देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

मौसमी बदलाव से बढ़ सकता है अस्थमा अटैक।

अस्थमा का मौसमी बदलाव के कारण बढ़ जाना एक सुपरिचित घटना है। अस्थमा की बीमारी एलर्जनए जैसे मोल्ड फंगस पालतू पशुओं के बाल डस्ट माईट्स एवं वायरल संक्रमण से बढ़ सकती है।

0 19117
मौसमी बदलाव से बढ़ सकता है अस्थमा अटैक। प्रतीकात्मक

- डॉ आलोक श्रीवास्तव, 
चेस्ट फिजिशियन, सहारा अस्पताल। 

मॉनसून का समय ज्यादातर लोगों के लिए राहत लेकर आता है। झमाझम बारिश से लोगों को भारी गर्मी से आराम मिलता है। लेकिन अस्थमा पीडि़तों के लिए यह समय मुश्किल भरा होता है और उनकी स्थिति को और ज्यादा खराब कर देता है। अस्थमा का मौसमी बदलाव के कारण बढ़ जाना एक सुपरिचित घटना है। अस्थमा की बीमारी एलर्जनए जैसे मोल्ड फंगस पालतू पशुओं के बाल डस्ट माईट्स एवं वायरल संक्रमण से बढ़ सकती है। मॉनसून भी अस्थमा की बीमारी के बढ़ने का एक मुख्य कारण है। बारिश के मौसम में कम धूप मिलने के कारण विटामिन डी की कमी हो जाती हैए जो अस्थमा के अटैक के बिगड़ने का एक मुख्य कारण है।   

मॉनसून के दौरान ठंडा वातावरण भी अस्थमा के लक्षणों व संकेतों को और ज्यादा खराब कर सकता है। आसपास के वातावरण में नमी से फंगस हो सकती है जिससे एलर्जी बढ़ सकती है और अस्थमा का अटैक आ सकता है। साथ ही इस मौसम में वायरल संक्रमण की संभावनाएं ज्यादा हो जाती हैं तथा एलर्जन बढ़कर लक्षणों को और ज्यादा गंभीर बना सकते हैं।

हर बार मॉनसून में अस्थमा के कारण अस्पताल में आने वाले लोगों में भारी वृद्धि हो जाती है। यह वृद्धि खासकर बच्चों में होती है। मौजूदा परिदृश्य में जब मरीज अस्पताल जाने या डॉक्टर से नियमित रूप से परामर्श लेने में असमर्थ हैं तब अस्थमा को बढ़ने से रोकना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। इसलिएए यह बहुत आवश्यक है कि अस्थमा को नियंत्रण में रखा जाए। सबसे अच्छा यह होगा कि मॉनसून के दौरान अस्थमा के प्रबंधन के लिए उपयोगी परामर्श सदैव अपने साथ रखे जाएं।

खांसी और सांस की तकलीफ अस्थमा के लक्षण हैं। यह सांस की एक क्रोनिक बीमारी है जो फेफड़ों में मौजूद हवा की नलियों में सूजन के कारण उत्पन्न होती है। अस्थमा पीडि़त को हवा की नली में सिकुड़न महसूस होती हैए जिसके कारण मरीज को सामान्य रूप से सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

अस्थमा के अटैक के इलाज के लिए आपातकालीन कक्ष में जाने के मामले बारिश के मौसम में बढ़ गए जो नमी में वार्षिक वृद्धि के साथ एक या दो महीने बढ़े और शुष्क मौसम में कम हो गए। यह पारस्परिक संबंध घर में डस्ट माईट्स और वायरल संक्रमण के प्रसार के साथ संबंध होने की संभावना बढ़ाता है। इसलिएए यह जरूरी है कि अस्थमा के प्रबंधन के लिए मॉनसून के दौरान सांस की समस्याओं के लिए डॉक्टर के परामर्श से काम किया जाए।

अस्थमा पीडि़तों के लिए मॉनसून का समय मुश्किल होने के कुछ अन्य कारण निम्नलिखित हैं।
1- मॉनसून के दौरान वायरल संक्रमण के बढ़ने की संभावना होती है। वातावरण में अनेक वायरस एवं बैक्टीरिया का प्रवेश हो जाता है। बारिश के मौसम में सर्दी.जुकाम बढ़ जाते हैंए जिससे अस्थमा पीडि़तों के लिए समय और ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
2- फंगस बढ़ जाती है। निरंतर बारिश होने से आसपास के वातावरण में फंगस की वृद्धि होती है। बरसात के मौसम में ये फंगस मोल्ड हवा में नमी जैसे अनेक कारणों से बढ़ जाते हैं। इससे ज्यादातर रात में विपरीत प्रभाव देखने को मिलते हैं।
3- घरों में मौजूद डस्ट माईट्स सबसे आम एलर्जन हैं जिनकी संख्या मॉनसून के दौरान ह्यूमिडिटी बढ़ने के कारण बढ़ जाती है। वातावरण में बादल छाए रहने के कारण धूप कम हो जाती हैए जिसके कारण चादरों के सूखने के लिए पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती और घरों में डस्ट माईट बढ़ जाते हैं।

