












































प्रतीकात्मक चित्र
पिछले कुछ वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न नकारात्मक स्थितियों ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने और इस बारे में लोगों को जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर (10 October) को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। मनोरोग (Psychiatrists) विशेषज्ञ कहते हैं, चिंता-घबराहट की समस्याओं पर पहले तो गंभीरता से ध्यान न देना नुकसानदायक है, इसके अलावा अक्सर लोग इन विकारों के निदान में भी गलती कर देते हैं।
ज्यादातर मामलों में इसे ब्लड प्रेशर की समस्या मानकर इलाज किया जाता है, हालांकि असल में चिंता-घबराहट के कारण भी ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि चिंता-घबराहट की लंबे समय तक बनी रहनी वाली समस्या सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं, शारीरिक रूप से कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
चिंता-तनाव के कारण हृदय रोगों की समस्या
चिंता-तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य (mental health) की समस्याओं का बने रहना आपमें समय के साथ गंभीर हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है। अध्ययन में पाया गया है कि तनाव की स्थिति शरीर में इंफ्लामेशन को बढ़ा देती है, जो उन कारकों से जुड़ा होता है जिससे हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि चिंता-तनाव के कारण उत्पन्न इंफ्लामेशन के कारण हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने का भी खतरा होता है। तनाव की स्थिति को हृदय गति बढ़ने (टैचीकार्डिया) का भी कारक माना गया है जिसके कारण गंभीर हृदय रोगों का जोखिम जैसे हार्ट अटैक-स्ट्रोक हो सकता है।
तनाव-चिंता को करें कंट्रोल
स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Health experts) कहते हैं, जिस तरह से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता जा रहा है ऐसे में जरूरी हो गया है कि सभी उम्र के लोग तनाव-चिंता (stress-anxiety) को नियंत्रित करने वाले उपाय करते रहें। इसके लिए दिनचर्या में कुछ बातों का विशेष रखा जाना आवश्यक हो जाता है।







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