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हुज़ैफ़ा अबरार- कोविड काल में मरीज़ों के मन में बहुत भय था। क्या वह भय अब ख़तम हो गया ?
डॉ एस के नंदा- कोविड काल में जो मरीज़ आते थे उनके मन में भय था। हमलोग उनको सोशल डिस्टैन्सिंग, मास्क और सैनिटाइज़र के बारे में बताते थें। जिससे उनका भय काम हो। लॉकडाउन ख़तम होने के बाद मरीज़ों ने आना शुरू किया लेकिन उनकी संख्या काम थी।
हुज़ैफ़ा अबरार- क्या ओपीडी बहाल होने से मरीज़ों की संख्या बढ़ी है?
डॉ एस के नंदा- हमारे वहां ओपीडी मई में बहाल हो गयी थी। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, मरीज़ों को देखा जा रहा था और ऑपरेशन भी हो रहे थे। टीकाकरण शुरू होने के कारण लोगों के मन से भय कम हुआ है इसलिए मरीज़ों की संख्या तीन चार गुना बढ़ी है।
हुज़ैफ़ा अबरार- क्या सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब मरीज़ों को मिल पाटा हैं ?
डॉ एस के नंदा- हमारा अस्पताल सरकारी है। इसमें गरीबों के लिए जांच और दवा निःशुल्क है। सक्षम लोगों को कुछ जांचों और ऑपरेशन पर थोडा सा शुल्क देना पड़ता है। गरीबों को दवा सहित सारी सुविधांए निःशुल्क हैं।







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