मॉनसून के दौरान अस्थमा पर नियंत्रण कैसे रखें?
1. अस्थमा बढ़ाने वाली चीजों से बचें।
2. इन्हेलर्स को पास में रखें।
3. डॉक्टर से परामर्श लें।
4. डॉक्टर के परामर्श से नियमित तौर पर दवाई लेते रहें।

लगातार बढ़ने के बाद भी अस्थमा सबसे कम नियंत्रित की गई बीमारियों में से एक है। अस्थमा के प्रबंधन के लिए इन्हेलर्स ओरल थेरेपी के मुकाबले सबसे प्रभावशाली इलाज के रूप में उभरे हैं। इन्हेलर्स द्वारा यह दवाई पहले खून में तथा शरीर के अन्य अंगों में प्रवाहित होने की बजाय सीधे फेफड़ों में पहुंचती है। इसलिए दवाई की कम खुराक लेने की जरूरत पड़ती है और इसके साईड इफेक्ट भी कम होते हैं।

इस मॉनसून अस्थमा के कारण अपनी खुशी को कम न होने दें और इन्हेलेशन थेरेपी द्वारा अस्थमा पर नियंत्रण पाएं।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

बिना स्टाफ, मशीनरी और पैथोलॉजी के चल रहा 70 बेड का सरकारी ट्रामा सेंटर

बिना स्टाफ, मशीनरी और पैथोलॉजी के चल रहा 70 बेड का सरकारी ट्रामा सेंटर

रंजीव ठाकुर July 24 2022 33512

सीतापुर जनपद के खैराबाद में 19 दिसम्बर 2016 से 70 बेड का ट्रामा सेंटर संचालित हो रहा है लेकिन जरूरी

 झलकारी बाई अस्पताल के गेट के सामने प्रसव, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

झलकारी बाई अस्पताल के गेट के सामने प्रसव, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

आरती तिवारी September 02 2023 41870

झलकारी बाई अस्पताल के गेट के सामने शुक्रवार को महिला ने बच्चे को जन्म दिया। हालांकि, प्रसव के तुरंत

लखनऊ के नामी डॉक्टरों के नाम करोड़ों की ठगी करने वाले पांच गिरफ्तार।

लखनऊ के नामी डॉक्टरों के नाम करोड़ों की ठगी करने वाले पांच गिरफ्तार।

हुज़ैफ़ा अबरार February 08 2021 21927

अपराधी पहले डॉक्टरों की फर्जी मार्कशीट बनाते फिर उसके आधार पर फाइनेंस कंपनी से 20,00,000 का लोन लेते

एम्स में विभिन्न पदों के लिए निकाली गई 9 वैकेंसीज, शीघ्र करे आवेदन

एम्स में विभिन्न पदों के लिए निकाली गई 9 वैकेंसीज, शीघ्र करे आवेदन

हे.जा.स. May 01 2022 27403

ये वैकेंसीज विभिन्न पदों के लिए निकाली गई हैं जिनमें जूनियर कंसल्टेंट एपिडेमियोलॉजी, रिसर्च ऑफिसर, ड

आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का अधिकार अभियान।

आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का अधिकार अभियान।

हुज़ैफ़ा अबरार January 11 2021 22709

आचार्य मनीष ने कहा, 'हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक जनहित  याचिका दायर करके आयुर्वेद को उ

ब्रिटेन में किशोरों को लगेंगे, कोविड टीके की बूस्टर खुराक

ब्रिटेन में किशोरों को लगेंगे, कोविड टीके की बूस्टर खुराक

हे.जा.स. January 17 2022 34040

16 और 17 साल आयुवर्ग के प्रत्येक किशोर को आने वाले दिनों में टीके की तीसरी खुराक दी जाएगी। ऐसे किशोर

पगडंडी से गुजर कर पहुँचना पड़ेगा राजधानी के इस टीबी अस्पताल में

पगडंडी से गुजर कर पहुँचना पड़ेगा राजधानी के इस टीबी अस्पताल में

रंजीव ठाकुर April 15 2022 36941

बहुत ढूंढने पर आलमबाग टीबी केन्द्र हमें चंदर नगर स्वास्थ्य केन्द्र के पीछे मिला जो पूरी तरह उपेक्षित

चंडीगढ़ स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल हिम्स को केंद्र सरकार ने दी मान्यता।

चंडीगढ़ स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल हिम्स को केंद्र सरकार ने दी मान्यता।

हुज़ैफ़ा अबरार November 29 2021 665393

हिम्स एकीकृत चिकित्सा विज्ञान अस्पताल है, जो विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के विवेकपूर्ण मिश्रण का उपय

कोविड के बाद सुपरबग बनेगा खतरा

कोविड के बाद सुपरबग बनेगा खतरा

विशेष संवाददाता January 03 2023 21490

सुपरबग खतरनाक पैथोजन है, जिस पर दवा भी बेअसर हो जाती है। अस्पतालों से इसके फैलने की संभावना अधिक है

हेट्रो की टोसिलिजुमाब को कोविड के इलाज के लिए आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली।

हेट्रो की टोसिलिजुमाब को कोविड के इलाज के लिए आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली।

हे.जा.स. September 07 2021 23957

हेट्रो ग्रुप के चेयरमैन बी पी एस रेड्डी ने कहा, "टोसिलिजुमाब की वैश्विक कमी को देखते हुए भारत में आप

Login Panel