कि प्रदूषित वायु (polluted air) में PM 2.5 एवं ब्लैक कार्बन (Black carbon) नाम का तत्व होता है जो अपने 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम दूरी की हवा को जहरीली कर देता है। इसी प्रदूषित हवा में बच्चे प्रतिदिन लम्बा सफर तय करते हैं जो उनके स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है।
ऐसे में इस अध्यन (students memory) का असर भारत में ज्यादा होता नज़र आएगा। यहाँ की ख़राब सड़के, स्कूली वाहनों की फिटनेस, परिवहन विभाग की लापरवाही जैसे अनगिनत कारण है जिनकी वजह से हमारी आने वाली पीढ़ी वायु प्रदूषण का तेजी से शिकार बन रही है।







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