











































लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री तथा चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक इस समय काफी चर्चा में है। विगत दिनों में आपने कई अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया और फार्मेसी कारपोरेशन के गोदाम पर भी छापेमारी की। इन्ही सब मुद्दों को लेकर हेल्थ जागरण ने राजकीय नर्सेज संघ, फार्मासिस्ट संघ और लैब टेक्नीशियन संघ के पदाधिकारियों से खास बातचीत की।
हेल्थ जागरण - नर्सेज संघ ने हाल ही में द्विवार्षिक अधिवेशन किया और नयी कार्यकारिणी का गठन किया गया। नयी सरकार और उपमुख्यमंत्री के दौरों को लेकर क्या कहेंगे?
अशोक कुमार - (महामंत्री राजकीय नर्सेज संघ, उत्तर प्रदेश), हमारी मांगे वही पुरानी है और सरकार भी वही पुरानी है। नर्सेज के 10 हजार रिक्त हैं जिसमें से साढ़े तीन हजार पद इसी सरकार ने 2017 में भरें थे। नर्सेज को चिकित्सा स्वास्थ्य की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है लेकिन जब साढ़े छः हजार पद रिक्त हैं तो कैसे कार्य होगा। पिछले छः साल से हम पदनाम बदलने की मांग कर रहे हैं जिससे कोई वित्तीय भार नहीं पड़ता है। हमें समूह ख का बता कर होम डिस्ट्रिक्ट नहीं दिया जाता जबकि डॉक्टर्स को दिया जाता है। नर्सेज को पीजीआई, मेडिकल कॉलेज के बराबर भत्ता नहीं दिया जा रहा है। प्रत्येक स्थिति में नर्सेज सबसे पहले मरीज को अटैंड करते हैं और खतरा उठाते हैं। इसलिए सबसे पहले सुरक्षा और भत्ते हमको मिलने चाहिए। अधिकारी कुछ करना नहीं चाहते, कोविड काल का 25% भत्ता अभी तक बाकी है। उपमुख्यमंत्री लगातार दौरे कर रहे हैं, वे पहले नर्सेज की समस्याएं समाप्त कर दे फिर दौरें करें।
हेल्थ जागरण - उपमुख्यमंत्री के कारपोरेशन के दौरे को लेकर क्या कहेंगे ?
के के सचान - (संरक्षक, फेडरेशन ऑफ इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन) उपमुख्यमंत्री लगातार दौरे कर रहे हैं, खामियां मिल रही है, जो सच्चाई भी है। लेकिन यह भी देखना होगा कि ये खामियां क्यों है। अभी उन्होंने कारपोरेशन में छापा मारा और कहा यहां ये कमी है, यहां वो कमी है लेकिन व्यवस्था क्यों है इस पर विचार नहीं किया। उन्होंने तापमान को लेकर कहा लेकिन उसकी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा सीढ़ियों पर दवाएं रखी है तो क्या विभाग ने सेल्फ/ रैक्स की व्यवस्था करवाई। एक्सपायर दवाओं को लेकर बहुत बातें हुई लेकिन खरीददार तो कारपोरेशन ही है। जब से फार्मेसी, कारपोरेशन के हाथों में गई तब से यह अव्यवस्था चल रही है। पहले कम्पनियां स्वयं दवाओं की आपूर्ति करती थी और अब हमारा कर्मचारी इसी काम में लगा रहता है।
हेल्थ जागरण - लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन की क्या मांगें हैं ?
सुरेश कुमार रावत - (अध्यक्ष, यूपी लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन एवं अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद) लैब टेक्नीशियन ने कोविड काल में सबसे आगे रह कर कार्य किया। हमारे ही कारण उत्तर प्रदेश कोरोना संक्रमण में पहले स्थान पर आया। हमारे सैंकड़ों लैब टेक्नीशियन कोरोना काल में शहीद हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी माना कि कोविड 19 की जांच के मामले में यूपी नम्बर वन है। इसका खामियाजा यह मिला कि हमारी प्रमुख मांगे जैसे वेतन विसंगति, कैडर रिव्यू और नाम परिवर्तन आदि को पूरा नहीं किया गया। इन मांगों को लेकर समझौता हो चुका है, खाली शासनादेश के लिए रुका पड़ा है। सीएम योगी और जमीनी नेता उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से अपील है कि मेडिकल क्षेत्र की प्रमुख मांगे तत्काल पूरी की जाए।







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